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Hamirpur (Himachal) News: भोरंज कॉलेज में क्यूआर कोड को स्कैन कर लगेगी विद्यार्थियों की हाजिरी
Wed, 29 Jul 2026 01:01 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Wed, 29 Jul 2026 01:01 AM IST
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भोरंज (हमीरपुर)। राजकीय महाविद्यालय भोरंज प्रदेश का पहला सरकारी महाविद्यालय बनने जा रहा है, जहां विद्यार्थियों की उपस्थिति क्यूआर कोड आधारित ऑनलाइन प्रणाली से दर्ज की जाएगी।
इससे पहले प्रदेश के कुछ निजी विश्वविद्यालयों में केवल स्टाफ की ऑनलाइन उपस्थिति की व्यवस्था थी, लेकिन विद्यार्थियों की क्यूआर कोड आधारित हाजिरी का यह पहला प्रयास है। महाविद्यालय के शिक्षक डॉ. प्रिंस ठाकुर तथा बीसीए के विद्यार्थियों प्रणव और अक्षय ने एक मोबाइल एप विकसित की है।
यह एप केवल राजकीय महाविद्यालय भोरंज में ही कार्य करेगी और इसका उपयोग केवल अध्यापक करेंगे। इस प्रणाली से विद्यार्थियों की उपस्थिति के आधार पर फाइन की गणना और आंतरिक मूल्यांकन (इंटरनल असेसमेंट) के अंक भी स्वतः तैयार हो जाएंगे।
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इससे शिक्षकों को अलग से मैनुअल डेटा तैयार करने की जरूरत नहीं पड़ेगी और समय की बचत होगी। क्यूआर कोड आधारित उपस्थिति प्रणाली के प्रति जागरूकता के लिए महाविद्यालय में एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें प्रणाली का लाइव प्रदर्शन भी किया गया।
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. विजय ठाकुर ने इस पहल की सराहना करते हुए सभी शिक्षकों को कक्षाओं में इसी प्रणाली के माध्यम से विद्यार्थियों की उपस्थिति दर्ज करने के निर्देश दिए। कार्यशाला में मोहिंद्र गुलेरिया सहित महाविद्यालय के अन्य शिक्षक और कर्मचारी भी उपस्थित रहे।
इस तरह एप करेगी काम
प्रत्येक अध्यापक की प्रोफाइल एप में बनाई गई है। इसे उनके मोबाइल फोन में इंस्टॉल किया गया है। विद्यार्थियों को अपने मोबाइल में कोई एप इंस्टॉल करने की आवश्यकता नहीं होगी। अध्यापक कक्षा में पहुंचकर अपने मोबाइल से एक क्यूआर कोड प्रदर्शित करेंगे। विद्यार्थी उस क्यूआर कोड को अपने मोबाइल के कैमरे या गूगल लेंस से स्कैन करेंगे। इसके बाद खुलने वाली वेबसाइट पर वे अपना रोल नंबर दर्ज कर आई एम प्रेजेंट विकल्प पर क्लिक करेंगे। सुरक्षा के लिए क्यूआर कोड हर दस सेकेंड में बदल जाएगा। एक मोबाइल से एक दिन में केवल एक बार ही स्कैन किया जा सकेगा। यदि किसी तकनीकी कारण से क्यूआर कोड स्कैन नहीं हो पाता है, तो एप में मैनुअल मोड की भी सुविधा दी गई है, जिसके माध्यम से अध्यापक विद्यार्थियों की उपस्थिति दर्ज कर सकेंगे। शुरुआती कुछ महीनों तक पारंपरिक उपस्थिति रजिस्टर भी साथ-साथ चलता रहेगा, ताकि नई व्यवस्था का सुचारू परीक्षण किया जा सके। इस डिजिटल प्रणाली के माध्यम से उपस्थिति का डिजिटल रजिस्टर स्वतः तैयार होगा।
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इससे पहले प्रदेश के कुछ निजी विश्वविद्यालयों में केवल स्टाफ की ऑनलाइन उपस्थिति की व्यवस्था थी, लेकिन विद्यार्थियों की क्यूआर कोड आधारित हाजिरी का यह पहला प्रयास है। महाविद्यालय के शिक्षक डॉ. प्रिंस ठाकुर तथा बीसीए के विद्यार्थियों प्रणव और अक्षय ने एक मोबाइल एप विकसित की है।
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यह एप केवल राजकीय महाविद्यालय भोरंज में ही कार्य करेगी और इसका उपयोग केवल अध्यापक करेंगे। इस प्रणाली से विद्यार्थियों की उपस्थिति के आधार पर फाइन की गणना और आंतरिक मूल्यांकन (इंटरनल असेसमेंट) के अंक भी स्वतः तैयार हो जाएंगे।
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इससे शिक्षकों को अलग से मैनुअल डेटा तैयार करने की जरूरत नहीं पड़ेगी और समय की बचत होगी। क्यूआर कोड आधारित उपस्थिति प्रणाली के प्रति जागरूकता के लिए महाविद्यालय में एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें प्रणाली का लाइव प्रदर्शन भी किया गया।
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. विजय ठाकुर ने इस पहल की सराहना करते हुए सभी शिक्षकों को कक्षाओं में इसी प्रणाली के माध्यम से विद्यार्थियों की उपस्थिति दर्ज करने के निर्देश दिए। कार्यशाला में मोहिंद्र गुलेरिया सहित महाविद्यालय के अन्य शिक्षक और कर्मचारी भी उपस्थित रहे।
इस तरह एप करेगी काम
प्रत्येक अध्यापक की प्रोफाइल एप में बनाई गई है। इसे उनके मोबाइल फोन में इंस्टॉल किया गया है। विद्यार्थियों को अपने मोबाइल में कोई एप इंस्टॉल करने की आवश्यकता नहीं होगी। अध्यापक कक्षा में पहुंचकर अपने मोबाइल से एक क्यूआर कोड प्रदर्शित करेंगे। विद्यार्थी उस क्यूआर कोड को अपने मोबाइल के कैमरे या गूगल लेंस से स्कैन करेंगे। इसके बाद खुलने वाली वेबसाइट पर वे अपना रोल नंबर दर्ज कर आई एम प्रेजेंट विकल्प पर क्लिक करेंगे। सुरक्षा के लिए क्यूआर कोड हर दस सेकेंड में बदल जाएगा। एक मोबाइल से एक दिन में केवल एक बार ही स्कैन किया जा सकेगा। यदि किसी तकनीकी कारण से क्यूआर कोड स्कैन नहीं हो पाता है, तो एप में मैनुअल मोड की भी सुविधा दी गई है, जिसके माध्यम से अध्यापक विद्यार्थियों की उपस्थिति दर्ज कर सकेंगे। शुरुआती कुछ महीनों तक पारंपरिक उपस्थिति रजिस्टर भी साथ-साथ चलता रहेगा, ताकि नई व्यवस्था का सुचारू परीक्षण किया जा सके। इस डिजिटल प्रणाली के माध्यम से उपस्थिति का डिजिटल रजिस्टर स्वतः तैयार होगा।