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Hamirpur (Himachal) News: लावारिस आतंक... हर साल औसतन 10 लोगों को अस्पताल पहुंचा रहे बेसहारा पशु, सड़क हादसे भी बढ़े
Fri, 17 Jul 2026 12:56 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Fri, 17 Jul 2026 12:56 AM IST
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सुनील कुमार गांव कक्कड़
- फोटो : Archive
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हमीरपुर। जिले में लावारिस पशुओं की समस्या लगातार गंभीर बनी हुई है। हादसों और हमलों के बाद प्रशासनिक बैठकों का दौर तो चला, लेकिन समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में प्रभावी कदम धरातल पर नजर नहीं आ रहे हैं।
शहर की सड़कों से लेकर सुजानपुर के चौगान मैदान तक कई स्थानों पर लावारिस पशु पैदल राहगीरों और वाहन चालकों के लिए खतरा बने हुए हैं। हर साल औसतन आठ से 10 मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें लोग लावारिस पशुओं के हमलों में घायल होकर अस्पताल पहुंचते हैं।
नादौन क्षेत्र में फोरलेन पर बड़ी संख्या में घूम रहे लावारिस पशुओं के कारण पिछले 15 दिनों में पांच वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो चुके हैं। पिछले तीन वर्षों में जिले में लावारिस पशुओं के हमलों से 30 से अधिक लोगों के घायल होने के मामले सामने आए हैं। हालांकि, कई घटनाएं ऐसी भी हैं जो पुलिस या प्रशासनिक रिकॉर्ड तक नहीं पहुंच पाईं।
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जिले में अधिकांश दुर्घटनाएं रात के समय होती हैं। पशुओं के आपस में भिड़ने से भी राहगीरों और वाहन चालकों के लिए खतरा बढ़ जाता है। 23 जून को भोटा के समीप एक कार चालक लावारिस पशु को बचाने के प्रयास में दुर्घटना का शिकार हुआ था।
वहीं, 17 मार्च को कक्कड़ पंचायत में लावारिस पशु के हमले में पूर्व प्रधान गंभीर रूप से घायल हुए थे। मार्च में ही 64 वर्षीय बुजुर्ग महिला की भी लावारिस पशु के हमले में मौत हो गई थी।
नादौन में समस्या विकराल, जिलास्तर पर कोई योजना नहीं
नादौन क्षेत्र में समस्या इस कदर बढ़ गई है कि फोरलेन पर यातायात बंद करना पड़ा। हालांकि इसका एक कारण फोरलेन निर्माण की खामियां भी है। वहीं, पशुओं की समस्या से निपटने के लिए फोरलेन और अन्य मार्गों पर साइन बोर्ड, स्पीड ब्रेकर, पशुओं को रेडियम कॉलर बेल्ट लगाने का निर्णय लिया गया था। हालांकि जिलास्तर पर लावारिस पशुओं की पहचान के लिए रेडियम कॉलर बेल्ट लगाने की कोई सरकारी योजना व्यापक तौर पर शुरू नहीं हो सकी है। पशुपालन विभाग की ओर से अब तक इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हुई है।
सड़कों पर अब भी घूम रहे 1400 लावारिस पशु
पशुपालन विभाग के अनुसार जिले में 29 गोसदन हैं, जिनकी कुल क्षमता 2362 पशुओं की है। वर्तमान में इनमें 2488 लावारिस पशुओं को आश्रय दिया गया है। यानी गोसदनों में क्षमता से 126 अधिक पशु रखे गए हैं। इसके बावजूद करीब 1400 लावारिस पशु अब भी सड़कों पर घूम रहे हैं। पशुपालन विभाग ने खारल में नया गोसदन बनाने की योजना बनाई थी, लेकिन यह अब तक कागजों से आगे नहीं बढ़ सकी है।
सुजानपुर चौगान में लोगों से अधिक नजर आते हैं लावारिस पशु
सुजानपुर का चौगान मैदान लोगों के घूमने और सैर के लिए प्रमुख स्थान है, लेकिन यहां अक्सर लोगों से अधिक लावारिस पशु दिखाई देते हैं। कई बार ये पशु आक्रामक हो जाते हैं, जिससे वहां मौजूद लोगों को जान बचाने के लिए इधर-उधर भागना पड़ता है।
कोट्स
पशुओं का आतंक बढ़ता ही जा रहा है। क्षेत्र में पहले भी दो लोग पशुओं के हमले में अपनी जान गवां चुके हैं, जबकि पांच से अधिक लोग घायल हुए हैं। प्रशासन इन पशुओं से छुटकारा दिलाने के लिए कोई कवायद शुरू नहीं कर पाया है। -सुनील कुमार, निवासी कक्कड़
एनएच पर चलना मुश्किल हो जाता है। कई बार वाहन चालक पशुओं को बचाने में खुद घायल हो जाता है। इसके अलावा कई बार यह पशु वाहनों को भी नुकसान पहुंचाते हैं। इनकी शिकायत करें तो कहां करें। -दिनेश भाटिया, निवासी छतरोहल
लावारिस पशुओं के हमले की घटना आम नहीं है। रात को सड़कों पर बैठे पशु नजर नहीं आते हैं। कई बार ये पशु अचानक सामने आ जाते हैं। उस समय बचने का कोई उपाय नहीं दिखाई देता है। सड़कों पर यह मौत के दूत बनकर बैठे रहते हैं। -मनोज शर्मा, निवासी बड़ैहर
पशुपालन विभाग और प्रशासन इन पशुओं को गोसदन में भी नहीं भेजते हैं। सरकर को चाहिए कि वह जंगलों में जहां खाली स्थान है और लोगों की आवाजाही नहीं है, वहां पर इनके लिए खुला आश्रय तैयार करे और उसकी जिम्मेवारी पंचायतों को सौंपे। -सुनील कुमार, निवासी पपलाह
कोट्स :
जिले में 29 गोसदन हैं। यहां पर क्षमता से अधिक पशु रखे गए हैं। खारल में गो सदन की योजना बनाई थी, लेकिन इसकी अभी औपचारिकताएं पूरी नहीं हुई हैं। औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही कवायद शुरू हो सकेगी। -डॉ. सतीश कपूर, उपनिदेशक, पशुपालन विभाग हमीरपुर
लावारिस पशुओं से छुटकारा दिलाने के लिए पशुपालन के साथ बैठक की गई थी। पशुओं को बेहोश करने के लिए डॉट गन मंजूर हुई है। डॉट गन आते ही पशुओं को पकड़ने का काम शुरू किया जाएगा, ताकि हादसों पर अंकुश् लगाया जा सके। -निशांत शर्मा, एसडीएम नादौन
सुजानपुर में लावारिश पशुओं के हमले अधिक नहीं हैं। यहां पर एक साल पहले एक मामला सामने आया था। अब मेरा तबादला हो गया है। अब मेरे पास एसडीएम सुजानपुर का कार्यभार नहीं है। -विकास शुक्ला, पूर्व एसडीएम, सुजानपुर
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शहर की सड़कों से लेकर सुजानपुर के चौगान मैदान तक कई स्थानों पर लावारिस पशु पैदल राहगीरों और वाहन चालकों के लिए खतरा बने हुए हैं। हर साल औसतन आठ से 10 मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें लोग लावारिस पशुओं के हमलों में घायल होकर अस्पताल पहुंचते हैं।
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नादौन क्षेत्र में फोरलेन पर बड़ी संख्या में घूम रहे लावारिस पशुओं के कारण पिछले 15 दिनों में पांच वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो चुके हैं। पिछले तीन वर्षों में जिले में लावारिस पशुओं के हमलों से 30 से अधिक लोगों के घायल होने के मामले सामने आए हैं। हालांकि, कई घटनाएं ऐसी भी हैं जो पुलिस या प्रशासनिक रिकॉर्ड तक नहीं पहुंच पाईं।
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जिले में अधिकांश दुर्घटनाएं रात के समय होती हैं। पशुओं के आपस में भिड़ने से भी राहगीरों और वाहन चालकों के लिए खतरा बढ़ जाता है। 23 जून को भोटा के समीप एक कार चालक लावारिस पशु को बचाने के प्रयास में दुर्घटना का शिकार हुआ था।
वहीं, 17 मार्च को कक्कड़ पंचायत में लावारिस पशु के हमले में पूर्व प्रधान गंभीर रूप से घायल हुए थे। मार्च में ही 64 वर्षीय बुजुर्ग महिला की भी लावारिस पशु के हमले में मौत हो गई थी।
नादौन में समस्या विकराल, जिलास्तर पर कोई योजना नहीं
नादौन क्षेत्र में समस्या इस कदर बढ़ गई है कि फोरलेन पर यातायात बंद करना पड़ा। हालांकि इसका एक कारण फोरलेन निर्माण की खामियां भी है। वहीं, पशुओं की समस्या से निपटने के लिए फोरलेन और अन्य मार्गों पर साइन बोर्ड, स्पीड ब्रेकर, पशुओं को रेडियम कॉलर बेल्ट लगाने का निर्णय लिया गया था। हालांकि जिलास्तर पर लावारिस पशुओं की पहचान के लिए रेडियम कॉलर बेल्ट लगाने की कोई सरकारी योजना व्यापक तौर पर शुरू नहीं हो सकी है। पशुपालन विभाग की ओर से अब तक इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हुई है।
सड़कों पर अब भी घूम रहे 1400 लावारिस पशु
पशुपालन विभाग के अनुसार जिले में 29 गोसदन हैं, जिनकी कुल क्षमता 2362 पशुओं की है। वर्तमान में इनमें 2488 लावारिस पशुओं को आश्रय दिया गया है। यानी गोसदनों में क्षमता से 126 अधिक पशु रखे गए हैं। इसके बावजूद करीब 1400 लावारिस पशु अब भी सड़कों पर घूम रहे हैं। पशुपालन विभाग ने खारल में नया गोसदन बनाने की योजना बनाई थी, लेकिन यह अब तक कागजों से आगे नहीं बढ़ सकी है।
सुजानपुर चौगान में लोगों से अधिक नजर आते हैं लावारिस पशु
सुजानपुर का चौगान मैदान लोगों के घूमने और सैर के लिए प्रमुख स्थान है, लेकिन यहां अक्सर लोगों से अधिक लावारिस पशु दिखाई देते हैं। कई बार ये पशु आक्रामक हो जाते हैं, जिससे वहां मौजूद लोगों को जान बचाने के लिए इधर-उधर भागना पड़ता है।
कोट्स
पशुओं का आतंक बढ़ता ही जा रहा है। क्षेत्र में पहले भी दो लोग पशुओं के हमले में अपनी जान गवां चुके हैं, जबकि पांच से अधिक लोग घायल हुए हैं। प्रशासन इन पशुओं से छुटकारा दिलाने के लिए कोई कवायद शुरू नहीं कर पाया है। -सुनील कुमार, निवासी कक्कड़
एनएच पर चलना मुश्किल हो जाता है। कई बार वाहन चालक पशुओं को बचाने में खुद घायल हो जाता है। इसके अलावा कई बार यह पशु वाहनों को भी नुकसान पहुंचाते हैं। इनकी शिकायत करें तो कहां करें। -दिनेश भाटिया, निवासी छतरोहल
लावारिस पशुओं के हमले की घटना आम नहीं है। रात को सड़कों पर बैठे पशु नजर नहीं आते हैं। कई बार ये पशु अचानक सामने आ जाते हैं। उस समय बचने का कोई उपाय नहीं दिखाई देता है। सड़कों पर यह मौत के दूत बनकर बैठे रहते हैं। -मनोज शर्मा, निवासी बड़ैहर
पशुपालन विभाग और प्रशासन इन पशुओं को गोसदन में भी नहीं भेजते हैं। सरकर को चाहिए कि वह जंगलों में जहां खाली स्थान है और लोगों की आवाजाही नहीं है, वहां पर इनके लिए खुला आश्रय तैयार करे और उसकी जिम्मेवारी पंचायतों को सौंपे। -सुनील कुमार, निवासी पपलाह
कोट्स :
जिले में 29 गोसदन हैं। यहां पर क्षमता से अधिक पशु रखे गए हैं। खारल में गो सदन की योजना बनाई थी, लेकिन इसकी अभी औपचारिकताएं पूरी नहीं हुई हैं। औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही कवायद शुरू हो सकेगी। -डॉ. सतीश कपूर, उपनिदेशक, पशुपालन विभाग हमीरपुर
लावारिस पशुओं से छुटकारा दिलाने के लिए पशुपालन के साथ बैठक की गई थी। पशुओं को बेहोश करने के लिए डॉट गन मंजूर हुई है। डॉट गन आते ही पशुओं को पकड़ने का काम शुरू किया जाएगा, ताकि हादसों पर अंकुश् लगाया जा सके। -निशांत शर्मा, एसडीएम नादौन
सुजानपुर में लावारिश पशुओं के हमले अधिक नहीं हैं। यहां पर एक साल पहले एक मामला सामने आया था। अब मेरा तबादला हो गया है। अब मेरे पास एसडीएम सुजानपुर का कार्यभार नहीं है। -विकास शुक्ला, पूर्व एसडीएम, सुजानपुर

सुनील कुमार गांव कक्कड़- फोटो : Archive

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