सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Himachal: 3,500 Year Old Inscriptions Preserved at the State Museum in Shimla Recount the Story of the Past.

हिमाचल: राज्य संग्रहालय में सहेजे हैं 3500 साल पुराने शिलालेख,हिमालय की महत्वपूर्ण पुरातात्विक खोजों में शामिल

भारती शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Mon, 18 May 2026 12:21 PM IST
विज्ञापन
सार

राज्य संग्रहालय शिमला में आज भी ऐसे पत्थर संरक्षित हैं, जिनमें 3500 साल पहले दुर्लभ चित्र उकेरे गए हैं। इन्हें पेट्रोग्लिफ्स भी कहा जाता है। 

Himachal: 3,500 Year Old Inscriptions Preserved at the State Museum in Shimla Recount the Story of the Past.
राज्य संग्रहालय में संरक्षित शिलालेख पर जानकारी देते संग्रहालय के अध्यक्ष डॉ. हरी चौहान। - फोटो : संवाद
विज्ञापन

विस्तार

हिमाचल प्रदेश राज्य संग्रहालय शिमला में आज भी ऐसे पत्थर संरक्षित हैं, जिनमें 3500 साल पहले दुर्लभ चित्र उकेरे गए हैं। इन्हें पेट्रोग्लिफ्स भी कहा जाता है। ये प्राचीन शिलालेख स्पीति घाटी से प्राप्त हुए हैं और इन्हें हिमालयी क्षेत्र की सबसे महत्वपूर्ण पुरातात्विक खोजों में माना जाता है। पत्थरों पर उकेरे गए प्रतीकों में नीली भेड़, घोड़ा, सूर्य, चंद्रमा, याक, बारहसिंगा, हिरण, बाघ आदि शामिल हैं। माना जाता है कि यह निशान पाषाण युग के मानव की ओर से दिशाओं का ज्ञान प्राप्त करने और गिनती करने के लिए बनाए गए थे।

Trending Videos

कुंजम दरें से समदो तक फैली पूरी घाटी में शिलालेख माैजूद

कुंजम दरें से समदो तक फैली लगभग पूरी घाटी में शिलालेख (पत्थर पर उकेरी गई आकृतियां) मौजूद हैं। इनमें से अधिकांश स्पीति के निचले हिस्से से मिली हैं। ये शिलालेख साधारण पत्थर के औजारों से चट्टानों पर उकेरी गई हैं। कुछ मामलों में ये बहुत सरल हैं और इनमें केवल एक ही आकृति है जबकि अन्य में मानवाकृति, पशुकृति और ज्यामितीय आकृतियों का एक जटिल संयोजन है। माना जाता है कि यह शिलाशिल्प उस काल के भी हो सकते हैं जो मानव इतिहास का वह प्रारंभिक समय है जब मनुष्य का अस्तित्व तो था लेकिन लेखन कला का आविष्कार नहीं हुआ था।

विज्ञापन
विज्ञापन

पेट्रोग्लिफ्स 1300 से 1500 ईसा पूर्व यानि 3500 साल पुराने

राज्य संग्रहालय के अध्यक्ष डॉ. हरी चौहान ने बताया कि यह पेट्रोग्लिफ्स 1300 से 1500 ईसा पूर्व यानि 3500 साल पुराने हैं। ये मुख्य रूप से पूर्व-बौद्ध संस्कृति (खासा या अन्य प्राचीन समुदायों) से जुड़े हैं और तिब्बत, लद्दाख और मध्य एशिया की रॉक आर्ट से समानताएं दिखाते हैं। ताबो के पास लरी गांव पेट्रोग्लिफ्स का सबसे बड़ा स्थल है जहां दो हजार से अधिक बोल्डरों पर नौ हजार से अधिक नक्काशियां हैं। इसके अलावा निचली स्पीति में 24 से अधिक स्थलों पर लगभग 1400 बोल्डरों पर छह हजार से अधिक पेट्रोग्लिफ्स पाए गए हैं।

विज्ञापन

दुर्लभ धरोहरों को खोजने के लिए 2017 से 2021 तक सर्वे किया

हिमाचल प्रदेश में दुर्लभ धरोहरों को खोजने के लिए 2017 से 2021 तक सर्वे किया गया था। इस दौरान यह प्राचीन शिलाचित्र स्पीति घाटी से प्राप्त हुए थे। स्पीति की किब्बर घाटी से 2017 में 14 हजार 400 फीट की ऊंचाई से 1700 साल पुराने शवागार संस्कृति के अवशेष भी खोजे गए थे। इन्हें संग्रहालय में संरक्षित करके रखा है। -डॉ. हरी चौहान, अध्यक्ष, राज्य संग्रहालय, शिमला

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed