हिमाचल: स्कूलों में छात्राओं को मिलेंगे सेनेटरी नैपकिन, बेहतर शौचालय सुविधा, दिशा-निर्देश जारी
प्रदेश के सरकारी स्कूलों में किशोरियों के लिए सेनेटरी नैपकिन की उपलब्धता, कार्यशील शौचालय और स्वच्छता सुविधाओं को सुनिश्चित किया जाएगा।
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हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में किशोरियों के लिए सेनेटरी नैपकिन की उपलब्धता, कार्यशील शौचालय और स्वच्छता सुविधाओं को सुनिश्चित किया जाएगा। विद्यार्थियों में पोषण, स्वास्थ्य, स्वच्छता, मासिक धर्म प्रबंधन और लैंगिक समानता को लेकर व्यापक जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा। इसके लिए शिक्षा निदेशालय ने प्रदेश के सभी उपनिदेशकों के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन, महिला एवं बाल विकास, स्वास्थ्य, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन तथा शिक्षा विभाग के बीच खाद्य, पोषण, स्वास्थ्य, स्वच्छता और लैंगिक गतिविधियों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए शिक्षा निदेशालय ने पत्र जारी किया है। इसका उद्देश्य महिलाओं, बच्चों और किशोरियों के स्वास्थ्य एवं पोषण से जुड़े संकेतकों में सुधार लाना है। निर्देशों के अनुसार स्कूल प्रबंधन समितियों को ग्रामीण आजीविका मिशन के स्वयं सहायता समूहों और कैडर को स्कूल गतिविधियों से जोड़ा जाएगा। यह समूह स्कूलों में स्वच्छता, परिसर बागवानी और बैग-फ्री डे जैसी गतिविधियों में सहयोग देंगे। बच्चों के लिए पोषण, स्वास्थ्य, स्वच्छता और जीवन कौशल जैसे विषयों पर संवाद सत्र भी आयोजित किए जाएंगे। स्कूलों में पोषण, स्वच्छता और वॉश से जुड़े संदेशों को नियमित कार्यक्रमों का हिस्सा बनाने को कहा गया है।
ट्रांसजेंडर छात्रों के लिए स्कूलों में बनेगा सुरक्षित माहौल
हिमाचल प्रदेश में ट्रांसजेंडर छात्रों के अधिकारों की सुरक्षा और उन्हें शिक्षा का समान अवसर उपलब्ध कराने के लिए स्कूल शिक्षा निदेशालय ने जिला अधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी किए हैं। राज्य के सभी सरकारी और निजी शिक्षण संस्थानों को ट्रांसजेंडर विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित, सम्मानजनक और समावेशी वातावरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। लिंग गैर-अनुरूप छात्रों को किसी भी प्रकार की धमकाने, भेदभाव या हिंसा से बचाने के लिए विशेष उपाय करने को कहा गया है। निदेशालय ने सभी जिला उपनिदेशकों को इन निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के आदेश जारी किए हैं। यह पहल ट्रांसजेंडर व्यक्ति अधिनियम 2019 और नियम 2020 के प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू करने की दिशा में उठाया गया कदम है। नए निर्देशों के तहत जिला स्तर पर ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए भेदभाव विरोधी प्रकोष्ठ स्थापित किया जाएगा
प्रत्येक शिक्षण संस्थान में ट्रांसजेंडर छात्रों के खिलाफ भेदभाव, यौन उत्पीड़न और अन्य प्रकार की हिंसा की शिकायतों के समाधान के लिए विशेष निगरानी समिति या प्रकोष्ठ का गठन किया जाएगा। इन समितियों की जिम्मेदारी स्कूलों और कॉलेजों में ऐसे मामलों की निगरानी करने और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने की होगी। शिक्षा निदेशालय ने स्कूल स्वास्थ्य कार्यक्रमों के साथ ट्रांसजेंडर छात्रों की देखभाल और परामर्श सेवाओं को जोड़ने पर भी जोर दिया है। अधिकारियों से यह जानकारी मांगी गई है कि विद्यार्थियों को धमकाने और ट्रांसजेंडर छात्रों के स्कूल छोड़ने की बढ़ती घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। यह निर्देश जेन कौशिक बनाम भारत संघ मामले में उच्च न्यायालय की कार्यवाही और केंद्र सरकार की सलाहकार समिति की सिफारिशों के अनुपालन में जारी किए गए हैं। मई 2026 में न्यायमूर्ति आशा मेनन (सेवानिवृत्त) की अध्यक्षता में हुई बैठक में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकारों के संरक्षण और उनके कल्याण से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई थी। इसके बाद सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने राज्यों से ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी थी, जिसके तहत हिमाचल ने शिक्षा क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों का ब्यौरा तैयार करना शुरू कर दिया है।