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Hamirpur (Himachal) News: आग की चपेट में आए पेड़ों का कटान शुरू, खाली होने लगे जंगल
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Wed, 11 Mar 2026 01:07 AM IST
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दिले राम
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बिझड़ी (हमीरपुर)। ढटवाल के जंगल में गर्मी के मौसम में आग की भेंट चढ़े चीड़ के पेड़ों का कटान शुरू होने से जंगल खाली होना शुरू हो गए हैं। कटान शुरू होने से जंगलों पर पड़ रहे प्रभाव को लेकर लोगों ने जंगलों में चीड़ के स्थान पर चौड़े पत्ते वाले पौधे व फलदार पौधे लगाने की मांग की है, ताकि जंगली जानवरों को भोजन की व्यवस्था हो सके।
स्थानीय लोगों ने इन जंगलों को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने की भी मांग की है, ताकि लोग जंगलों में अपना समय व्यतीत कर सकें और पिकनिक आदि मना सकें। लोगों का कहना है कि चीड़ के पेड़ हर वर्ष आग में जल जाते हैं। गत वर्ष भी करीब पांच हजार से अधिक चीड़ के पेड़ आग की भेंट चढ़ गए हैं, जिन्हें काटने का कार्य किया जा रहा है। इससे अधिकांश जंगल खाली हो गए हैं।
लोगों का कहना है कि अगर सरकार व वन विभाग जंगलों को बचाने का काम करता है तो जंगली जानवर भी रिहायशी क्षेत्रों का रुख नहीं करेंगे। स्थानीय लोगों ने बताया कि जंगली जानवर भोजन की तलाश में ग्रामीण क्षेत्रों में प्रवेश कर रहे हैं, जिससे लोगों का जीवन भी खतरे में पड़ गया है और जंगली जानवर लोगों की फसलों को बर्बाद कर रहे हैं। अगर जंगलों में ही इन जीवों के लिए भोजन की व्यवस्था होगी तो यह ग्रामीण क्षेत्रों की ओर नहीं भागेंगे।
जंगलों से हर वर्ष हजारों पेड़ काटे जा रहे हैं। विभाग को चाहिए कि इन जंगलों में चीड़ के स्थान पर फलदार और चौड़े पत्ते वाले पौधे लगाए जाएं, ताकि आने वाले समय में जंगली जानवरों के लिए भोजन की व्यवस्था हो सके। -दिले राम, निवासी बुधान
जंगलों का कटान होने के कारण जंगली जानवर ग्रामीण क्षेत्रों का रुख कर रहे हैं। इससे लोगों का जीवन भी खतरे में पड़ गया है। जंगली जानवर लोगों की फसल को बर्बाद कर रहे हैं। ऐसे में जंगल में फलदार पौधे लगाने चाहिएं। -दुनी चंद, निवासी बुधान
कोट :
वनों में चीड़ के स्थान पर चौड़े पत्ते वाले पौधे ही लगाए जा रहे हैं। इसके अलावा जंगलों में फलदार व औषधीय पौधे भी लगाए जा रहे हैं। लोगों से आह्वान है कि वह जंगलों में आग न लगाएं। इससे वन्य जीवन पर भी प्रभाव पड़ रहा है। -अंकित कुमार, डीएफओ हमीरपुर
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स्थानीय लोगों ने इन जंगलों को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने की भी मांग की है, ताकि लोग जंगलों में अपना समय व्यतीत कर सकें और पिकनिक आदि मना सकें। लोगों का कहना है कि चीड़ के पेड़ हर वर्ष आग में जल जाते हैं। गत वर्ष भी करीब पांच हजार से अधिक चीड़ के पेड़ आग की भेंट चढ़ गए हैं, जिन्हें काटने का कार्य किया जा रहा है। इससे अधिकांश जंगल खाली हो गए हैं।
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लोगों का कहना है कि अगर सरकार व वन विभाग जंगलों को बचाने का काम करता है तो जंगली जानवर भी रिहायशी क्षेत्रों का रुख नहीं करेंगे। स्थानीय लोगों ने बताया कि जंगली जानवर भोजन की तलाश में ग्रामीण क्षेत्रों में प्रवेश कर रहे हैं, जिससे लोगों का जीवन भी खतरे में पड़ गया है और जंगली जानवर लोगों की फसलों को बर्बाद कर रहे हैं। अगर जंगलों में ही इन जीवों के लिए भोजन की व्यवस्था होगी तो यह ग्रामीण क्षेत्रों की ओर नहीं भागेंगे।
जंगलों से हर वर्ष हजारों पेड़ काटे जा रहे हैं। विभाग को चाहिए कि इन जंगलों में चीड़ के स्थान पर फलदार और चौड़े पत्ते वाले पौधे लगाए जाएं, ताकि आने वाले समय में जंगली जानवरों के लिए भोजन की व्यवस्था हो सके। -दिले राम, निवासी बुधान
जंगलों का कटान होने के कारण जंगली जानवर ग्रामीण क्षेत्रों का रुख कर रहे हैं। इससे लोगों का जीवन भी खतरे में पड़ गया है। जंगली जानवर लोगों की फसल को बर्बाद कर रहे हैं। ऐसे में जंगल में फलदार पौधे लगाने चाहिएं। -दुनी चंद, निवासी बुधान
कोट :
वनों में चीड़ के स्थान पर चौड़े पत्ते वाले पौधे ही लगाए जा रहे हैं। इसके अलावा जंगलों में फलदार व औषधीय पौधे भी लगाए जा रहे हैं। लोगों से आह्वान है कि वह जंगलों में आग न लगाएं। इससे वन्य जीवन पर भी प्रभाव पड़ रहा है। -अंकित कुमार, डीएफओ हमीरपुर

दिले राम

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