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हिमाचल: चिंतपूर्णी मंदिर विकास कार्यों में देरी पर सरकार को हाईकोर्ट की चेतावनी

Tue, 28 Jul 2026 07:15 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Tue, 28 Jul 2026 07:15 PM IST
सार

कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि उसके आदेशों का समय पर पालन नहीं किया गया तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू की जा सकती है। मामले की अगली सुनवाई 21 अगस्त को निर्धारित की गई है।

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Himachal: High Court warns govt over delay in Chintpurni Temple development works.
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने चिंतपूर्णी मंदिर के विकास कार्यों में हो रही देरी पर राज्य सरकार को कड़ी चेतावनी दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि उसके आदेशों का समय पर पालन नहीं किया गया तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू की जा सकती है। मामले की अगली सुनवाई 21 अगस्त को निर्धारित की गई है।मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायमूर्ति अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। मामला चिंतपूर्णी मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण, विस्तार और पार्किंग सुविधाओं के विकास से जुड़ा है।

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सुनवाई के दौरान उपायुक्त ऊना ने हलफनामा दायर कर बताया कि मंदिर के आसपास उपलब्ध पार्किंग स्थलों की सूची तैयार कर ली गई है। मंदिर से करीब दो किलोमीटर दूर भारी वाहनों की पार्किंग के लिए सरकारी भूमि भी चिन्हित कर ली गई है, जिसे मंदिर ट्रस्ट के नाम स्थानांतरित करने की प्रक्रिया जारी है। भूमि हस्तांतरण पूरा होते ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। हलफनामे में बताया गया कि मंदिर से सटी भूमि के अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है और इसके लिए स्थानीय दुकानदारों से बातचीत की जा रही है। प्रस्तावित भूमि पर मंदिर परिसर का विस्तार करने के साथ श्रद्धालुओं के लिए विश्राम गृह, पेयजल, शौचालय और नई पार्किंग जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

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हालांकि, याचिकाकर्ता रजनीश खोसला और अन्य पक्षों ने प्रशासन के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि कई महीने बीतने के बावजूद जमीन पर कोई ठोस कार्य दिखाई नहीं दे रहा है और केवल कागजी कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने सरकार के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू करने की मांग की। दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि 30 दिसंबर 2024 को दिए गए उसके आदेशों का निर्धारित समय सीमा में पालन नहीं हुआ है। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि सरकार की ओर से दायर हलफनामे में भूमि अधिग्रहण की वर्तमान स्थिति स्पष्ट रूप से नहीं बताई गई है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि अगली सुनवाई तक आवश्यक कदम नहीं उठाए गए और प्रगति जमीन पर दिखाई नहीं दी तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई पर विचार किया जाएगा।

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