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Hamirpur (Himachal) News: पूर्व महंतों की याद ताजा करती हैं समाधियां
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Wed, 18 Mar 2026 01:09 AM IST
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बाबा बालक नाथ मंदिर दियोटसिद्ध में स्थापित पूर्व महंतों की समाधियां। संवाद
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सुशील शर्मा
दियोटसिद्ध (हमीरपुर)। बाबा बालक नाथ मंदिर दियोटसिद्ध में जहां आज बालयोगी के दर्शन के लिए भीड़ उमड़ती है, वहीं मंदिर के महंत के दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ भी कम नहीं है।
लाेग जहां वर्तमान गद्दीनशीन महंत के दर्शन के लिए लोग आते हैं, वहीं लोग मठ गांव में बनी समाधियों पर माथा टेकने के लिए पहुंचते हैं। बाबा बालक नाथ मंदिर दियोटसिद्ध में महंत बनने की कहानी भी कम रोचक नहीं है, लेकिन वर्तमान में महंत की परंपरा इतिहास के पन्नों में दर्ज नहीं है। मगर कई हजार वर्षों से महंत गद्दी संभालते आ रहे हैं।
दियोटसिद्ध में अभी केवल 14 महंतों का ही रिकॉर्ड उपलब्ध है। किंवदंतियों के अनुसार चकमोह के प्रथम पुजारी बनारसी दास थे। उनके वशंजों ने इस परंपरा काे निभाना शुरू किया तो आने वाले समय में सूतक और पातक जैसी परंपराओं में मंदिर में पूजा करना मुश्किल हो गया। इसके बाद यहां पर मंदिर में पूजा करने के लिए महंत को रखा गया।
धीरे-धीरे यह परंपरा बन गई। मान्यताओं के अनुसार इनसे पहले भी हजारों महंत इस परंपरा को आगे बढ़ाते रहे, जिनकी अनंत समाधियां मठ नामक स्थान पर स्थित हैं। इन समाधियों से इस परंपरा की गहराई और विस्तार का अनुमान लगाया जा सकता है।
ब्राह्मण परिवार से ही बनते हैं महंत
मान्यता है कि गद्दी पर नया महंत परिवारवाद से अलग नियुक्त किया जाता है। इसमें वर्तमान महंत को दृष्टांत होता है कि आने वाला महंत किस गांव और किस परिवार में पैदा हुआ है। इसके बाद वर्तमान महंत दृष्टांत के अनुसार उस गांव में जाते हैं और कुंडली मिलान करते हैं। सबसे बड़ी बात है कि उत्तराधिकारी का जन्म ब्राह्मण परिवार में ही होता है। इसका उदाहरण यह है कि आज तक जितने भी उत्तराधिकारी हुए हैं, सभी ब्राह्मण कुल से हैं।
वर्तमान में महंत राजेंद्र गिरि हैं गद्दीनशीन
उपलब्ध लिखित अभिलेखों के अनुसार इस गद्दी पर विराजमान महंतों में महंत दलजीत गिरि, महंत रामचंद्र गिरि, महंत दलीप गिरि, महंत यकम गिरि, महंत दलपत गिरि, महंत दौलत गिरि, महंत शिवचरण गिरि, महंत बलराम गिरि, महंत सिद्ध गिरी, महंत कृपाल गिरि, महंत रंजीत गिरि, महंत शक्ति गिरि, महंत शिव गिरि के नाम दर्ज हैं।
वर्तमान में महंत राजेंद्र गिरि गद्दीनशीन हैं। सबसे बड़ी बात है कि वर्तमान महंत राजेंद्र गिरि ने धार्मिक शिक्षा दियोटसिद्ध से ग्रहण की है, जबकि वह सबसे अधिक शिक्षा ग्रहण करने वाले महंत भी हैं। राजेंद्र गिरि ने शैक्षणिक योग्यता में कला स्नातक कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रहण की है। इसके अलावा उन्होंने पत्रकारिता में डिप्लोमा, पीजीडीसीए, बीएड धारक हैं। राजेंद्र गिरी एलएलबी की शिक्षा ग्रहण कर रहे थे, लेकिन शिवगिरि महाराज के ब्रह्लीन होने के कारण अधर में छोड़नी पड़ी।
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दियोटसिद्ध (हमीरपुर)। बाबा बालक नाथ मंदिर दियोटसिद्ध में जहां आज बालयोगी के दर्शन के लिए भीड़ उमड़ती है, वहीं मंदिर के महंत के दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ भी कम नहीं है।
लाेग जहां वर्तमान गद्दीनशीन महंत के दर्शन के लिए लोग आते हैं, वहीं लोग मठ गांव में बनी समाधियों पर माथा टेकने के लिए पहुंचते हैं। बाबा बालक नाथ मंदिर दियोटसिद्ध में महंत बनने की कहानी भी कम रोचक नहीं है, लेकिन वर्तमान में महंत की परंपरा इतिहास के पन्नों में दर्ज नहीं है। मगर कई हजार वर्षों से महंत गद्दी संभालते आ रहे हैं।
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दियोटसिद्ध में अभी केवल 14 महंतों का ही रिकॉर्ड उपलब्ध है। किंवदंतियों के अनुसार चकमोह के प्रथम पुजारी बनारसी दास थे। उनके वशंजों ने इस परंपरा काे निभाना शुरू किया तो आने वाले समय में सूतक और पातक जैसी परंपराओं में मंदिर में पूजा करना मुश्किल हो गया। इसके बाद यहां पर मंदिर में पूजा करने के लिए महंत को रखा गया।
धीरे-धीरे यह परंपरा बन गई। मान्यताओं के अनुसार इनसे पहले भी हजारों महंत इस परंपरा को आगे बढ़ाते रहे, जिनकी अनंत समाधियां मठ नामक स्थान पर स्थित हैं। इन समाधियों से इस परंपरा की गहराई और विस्तार का अनुमान लगाया जा सकता है।
ब्राह्मण परिवार से ही बनते हैं महंत
मान्यता है कि गद्दी पर नया महंत परिवारवाद से अलग नियुक्त किया जाता है। इसमें वर्तमान महंत को दृष्टांत होता है कि आने वाला महंत किस गांव और किस परिवार में पैदा हुआ है। इसके बाद वर्तमान महंत दृष्टांत के अनुसार उस गांव में जाते हैं और कुंडली मिलान करते हैं। सबसे बड़ी बात है कि उत्तराधिकारी का जन्म ब्राह्मण परिवार में ही होता है। इसका उदाहरण यह है कि आज तक जितने भी उत्तराधिकारी हुए हैं, सभी ब्राह्मण कुल से हैं।
वर्तमान में महंत राजेंद्र गिरि हैं गद्दीनशीन
उपलब्ध लिखित अभिलेखों के अनुसार इस गद्दी पर विराजमान महंतों में महंत दलजीत गिरि, महंत रामचंद्र गिरि, महंत दलीप गिरि, महंत यकम गिरि, महंत दलपत गिरि, महंत दौलत गिरि, महंत शिवचरण गिरि, महंत बलराम गिरि, महंत सिद्ध गिरी, महंत कृपाल गिरि, महंत रंजीत गिरि, महंत शक्ति गिरि, महंत शिव गिरि के नाम दर्ज हैं।
वर्तमान में महंत राजेंद्र गिरि गद्दीनशीन हैं। सबसे बड़ी बात है कि वर्तमान महंत राजेंद्र गिरि ने धार्मिक शिक्षा दियोटसिद्ध से ग्रहण की है, जबकि वह सबसे अधिक शिक्षा ग्रहण करने वाले महंत भी हैं। राजेंद्र गिरि ने शैक्षणिक योग्यता में कला स्नातक कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रहण की है। इसके अलावा उन्होंने पत्रकारिता में डिप्लोमा, पीजीडीसीए, बीएड धारक हैं। राजेंद्र गिरी एलएलबी की शिक्षा ग्रहण कर रहे थे, लेकिन शिवगिरि महाराज के ब्रह्लीन होने के कारण अधर में छोड़नी पड़ी।