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Hamirpur (Himachal) News: शब्द लिखने, बोलने और अंक पहचान का ज्ञान लेंगे नौनिहाल
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Thu, 29 Jan 2026 01:15 AM IST
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हमीरपुर। जिले के 406 प्राथमिक स्कूलों में तीन से पांच वर्ष के नौनिहाल गतिविधियों के माध्यम से ज्ञान हासिल करेंगे। विद्यार्थियों को पहली कक्षा में दाखिले से पूर्व निपुण बनाने के लिए बाल वाटिका प्लानर का सहारा लिया जाएगा।
इससे विद्यार्थी तीन चरणों में आयोजित गतिविधियों से पढ़ाई कर सकेंगे। समग्र शिक्षा के तहत तीन से पांच वर्ष आयु वर्ग के विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए बाल वाटिका प्लानर का प्रयोग किया जाएगा। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में शब्द लिखने, बोलने, सुनने, समझने और अंकों की पहचान जैसी बुनियादी क्षमताओं का विकास करना है, ताकि वह आगामी कक्षाओं के लिए मानसिक, शैक्षणिक और सामाजिक रूप से पूरी तरह तैयार हो सकें।
प्रारंभिक शिक्षा जितनी मजबूत होगी, उनकी आगे की पढ़ाई उतनी ही आसान और प्रभावी होगी। इसी सोच के तहत बाल वाटिका प्लानर को लागू किया जा रहा है। प्लान विद्यार्थियों की उम्र, उनकी मानसिक क्षमता और रुचि के अनुसार तैयार किया गया है, जिससे पढ़ाई बोझ नहीं, बल्कि खेल और गतिविधियों के माध्यम से सीखने का आनंद बन सके।
बाल वाटिका के माध्यम से बच्चों को अक्षर ज्ञान, शब्द निर्माण, बोलने का अभ्यास, कहानियों के माध्यम से भाषा विकास, रंगों और आकृतियों की पहचान, साथ ही अंकों की प्रारंभिक समझ दी जाएगी।
कार्यक्रम को तीन चरणों में संचालित किया जाएगा। प्रत्येक स्कूल में बाल वाटिका के लिए अलग से स्थान, समयसारिणी और शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। शिक्षकों को पहले ही इस योजना के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि वे बच्चों की मनोवैज्ञानिक जरूरतों को समझते हुए पढ़ा सकें।
यह हैं तीन चरण
पहला चरण विद्यार्थियों को स्कूल के वातावरण से परिचित कराने पर केंद्रित होगा। इसमें सहपाठी, कक्षा और विद्यालय के परिवेश से जोड़ने के लिए गीत, खेल, चित्र और संवाद आधारित गतिविधियां होंगी।
दूसरे चरण में भाषा और संख्यात्मक ज्ञान होगा। इसमें विद्यार्थियों को बोलने, सुनने और समझने की क्षमता, कहानियां, कविताएं, अंकों की पहचान को सरल उदाहरणों के माध्यम से समझाया जाएगा।
तीसरे चरण में बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए खेलकूद, पहेलियां और रचनात्मक गतिविधियां, समूह कार्य और भावनात्मक विकास के लिए अभ्यास शामिल होंगे।
कोट
406 प्राथमिक स्कूलों में समग्र शिक्षा के तहत बाल वाटिका कार्यक्रम से प्री-प्राइमरी कक्षाओं के विद्यार्थियों को पढ़ाई करवाई जाएगी। स्कूल प्रमुखों को इस संबंध में दिशा निर्देश जारी कर दिए गए हैं। -नवीन कुमार, डीपीओ एवं उपनिदेशक गुणवत्ता नियंत्रक
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इससे विद्यार्थी तीन चरणों में आयोजित गतिविधियों से पढ़ाई कर सकेंगे। समग्र शिक्षा के तहत तीन से पांच वर्ष आयु वर्ग के विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए बाल वाटिका प्लानर का प्रयोग किया जाएगा। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में शब्द लिखने, बोलने, सुनने, समझने और अंकों की पहचान जैसी बुनियादी क्षमताओं का विकास करना है, ताकि वह आगामी कक्षाओं के लिए मानसिक, शैक्षणिक और सामाजिक रूप से पूरी तरह तैयार हो सकें।
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प्रारंभिक शिक्षा जितनी मजबूत होगी, उनकी आगे की पढ़ाई उतनी ही आसान और प्रभावी होगी। इसी सोच के तहत बाल वाटिका प्लानर को लागू किया जा रहा है। प्लान विद्यार्थियों की उम्र, उनकी मानसिक क्षमता और रुचि के अनुसार तैयार किया गया है, जिससे पढ़ाई बोझ नहीं, बल्कि खेल और गतिविधियों के माध्यम से सीखने का आनंद बन सके।
बाल वाटिका के माध्यम से बच्चों को अक्षर ज्ञान, शब्द निर्माण, बोलने का अभ्यास, कहानियों के माध्यम से भाषा विकास, रंगों और आकृतियों की पहचान, साथ ही अंकों की प्रारंभिक समझ दी जाएगी।
कार्यक्रम को तीन चरणों में संचालित किया जाएगा। प्रत्येक स्कूल में बाल वाटिका के लिए अलग से स्थान, समयसारिणी और शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। शिक्षकों को पहले ही इस योजना के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि वे बच्चों की मनोवैज्ञानिक जरूरतों को समझते हुए पढ़ा सकें।
यह हैं तीन चरण
पहला चरण विद्यार्थियों को स्कूल के वातावरण से परिचित कराने पर केंद्रित होगा। इसमें सहपाठी, कक्षा और विद्यालय के परिवेश से जोड़ने के लिए गीत, खेल, चित्र और संवाद आधारित गतिविधियां होंगी।
दूसरे चरण में भाषा और संख्यात्मक ज्ञान होगा। इसमें विद्यार्थियों को बोलने, सुनने और समझने की क्षमता, कहानियां, कविताएं, अंकों की पहचान को सरल उदाहरणों के माध्यम से समझाया जाएगा।
तीसरे चरण में बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए खेलकूद, पहेलियां और रचनात्मक गतिविधियां, समूह कार्य और भावनात्मक विकास के लिए अभ्यास शामिल होंगे।
कोट
406 प्राथमिक स्कूलों में समग्र शिक्षा के तहत बाल वाटिका कार्यक्रम से प्री-प्राइमरी कक्षाओं के विद्यार्थियों को पढ़ाई करवाई जाएगी। स्कूल प्रमुखों को इस संबंध में दिशा निर्देश जारी कर दिए गए हैं। -नवीन कुमार, डीपीओ एवं उपनिदेशक गुणवत्ता नियंत्रक
