हिमाचल: मकान बहू के नाम हो तो भी सास को रहने का अधिकार, प्रदेश हाईकोर्ट ने किया स्पष्ट
हाईकोर्ट ने घरेलू हिंसा से जुड़े एक मामले में स्पष्ट किया है कि यदि सास अपनी बहू के साथ किसी मकान में साझा तौर पर रह रही है, तो केवल इस आधार पर उसे वहां से बेदखल नहीं किया जा सकता कि मकान बहू के नाम पर है।
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने घरेलू हिंसा से जुड़े एक मामले में स्पष्ट किया है कि यदि सास अपनी बहू के साथ किसी मकान में साझा तौर पर रह रही है, तो केवल इस आधार पर उसे वहां से बेदखल नहीं किया जा सकता कि मकान बहू के नाम पर है। न्यायाधीश राकेश कैंथला की अदालत ने सुरभि बेदी बनाम मनजीत कौर मामले में बहू की याचिका को खारिज करते हुए निचली अदालत और अपीलीय अदालत के उन फैसलों को बरकरार रखा, जिसमें सास के संयुक्त कब्जे को बहाल करने का आदेश दिया गया था। मामला मंडी जिले का है। सास की ओर से बताया गया कि उनके बेटे का विवाह मई 2013 में अपीलकर्ता से हुआ था।
परिवार कुछ समय तक किराये के मकान में रहा
विवाह के बाद परिवार कुछ समय तक किराये के मकान में रहा। सितंबर 2024 में सभी सदस्य बहू के नाम पर बने नए मकान में रहने लगे। सास के मुताबिक, नवंबर 2025 में बहू ने उनके साथ झगड़ा किया और एक किराएदार रखकर उन्हें मकान से बाहर कर दिया। इसके बाद सास ने घरेलू हिंसा अधिनियम की धारा 12, 17, 18, 19 और 22 के तहत सुरक्षा, संरक्षण और निवास के अधिकार की मांग करते हुए अदालत का रुख किया। बहू की ओर से दलील दी गई कि मकान उसकी निजी आय से बना है और वह उसकी एकमात्र मालिक है। सास केवल लाइसेंसी के रूप में वहां रह रही थी इसलिए सास उनके खिलाफ घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत याचिका दायर करने की हकदार नहीं है। हालांकि, हाईकोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया।
तीसरे व्यक्ति को किराएदार बना सास को बेदखल करना उचित नहीं
अदालत ने कहा कि साझा गृहस्थी की परिभाषा के लिए यह आवश्यक नहीं है कि संपत्ति पति, सास या पीड़ित महिला के नाम पर हो। यदि कोई महिला घरेलू संबंध के तहत किसी मकान में रह चुकी है, तो वह मकान साझा गृहस्थी माना जा सकता है। अदालत ने यह भी कहा कि जब बहू ने स्वयं स्वीकार किया है कि सास-ससुर उसके साथ उसी मकान में रह रहे थे, तो दोनों के बीच घरेलू संबंध स्थापित होता है। ऐसे में किसी तीसरे व्यक्ति को किराएदार बनाकर सास को अप्रत्यक्ष रूप से बेदखल करना कानूनन उचित नहीं है।