हिमाचल: ऋण नहीं चुकाने वाले किसानों का 50 फीसदी ब्याज होगा माफ, इस बैंक ने शुरू की योजना
योजना के तहत तीन लाख रुपये तक के कृषि ऋण पर 50 फीसदी ब्याज माफ किया जाएगा। इसके लिए ऋण न चुका पाने वाले किसानों को 31 दिसंबर से पहले लंबित ऋण का 25 फीसदी भुगतान करना होगा, तभी उनका 50 फीसदी ब्याज माफ किया जाएगा।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक के ऋणधारकों को राहत देते हुए कृषि ऋण ब्याज अनुदान योजना को मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत तीन लाख रुपये तक के कृषि ऋण पर 50 फीसदी ब्याज माफ किया जाएगा। इसके लिए ऋण न चुका पाने वाले किसानों को 31 दिसंबर से पहले लंबित ऋण का 25 फीसदी भुगतान करना होगा, तभी उनका 50 फीसदी ब्याज माफ किया जाएगा। बैंक की इस वन टाइम सेटलमेंट योजना (ओटीएस) से प्रदेश के 6,356 से अधिक किसान परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा।
बैंक के अध्यक्ष संजय सिंह चौहान ने मंगलवार को पत्रकार वार्ता में कहा कि बैंक ने किसानों, बागवानों और ऋणधारकों के लिए तीन नई एकमुश्त निपटान (ओटीएस) योजनाएं भी शुरू की हैं। सरकार 24.81 करोड़ रुपये का ब्याज वहन करेगी। ओटीएस से कुल 200 करोड़ रुपये के मूलधन के मामलों का निपटारा होने का अनुमान है। लगभग 48 से 50 करोड़ के ब्याज में से 24 करोड़ रुपये की सीधी माफी शामिल है। शेष 24.81 करोड़ ग्राहकों की ओर से चुकाए जाएंगे। अत्यधिक विषम परिस्थितियों के बिना बैंक किसी भी ऋणधारक की संपत्ति की नीलामी या बिक्री नहीं करेगा।
बैंक और राज्य सरकार की इस साझा पहल के तहत 31 मार्च 2025 तक के पुराने बकाया मामलों का निपटारा किया जाएगा। 2016 तक के पुराने बकाये के लिए 25 फीसदी छूट मिलेगी। एनपीए घोषित हो चुके डिफॉल्टरों के लिए भी ओटीएस स्कीम शुरू की है। इसके तहत ऋणधारकों को ऋण चुकाने पर नियमित ब्याज में 25 फीसदी की छूट दी जाएगी। राज्य में बैंक के 9 जिलों के लगभग 5,000 खाते शामिल हैं। कांगड़ा, हमीरपुर और ऊना जिलों के करीब 1,300 खाते भी इस योजना का हिस्सा हैं।
शहरी सहकारी बैंकों में एनपीए वसूली तेज और निगरानी तंत्र मजबूत करने का फैसला
प्रदेश के शहरी सहकारी बैंकों को वित्तीय रूप से अधिक मजबूत और पारदर्शी बनाने के लिए एनपीए वसूली तेज करने और निगरानी तंत्र मजबूत करने का फैसला हुआ है। मंगलवार को आरबीआई शिमला द्वारा टास्क फोर्स ऑन अर्बन कोऑपरेटिव बैंक की 31वीं बैठक आयोजित की गई, जिसमें बैंकों की वित्तीय स्थिति, नियामकीय अनुपालन और भविष्य की चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक की सह अध्यक्षता आरबीआई के क्षेत्रीय निदेशक अनुपम किशोर और प्रदेश सरकार के सचिव सहकारिता सुदेश कुमार मोक्टा ने की। इसमें सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार, नेशनल फेडरेशन ऑफ अर्बन कोऑपरेटिव बैंक्स एंड क्रेडिट सोसाइटीज लिमिटेड के प्रतिनिधियों, आरबीआई के वरिष्ठ अधिकारियों तथा राज्य के शहरी सहकारी बैंकों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) ने भाग लिया।
बैठक में चयनित शहरी सहकारी बैंकों की वित्तीय स्थिति की गहन समीक्षा करते हुए आस्ति गुणवत्ता, पूंजी पर्याप्तता, नियामकीय अनुपालन और निगरानी संबंधी मुद्दों पर विशेष फोकस किया गया। बढ़ते गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) की वसूली में तेजी लाने, जोखिम प्रबंधन और कॉरपोरेट गवर्नेंस को सुदृढ़ करने, परिचालन दक्षता बढ़ाने तथा आंतरिक नियंत्रण तंत्र को मजबूत बनाने के उपायों पर विचार-विमर्श हुआ। आरबीआई अधिकारियों ने कहा कि टास्क फोर्स ऑन अर्बन कोऑपरेटिव बैंक शहरी सहकारी बैंकों की वित्तीय चुनौतियों की पहचान कर उनके समाधान के लिए एक प्रभावी संस्थागत मंच है। इसके माध्यम से नियामकों और बैंकिंग क्षेत्र के हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर सहकारी बैंकिंग प्रणाली को अधिक सशक्त और भरोसेमंद बनाया जा रहा है।