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Hamirpur (Himachal) News: पठानकोट-जोगिंद्रनगर ट्रैक पर चक्की पुल के ट्रायल के बाद भी नहीं दौड़ी रेलगाड़ियां
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Thu, 29 Jan 2026 08:02 AM IST
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जवाली (कांगड़ा)। पठानकोट-जोगिंद्रनगर रेलमार्ग पर गाड़ियों की बहाली को लेकर कांगड़ा की आधा दर्जन पंचायतों की जनता को एक बार फिर मायूसी हाथ लगी है। रेल बोर्ड द्वारा चक्की पुल के सफल ट्रायल के बाद 26 जनवरी से ट्रेनें चलाने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन तय तिथि बीत जाने के बाद भी रेलगाड़ियों के पहिए थमे हुए हैं।
करीब तीन साल से बंद पड़ी इस रेल सेवा को लेकर स्थानीय लोगों और पंचायत प्रतिनिधियों का धैर्य अब जवाब दे रहा है। पंचायत प्रतिनिधियों में ढन की प्रधान बीना देवी, नरगाला के प्रधान शिव धीमान और पलौहड़ा के प्रधान रघुवीर सिंह भाटिया सहित अन्य ने संयुक्त बयान में कहा कि रेलवे बोर्ड केवल तारीख पर तारीख दे रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के समय इस मार्ग को ब्रॉडगेज (बड़ी लाइन) बनाने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि मौजूदा नैरोगेज लाइन भी सुचारू नहीं हो पा रहा है। प्रतिनिधियों के अनुसार रेलमार्ग केवल चुनावी मुद्दा बनकर रह गया है। उनका कहना है कि रेलगाड़ियां बंद होने से गरीब तबका सबसे ज्यादा प्रभावित है।
उन्होंने आशंका जताई कि बोर्ड जानबूझकर मामले को टाल रहा है ताकि बरसात शुरू हो जाए और मौसम का बहाना बनाकर बहाली को और आगे खिसकाया जा सके। पंचायत प्रतिनिधियों ने केंद्र सरकार और रेल मंत्रालय से मांग की है कि इस ऐतिहासिक रेलमार्ग पर ट्रेनों की आवाजाही तुरंत बहाल की जाए ताकि जनता को राहत मिल सके।
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करीब तीन साल से बंद पड़ी इस रेल सेवा को लेकर स्थानीय लोगों और पंचायत प्रतिनिधियों का धैर्य अब जवाब दे रहा है। पंचायत प्रतिनिधियों में ढन की प्रधान बीना देवी, नरगाला के प्रधान शिव धीमान और पलौहड़ा के प्रधान रघुवीर सिंह भाटिया सहित अन्य ने संयुक्त बयान में कहा कि रेलवे बोर्ड केवल तारीख पर तारीख दे रहा है।
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उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के समय इस मार्ग को ब्रॉडगेज (बड़ी लाइन) बनाने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि मौजूदा नैरोगेज लाइन भी सुचारू नहीं हो पा रहा है। प्रतिनिधियों के अनुसार रेलमार्ग केवल चुनावी मुद्दा बनकर रह गया है। उनका कहना है कि रेलगाड़ियां बंद होने से गरीब तबका सबसे ज्यादा प्रभावित है।
उन्होंने आशंका जताई कि बोर्ड जानबूझकर मामले को टाल रहा है ताकि बरसात शुरू हो जाए और मौसम का बहाना बनाकर बहाली को और आगे खिसकाया जा सके। पंचायत प्रतिनिधियों ने केंद्र सरकार और रेल मंत्रालय से मांग की है कि इस ऐतिहासिक रेलमार्ग पर ट्रेनों की आवाजाही तुरंत बहाल की जाए ताकि जनता को राहत मिल सके।
