फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   International Youth Day: Soaring high from the mountains and shining bright on the global stage, success stori

अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस: पहाड़ से हौसलों की उड़ान भर दुनिया में बिखेर रहे चमक, पढ़ें सफलता की कहानियां

Wed, 12 Aug 2026 06:00 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Wed, 12 Aug 2026 06:00 AM IST
सार

पहाड़ों की गोद से निकलने वाली नई पीढ़ी आज खेल के मैदान में नाम कमा रही है, फिल्मी दुनिया में पहचान बनाने के साथ नए स्टार्टअप खड़े कर रही है, प्रशासनिक सेवाओं में भी सफलता हासिल कर दुनिया भर में देवभूमि का नाम रोशन कर रही है। अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस पर प्रदेश की युवा शक्ति की यह कहानी केवल उपलब्धियों की नहीं, बल्कि उनकी बदलती सोच, बढ़ते आत्मविश्वास और नए हिमाचल के निर्माण की भी है।

विज्ञापन
International Youth Day: Soaring high from the mountains and shining bright on the global stage, success stori
प्रतिभा रांटा, साक्षी शर्मा, मेजर राधिका। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कभी सरकारी नौकरी को ही सफलता का पर्याय मानने वाला हिमाचल का युवा आज बदल रहा है। पहाड़ों की गोद से निकलने वाली नई पीढ़ी आज खेल के मैदान में नाम कमा रही है, फिल्मी दुनिया में पहचान बनाने के साथ नए स्टार्टअप खड़े कर रही है, प्रशासनिक सेवाओं में भी सफलता हासिल कर दुनिया भर में देवभूमि का नाम रोशन कर रही है। 

विज्ञापन


ऑस्कर तक पहुंची प्रतिभा रांटा की लापता लेडीज फिल्म 
शिमला के रोहड़ू की प्रतिभा रांटा बॉलीवुड में अपने बेहतरीन अभिनय के दम पर युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बनी हैं। बॉलीवुड फिल्म लापता लेडीज वर्ष 2025 में ऑस्कर के लिए भी नामित हुई थी। इसमें प्रतिभा रांटा ने मुख्य भूमिका निभाई। उन्होंने अपने अभिनय से सभी को प्रभावित किया था। प्रतिभा का अभिनय न केवल छोटे पर्दे पर बल्कि बड़े पर्दों पर भी बेमिसाल रहा है। प्रीति जिंटा, यामी गौतम और कंगना रणौत के बाद अब प्रतिभा ने बॉलीवुड में पहचान बनाई है।
विज्ञापन


साक्षी शर्मा देश की सबसे सफल डिफेंडर
खेलो इंडिया सेंटर राजपुरा की खिलाड़ी साक्षी शर्मा ने छोटे से गांव से निकलकर भारतीय कबड्डी को ऊंचाई तक पहुंचाया। पिछले वर्ष नवंबर में हुए वर्ल्ड कप में साक्षी ने भारत की टीम में सफल डिफेंडर की भूमिका निभाई। लगातार तीन बार हिमाचल को राष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड दिलाने वाली साक्षी वर्तमान में खेलो इंडिया सेंटर राजपुरा में लगातार कोचिंग ले रही है। हाल ही में प्रदेश की छह महिला खिलाड़ियों का चयन एशियन कबड्डी लीग के लिए हुआ, इसमें साक्षी भी शामिल हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

 

मेजर राधिका ने संयुक्त राष्ट्र में बढ़ाया हिमाचल का मान
सुंदरनगर की मेजर राधिका सेन ने भारतीय सेना में सेवा के दौरान अपनी कार्यकुशलता और संवेदनशील नेतृत्व की मिसाल कायम की। संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन में उनके योगदान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली। वर्ष 2024 में उन्हें मिलिट्री जेंडर एडवोकेट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। राधिका सेन ने लोकतांत्रिक गणराज्य कांगो के पूर्वी क्षेत्र में संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन के तहत जिम्मेदारी निभाई। वहां उन्होंने स्थानीय समुदायों के साथ लगातार संवाद कर सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर काम किया। महिलाओं और लड़कियों की भागीदारी बढ़ाने और लैंगिक समानता को प्रोत्साहित करने की उनकी पहल को विशेष रूप से सराहा गया। उनकी भूमिका का अहम पक्ष समुदायों में शिक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ाना भी रहा।

निषाद कुमार ने एक हाथ से मुट्ठी में कर ली दुनिया
ऊना जिले के निषाद कुमार उन लोगों के मिसाल हैं, जो दिव्यांगता को कमजोरी मानकर हार मान लेते हैं। साल 2020 में टोक्यो पैरांलपिक में देश के लिए रजत पदक जीतने वाले निषाद का बचपन बेहद गरीबी में गुजरा। पिता मिस्त्री थे और माता गृहिणी। उनके जीवन का सबसे बुरा दौर तब आया, जब उनकी उम्र महज आठ साल की थी। पशुओं के लिए चारा काटते समय उनका हाथ मशीन में आने से कट गया। निषाद ने हिम्मत नहीं हारी। एक बार ऊंची कूद के सामान्य वर्ग में ही निषाद को पहला स्थान मिला। निषाद आगे बढ़ना चाहते थे, पर गरीबी की दीवार सामने खड़ी थी। बेटे की मदद के लिए पिता रछपाल सिंह ने सब्जियां उगाना शुरू कीं और मां गाय और भैंस पालना शुरू की, ताकि निषाद की डाइट में कमी न रहे। वर्ष 2017 में माता-पिता से महज 2500 रुपये लेकर वह घर से पंचकूला के ताऊ देवी लाल स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में प्रशिक्षण लेने चले गए। उस समय पंचकूला की खेल नर्सरी बंद थी। निषाद के जुनून को देखते हुए कोच नसीम अहमद ने उन्हें कांप्लेक्स में ही खाली कमरा मुहैया करवाया और ट्रेनिंग देनी शुरू कर दी। कड़े प्रशिक्षण के बाद वर्ष 2017 में निषाद कुमार ने पंचकूला में हुई राष्ट्रीय पैरा एथलेटिक्स प्रतियोगिता में 1.83 मीटर की ऊंची कूद में रजत पदक जीता। इसके बाद वर्ष 2019 में दुबई में विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में निषाद कुमार ने कांस्य पदक जीता और 2020 टोक्यो पैरालंपिक के लिए क्वालीफाई किया, फिर वह बड़ा दिन भी आया, जिसका निषाद को इंतजार था। टोक्यो पैरालंपिक 2020 में ऊंची कूद में निषाद ने सिल्वर मेडल जीतकर इतिहास रच दिया। ऊना जिले के अंब उपमंडल के बदायूं निवासी निषाद ऐसा करने वाले पहले हिमाचली खिलाड़ी बन गए। उन्होंने 2.06 मीटर ऊंची कूद लगाकर एशियन रिकॉर्ड बनाया।


 

प्रीति ठाकुर यूथ एशियन गेम्स में स्वर्ण जीतने वाली अकेली खिलाड़ी
 बिलासपुर के कसोल गांव की प्रीति ठाकुर ने कबड्डी खेल में पहचान बनाई है। 2025 में बहरीन में तीसरे यूथ एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय कबड्डी टीम का हिस्सा बनकर प्रीति ने देश के साथ हिमाचल और बिलासपुर का नाम भी रोशन किया। इस प्रतियोगिता में हिमाचल से भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व करने वाली वह एकमात्र खिलाड़ी रहीं। प्रीति पिछले चार वर्षों से बिलासपुर स्थित राज्य खेल छात्रावास में कबड्डी का प्रशिक्षण ले रही हैं। कबड्डी प्रशिक्षक हंसराज के मार्गदर्शन में उन्होंने खेल की बारीकियां सीखीं और लगातार अपने प्रदर्शन में सुधार किया। राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में प्रदेश का प्रतिनिधित्व करने के साथ ही उन्होंने स्कूल नेशनल और जूनियर कबड्डी प्रतियोगिताओं में हिमाचल टीम की कप्तानी भी की है। खेल के साथ प्रीति पढ़ाई में भी आगे हैं। वर्तमान में वह राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय बिलासपुर में बीए द्वितीय वर्ष की छात्रा हैं। खेल और शिक्षा के बीच संतुलन बनाकर आगे बढ़ रही प्रीति जिले के उन युवाओं के लिए मिसाल हैं, जो खेल के क्षेत्र में अपना करियर बनाने का सपना देखते हैं। उनके पिता अमर सिंह खेती बाड़ी करते हैं और माता सुईनी देवी गृहिणी हैं।

इंटरनेशनल कंपनी होइरबिगर में एमडी हैं चायल के अरुण
सोलन जिले के चायल क्षेत्र के गांव जखेड़ के रहने वाले अरुण वर्मा नामी इंटरनेशनल कंपनी होइरबिगर में प्रबंध निदेशक का जिम्मा संभाल रहे हैं। चायल के मिलिट्री स्कूल में स्कूली पढ़ाई पूरी करने के बाद अरुण ने एनआईटी सूरत से इंजीनियरिंग और आईआईएम अहमदाबाद से एमबीए की। साल 2025 में होइरबिगर ने उन्हें देश में प्रबंध निदेशक बनाया है। इनोवेशन और एनर्जी सेविंग के क्षेत्र में काम करने वाली यह कंपनी 40 देशों में काम कर रही है।

दिव्यांगता को दी मात, जरूरतमंदों के लिए दौड़ रहे वीरेंद्र
सिरमौर में लग्नू गांव के वीरेंद्र सिंह कहानी प्रेरक है। आंखों की रोशनी में परेशानी के कारण वह 40 प्रतिशत दिव्यांगता की श्रेणी में आते हैं, लेकिन हौसले की रोशनी इतनी तेज है कि आज उनके कदम अंतरराष्ट्रीय ट्रैक पर देश के लिए पदक जीत रहे हैं। आयुर्वेदिक फार्मासिस्ट के रूप में सेवाएं दे रहे वीरेंद्र राष्ट्रीय स्तर के पैरा धावक हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वह देश के लिए एक स्वर्ण और दो रजत जीत चुके हैं। वीरेंद्र की कहानी सिर्फ खेल उपलब्धियों तक सीमित नहीं है। उनके लिए दौड़ का मतलब केवल फिनिशिंग लाइन पार करना नहीं, बल्कि किसी जरूरतमंद तक उम्मीद पहुंचाना भी है। एक 14 वर्षीय किडनी पीड़ित बच्ची के इलाज के लिए उन्होंने 26 और 32 किलोमीटर की दौड़ लगाकर 2.50 लाख रुपये जुटाए। इसके बाद एक अन्य धावक सुनील शर्मा के साथ मिलकर 232 किलोमीटर की दौड़ के जरिये 8.45 लाख रुपये जुटाए और पांच गंभीर मरीजों की आर्थिक मदद की। वीरेंद्र अब चिट्टे जैसे घातक नशे के खिलाफ युवाओं को जागरूक कर रहे हैं। पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने के लिए उन्होंने शिमला से चंडीगढ़ तक 219 किलोमीटर की दौड़ भी पूरी की।

सड़कों पर पिता का संघर्ष, ट्रैक पर बेटी ने लिखी सफलता की इबारत
 पिता सड़कों पर ट्रक चलाकर परिवार की जिम्मेदारियां उठाते रहे और बेटी ने ट्रैक पर अपनी रफ्तार से सफलता की नई कहानी लिख दी। आर्थिक तंगी और सीमित संसाधनों के बावजूद ऊटपुर की 26 वर्षीय धाविका मनीषा अक्तूबर 2025 को रांची में हुई अंतरराष्ट्रीय साउथ एशियन गेम्स में 400 गुणा 4 मीटर रिले में स्वर्ण पदक जीतकर क्षेत्र का नाम रोशन कर चुकी हैं। मनीषा वर्तमान में केरल के तिरुवनंतपुरम में प्रशिक्षण ले रही हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का उनका सफर आसान नहीं रहा। उनके पिता रमेश चंद ट्रक चालक हैं, जबकि माता शीला देवी गृहिणी हैं। परिवार की सीमित आर्थिक स्थिति के बावजूद मनीषा ने खेल को अपना लक्ष्य बनाया और लगातार अभ्यास जारी रखा। मनीषा के परिवार में एक भाई और एक बहन है। बहन की शादी हो चुकी है। मनीषा के अनुसार प्रशिक्षण कैंप में उन्हें रहने और खाने की सुविधा मिलती है, लेकिन खेल से जुड़ी अन्य जरूरतों के लिए पर्याप्त आर्थिक मदद उपलब्ध नहीं हो पाती।

रंगमंच के जुनून से मुंबई तक पहुंचे गगन, अब युवाओं को दे रहे मंच
सपना बड़ा हो तो शहर की सीमाएं प्रतिभा का रास्ता नहीं रोक सकतीं। मंडी शहर की पुरानी मंडी निवासी गगन प्रदीप शर्मा ने रंगमंच के जुनून को कॅरिअर बनाया और मुंबई की मायानगरी तक पहुंचे। आज वह फिल्मों, धारावाहिकों और वेब सीरीज में अभिनय कर रहे हैं। युवा दिवस पर उनकी कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो अपनी प्रतिभा को बड़े मंच पर पहचान दिलाना चाहते हैं। गगन वर्ष 1990 में रंगमंच से जुड़े। स्कूल-कॉलेज के समारोहों और युवा उत्सवों में अभिनय करते हुए उन्होंने मंच की बारीकियां सीखीं। वर्ष 2003 से 2019 तक डीएवी कॉलेज चंडीगढ़ में ड्रामा शिक्षक के रूप में कार्य किया। इस दौरान अभिनय के साथ युवाओं को रंगमंच से जोड़ने का अनुभव भी हासिल किया। मुंबई में अभिनेता के तौर पर सफर शुरू करने के बाद उन्होंने कई फिल्मों, धारावाहिकों और वेब सीरीज में काम किया। मंडी में जागृति कला मंच संस्था का गठन कर स्थानीय कलाकारों को मंच देने का प्रयास भी किया। उनका मानना है कि कलाकार को अवसर मिलने के साथ अपनी जड़ों से भी जुड़े रहना चाहिए। मुंबई में रहते हुए भी वह रंगमंच से जुड़े हुए हैं।

अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस पर रूस में देश का प्रतिनिधित्व करेंगे
हिमाचल के युवा नेतृत्वकर्ता और एनएसएस राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता ललित कुमार डोगरा अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस पर रूस में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। उन्हें रूस के ट्यूमेन क्षेत्र में 12 से 18 अगस्त तक होने वाले न्यू जेनरेशन और डिस्कवर योर रशिया कार्यक्रम के लिए अंतरराष्ट्रीय युवा प्रतिनिधि के रूप में आमंत्रित किया गया है। ललित भारत के युवा नेतृत्व, स्वयंसेवा, सामाजिक विकास और शहरी युवा सहभागिता से जुड़े अपने अनुभव साझा करेंगे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed