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Hamirpur (Himachal) News: तीन दिन से एक्सरे मशीन खराब, मरीज परेशान
Sun, 02 Aug 2026 12:46 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Sun, 02 Aug 2026 12:46 AM IST
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गलोड़ (हमीरपुर)। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गलोड़ में पिछले तीन दिनों से एक्सरे मशीन खराब होने के कारण मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मरीजों को एक्सरे करवाने के लिए बड़सर, नादौन और हमीरपुर जाना पड़ रहा है।
अस्पताल में पहले भी एक एनजीओ के माध्यम से करीब 35 हजार रुपये खर्च कर मशीन को दो बार ठीक करवाया गया था। अब इस मशीन को बियांड रिपेयर घोषित कर दिया गया है। पिछले माह में अस्पताल में 943 मरीजों के एक्सरे किए गए थे।
वहीं, सीएचसी गलोड़ में रोजाना करीब 250 ओपीडी और 50 एक्सरे होते हैं। मशीन खराब होने से लोगों को समय और पैसे दोनों की बर्बादी झेलनी पड़ रही है। मरीजों का कहना है कि अस्पताल में एक्सरे सुविधा निशुल्क मिलती है, जबकि निजी क्लीनिकों में इसके लिए करीब 300 रुपये खर्च करने पड़ते हैं।
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इससे गरीब वर्ग के लोगों को अधिक परेशानी हो रही है। इसके अलावा गर्भवती महिलाओं को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
डॉ. मोहित डोगरा ने बताया कि बड़सर से इंजीनियर को मशीन की मरम्मत के लिए बुलाया गया था। उन्होंने कहा कि मशीन को ठीक करने पर करीब तीन लाख रुपये खर्च आएगा और तीन अगस्त तक इसकी मरम्मत को लेकर स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।
वहीं, बीएमओ अरविंद कौंडल ने बताया कि पुरानी मशीन पर अधिक खर्च हो रहा है। इसे ठीक करवाने के बजाय नई मशीन स्थापित करना बेहतर विकल्प होगा। नई मशीन लगवाने के लिए उच्चाधिकारियों से पत्राचार किया जाएगा।
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अस्पताल में पहले भी एक एनजीओ के माध्यम से करीब 35 हजार रुपये खर्च कर मशीन को दो बार ठीक करवाया गया था। अब इस मशीन को बियांड रिपेयर घोषित कर दिया गया है। पिछले माह में अस्पताल में 943 मरीजों के एक्सरे किए गए थे।
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वहीं, सीएचसी गलोड़ में रोजाना करीब 250 ओपीडी और 50 एक्सरे होते हैं। मशीन खराब होने से लोगों को समय और पैसे दोनों की बर्बादी झेलनी पड़ रही है। मरीजों का कहना है कि अस्पताल में एक्सरे सुविधा निशुल्क मिलती है, जबकि निजी क्लीनिकों में इसके लिए करीब 300 रुपये खर्च करने पड़ते हैं।
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इससे गरीब वर्ग के लोगों को अधिक परेशानी हो रही है। इसके अलावा गर्भवती महिलाओं को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
डॉ. मोहित डोगरा ने बताया कि बड़सर से इंजीनियर को मशीन की मरम्मत के लिए बुलाया गया था। उन्होंने कहा कि मशीन को ठीक करने पर करीब तीन लाख रुपये खर्च आएगा और तीन अगस्त तक इसकी मरम्मत को लेकर स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।
वहीं, बीएमओ अरविंद कौंडल ने बताया कि पुरानी मशीन पर अधिक खर्च हो रहा है। इसे ठीक करवाने के बजाय नई मशीन स्थापित करना बेहतर विकल्प होगा। नई मशीन लगवाने के लिए उच्चाधिकारियों से पत्राचार किया जाएगा।