{"_id":"6a3ae2e523847f4fdd0a645f","slug":"the-court-upheld-the-police-closure-report-in-the-scst-act-case-hamirpur-hp-news-c-94-1-hmp1004-198195-2026-06-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Hamirpur (Himachal) News: अदालत ने एससी-एसटी एक्ट में पुलिस क्लोजर रिपोर्ट को सही ठहराया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Hamirpur (Himachal) News: अदालत ने एससी-एसटी एक्ट में पुलिस क्लोजर रिपोर्ट को सही ठहराया
Wed, 24 Jun 2026 01:17 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Wed, 24 Jun 2026 01:17 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हमीरपुर। विशेष अदालत हमीरपुर ने नादौन पुलिस स्टेशन में वर्ष 2023 में दर्ज एक मामले की पुलिस क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया है। विशेष न्यायाधीश पंकज शर्मा की अदालत ने मामले की समीक्षा करने के बाद शिकायतकर्ता की आपत्तियों को खारिज कर दिया और एफआईआर को आधिकारिक रूप से रद्द करने का आदेश दिया।
मामले में 22 जनवरी, 2023 को नादौन पुलिस स्टेशन में शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि 30 नवंबर 2022 को जब वह और उनकी पत्नी अपनी जमीन पर घास काट रहे थे, तब आरोपी ने उनकी जमीन पर जबरन सड़क निर्माण शुरू कर दिया।
शिकायत के अनुसार, जब उन्होंने इसकी फोटो खींचने की कोशिश की, तो आरोपी ने उनके साथ मारपीट और गाली-गलौज किया तथा जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल कर अपमानित किया। मामले की हमीरपुर के पुलिस उप अधीक्षक रोहिन डोगरा द्वारा गहन जांच की गई।
विज्ञापन
जांच के दौरान पुलिस ने पाया कि मौके पर मौजूद किसी भी स्वतंत्र गवाह ने इस बात की पुष्टि नहीं की कि सार्वजनिक रूप से कोई जातिसूचक टिप्पणी या गाली-गलौज की गई थी। साक्ष्यों और गवाहों के अभाव में पुलिस ने निष्कर्ष निकाला कि आरोपियों के खिलाफ एससी-एसटी अधिनियम के तहत कोई प्रथम दृष्टया मामला नहीं बनता है और अदालत में केस बंद करने की सिफारिश की।
शिकायतकर्ता ने पुलिस की इस रिपोर्ट को चुनौती देते हुए अदालत में विरोध याचिका दायर की थी और पक्षपातपूर्ण जांच का आरोप लगाया था। लेकिन अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पुलिस की रिपोर्ट को सही ठहराया। अदालत ने पुलिस द्वारा प्रस्तुत अंतिम क्लोजर रिपोर्ट को पूरी तरह स्वीकार कर लिया है।
विज्ञापन
मामले में 22 जनवरी, 2023 को नादौन पुलिस स्टेशन में शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि 30 नवंबर 2022 को जब वह और उनकी पत्नी अपनी जमीन पर घास काट रहे थे, तब आरोपी ने उनकी जमीन पर जबरन सड़क निर्माण शुरू कर दिया।
विज्ञापन
शिकायत के अनुसार, जब उन्होंने इसकी फोटो खींचने की कोशिश की, तो आरोपी ने उनके साथ मारपीट और गाली-गलौज किया तथा जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल कर अपमानित किया। मामले की हमीरपुर के पुलिस उप अधीक्षक रोहिन डोगरा द्वारा गहन जांच की गई।
विज्ञापन
जांच के दौरान पुलिस ने पाया कि मौके पर मौजूद किसी भी स्वतंत्र गवाह ने इस बात की पुष्टि नहीं की कि सार्वजनिक रूप से कोई जातिसूचक टिप्पणी या गाली-गलौज की गई थी। साक्ष्यों और गवाहों के अभाव में पुलिस ने निष्कर्ष निकाला कि आरोपियों के खिलाफ एससी-एसटी अधिनियम के तहत कोई प्रथम दृष्टया मामला नहीं बनता है और अदालत में केस बंद करने की सिफारिश की।
शिकायतकर्ता ने पुलिस की इस रिपोर्ट को चुनौती देते हुए अदालत में विरोध याचिका दायर की थी और पक्षपातपूर्ण जांच का आरोप लगाया था। लेकिन अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पुलिस की रिपोर्ट को सही ठहराया। अदालत ने पुलिस द्वारा प्रस्तुत अंतिम क्लोजर रिपोर्ट को पूरी तरह स्वीकार कर लिया है।