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Hamirpur (Himachal) News: आसमान में दिखा हुनर, युवाओं ने खुद बनाए और उड़ाए ड्रोन
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एनआईटी हमीरपुर में आयोजित एनसीसी एयर विंग के 10 दिवसीय वार्षिक प्रशिक्षण शिविर (एटीसी-223) में
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हमीरपुर। एनआईटी हमीरपुर में एनसीसी एयर विंग के दस दिवसीय वार्षिक प्रशिक्षण शिविर (एटीसी-223) में कैडेटों ने एयरोमॉडलिंग का प्रदर्शन किया। सोमवार को हुए इस कार्यक्रम में कैडेटों ने स्वयं निर्मित ड्रोन और रेडियो नियंत्रित (आरसी) विमानों की सफल उड़ानें भरीं। इन उड़ानों के माध्यम से कैडेटों ने अपनी तकनीकी दक्षता और रचनात्मक प्रतिभा का परिचय दिया। शिविर के कमांडेंट और 1 एचपी एयर स्क्वाड्रन एनसीसी कुल्लू के कमांडिंग ऑफिसर विंग कमांडर कुणाल शर्मा के नेतृत्व में यह कार्यक्रम हुआ। जूनियर डिवीजन के कैडेटों ने विभिन्न प्रकार के स्टैटिक एयरोमॉडल्स की प्रदर्शनी लगाई। डीएवी मंडी, डीएवी मौहल, केंद्रीय विद्यालय रामशिला, डीएवी लक्कड़ बाजार (शिमला), डीएवी मनाली, सीआईएस कुल्लू और एलएमएस कलैहली के कैडेटों ने अपने मॉडल प्रस्तुत किए।
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तकनीकी कौशल का प्रदर्शन
कुल्लू कॉलेज और आईआईटी मंडी के सीनियर डिवीजन कैडेटों ने कंट्रोल लाइन एयरक्राफ्ट मॉडल का सफल प्रदर्शन किया। कैडेटों द्वारा तैयार किए गए ड्रोन और आरसी विमान की हवाई उड़ान कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रही। इस प्रदर्शन ने अधिकारियों, प्रशिक्षकों और अन्य कैडेटों की सराहना बटोरी। एयरोमॉडलिंग प्रशिक्षक रेशमा ने तकनीकी संचालन की जिम्मेदारी संभाली।
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भविष्य की तकनीक से जुड़ाव
एयरोमॉडलिंग को एयरोस्पेस, ड्रोन तकनीक और रोबोटिक्स जैसे उभरते क्षेत्रों की पहली प्रयोगशाला माना जाता है। यह विद्यार्थियों में डिजाइन, इंजीनियरिंग, समस्या-समाधान और टीमवर्क जैसे व्यावहारिक कौशल विकसित करता है। ये कौशल भविष्य के तकनीकी कॅरिअर में उपयोगी साबित होते हैं। विंग कमांडर कुणाल शर्मा ने कहा कि एयरोमॉडलिंग जैसी गतिविधियां कैडेटों में तकनीकी कौशल, आत्मविश्वास और नवाचार की भावना विकसित करती हैं। इस अवसर पर फ्लाइंग ऑफिसर निश्छल शर्मा, फ्लाइंग ऑफिसर डॉ. चमन, पीआई स्टाफ, एसोसिएट एनसीसी अधिकारी और केयरटेकर अधिकारियों ने कैडेटों का मार्गदर्शन किया। उन्होंने कहा कि ऐसी गतिविधियां युवाओं में विज्ञान, प्रौद्योगिकी, विमानन और नवाचार के प्रति रुचि बढ़ाती हैं। साथ ही, ये नेतृत्व क्षमता, अनुशासन और टीम भावना को भी मजबूत करती हैं।
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तकनीकी कौशल का प्रदर्शन
कुल्लू कॉलेज और आईआईटी मंडी के सीनियर डिवीजन कैडेटों ने कंट्रोल लाइन एयरक्राफ्ट मॉडल का सफल प्रदर्शन किया। कैडेटों द्वारा तैयार किए गए ड्रोन और आरसी विमान की हवाई उड़ान कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रही। इस प्रदर्शन ने अधिकारियों, प्रशिक्षकों और अन्य कैडेटों की सराहना बटोरी। एयरोमॉडलिंग प्रशिक्षक रेशमा ने तकनीकी संचालन की जिम्मेदारी संभाली।
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भविष्य की तकनीक से जुड़ाव
एयरोमॉडलिंग को एयरोस्पेस, ड्रोन तकनीक और रोबोटिक्स जैसे उभरते क्षेत्रों की पहली प्रयोगशाला माना जाता है। यह विद्यार्थियों में डिजाइन, इंजीनियरिंग, समस्या-समाधान और टीमवर्क जैसे व्यावहारिक कौशल विकसित करता है। ये कौशल भविष्य के तकनीकी कॅरिअर में उपयोगी साबित होते हैं। विंग कमांडर कुणाल शर्मा ने कहा कि एयरोमॉडलिंग जैसी गतिविधियां कैडेटों में तकनीकी कौशल, आत्मविश्वास और नवाचार की भावना विकसित करती हैं। इस अवसर पर फ्लाइंग ऑफिसर निश्छल शर्मा, फ्लाइंग ऑफिसर डॉ. चमन, पीआई स्टाफ, एसोसिएट एनसीसी अधिकारी और केयरटेकर अधिकारियों ने कैडेटों का मार्गदर्शन किया। उन्होंने कहा कि ऐसी गतिविधियां युवाओं में विज्ञान, प्रौद्योगिकी, विमानन और नवाचार के प्रति रुचि बढ़ाती हैं। साथ ही, ये नेतृत्व क्षमता, अनुशासन और टीम भावना को भी मजबूत करती हैं।
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