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Himachal: बुनियादी ढांचे की कमी, अदालतों के गठन में देरी पर सरकार को लगाया 10 लाख का जुर्माना

संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Mon, 06 Apr 2026 08:46 PM IST
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सार

हाईकोर्ट ने राज्य में न्यायिक बुनियादी ढांचे की कमी और अदालतों के गठन में देरी पर कड़ा रुख अपनाते हुए प्रदेश सरकार पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। 

Himachal Govt fined ₹10 lakh for lack of infrastructure and delays in the constitution of courts.
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

 हिमाचल हाईकोर्ट ने राज्य में न्यायिक बुनियादी ढांचे की कमी और अदालतों के गठन में देरी पर कड़ा रुख अपनाते हुए प्रदेश सरकार पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज की खंडपीठ ने सरकार के रवैये को टालमटोल करने वाला बताते हुए यह आदेश पारित किए हैं। खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि बढ़ती जनसंख्या और मुकदमों के बोझ को 20 साल पुराने बुनियादी ढांचे के सहारे नहीं छोड़ा जा सकता। 

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अदालत ने प्रधान सचिव वित्त को निर्देश दिए कि वह अगली सुनवाई पर अदालत को सूचित करें कि आगामी वर्ष के लिए न्यायपालिका के लिए कुल बजट का कितना प्रतिशत प्रावधान किया गया है। पिछले वर्ष की तुलना में इस बजट में कितनी वृद्धि हुई है। अदालत ने कहा कि सरकार केवल जिम्मेदारी एक अधिकारी से दूसरे पर डालने की कोशिश कर रही है। यदि अगली सुनवाई तक न्यायिक बुनियादी ढांचे को लेकर कोई प्रभावी और सक्रिय कदम नहीं उठाए गए तो कोर्ट सांविधानिक ढांचे के तहत और भी सख्त आदेश पारित करने के लिए मजबूर होगा।

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कैबिनेट बैठकों पर उठाया सवाल, सरकार के आश्वासनों को खोखले वादे करार दिया
अदालत ने हैरानी जताई कि राज्य सरकार बंगाणा और हरोली में सिविल जज की अदालतें बनाने का प्रस्ताव दे रही है, जहां हाईकोर्ट ने मांग ही नहीं की थी, जबकि 34 अन्य आवश्यक अदालतों के प्रस्ताव पर कोई ठोस काम नहीं हुआ। अदालत ने कैबिनेट की बैठकों पर भी सवाल उठाए। कोर्ट को बताया गया है कि महीने में कम से कम दो बार कैबिनेट की बैठकें होती हैं, लेकिन 5 जनवरी 2026 के बाद से पदों के सृजन पर कोई सक्रिय कदम नहीं उठाया गया। अदालत ने सरकार के आश्वासनों को खोखले वादे करार दिया। खंडपीठ ने एनडीपीएस मामलों पर भी चिंता जताई। केंद्र सरकार की ओर से नशा निवारण के लिए विशेष अदालतों के गठन के बार-बार अनुरोध के बावजूद राज्य सरकार ने बुनियादी ढांचा बढ़ाने में कोई रुचि नहीं दिखाई। कोर्ट ने कहा कि राज्य हिमाचल को नशामुक्त बनाने का दावा तो करता है, लेकिन इन दावों को पूरा करने के लिए जरूरी प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे।

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