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Kangra News: वन उत्पादों की बिक्री से कमाए 4.47 करोड़ रुपये
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Sat, 11 Apr 2026 07:01 AM IST
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-एचपीएसएफडीसी ने पिछले वर्षों की तुलना में किया बेहतर प्रदर्शन
-फरवरी 2026 तक वन उत्पादों की मांग में वृद्धि की गई दर्ज
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संवाद न्यूज एजेंसी
धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश राज्य वन विकास निगम (एचपीएसएफडीसी) ने वन उत्पादों की बिक्री से भारी आय अर्जित की है। निगम को खैर और अन्य लकड़ी प्रजातियों की बिक्री से चार करोड़ 47 लाख 92 हजार रुपये की आमदनी हुई है। यह पिछले वर्षों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन को दर्शाता है। इसके अलावा आरएसडी (रेंज सेल डिपो) से एचएसडी (हिमकास्ट सेल डिपो) नूरपुर तक कुल 5599 घन मीटर लकड़ी का परिवहन किया गया है।
फरवरी 2026 तक वन उत्पादों की मांग में वृद्धि दर्ज की गई है। इससे राजस्व में भी बढ़ोतरी हुई है। खैर की लकड़ी के साथ-साथ अन्य मूल्यवान प्रजातियों की बिक्री ने आय में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। यह लकड़ी विभिन्न निर्माण और औद्योगिक उपयोगों के लिए भेजी गई है। वन संसाधनों के वैज्ञानिक प्रबंधन और पारदर्शी नीतियों के चलते यह उपलब्धि हासिल हुई है। साथ ही भविष्य में भी वन उत्पादों की बिक्री बढ़ाने और राजस्व में और वृद्धि करने के प्रयास जारी रहेंगे। वन विभाग के इस प्रदर्शन को प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
वन निगम धर्मशाला के तहत चार मंडल धर्मशाला, नूरपुर, पालमपुर और देहरा आते हैं। इन चाराें मंडलों की विभिन्न प्रकार की लकड़ी नूरपुर तक पहुंचाई जाती है। यहां पर उनकी नीलामी की जाती है। धर्मशाला में यह कार्यालय वर्ष 1975 से संचालित है। यहां से चिलगोजा (चीड़), साल और खैर सहित अन्य मिश्रित प्रजातियों की लकड़ी आदि का परिवहन किया जाता है।
-अमरीश शर्मा, मंडलीय प्रबंधक वन निगम धर्मशाला।
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-फरवरी 2026 तक वन उत्पादों की मांग में वृद्धि की गई दर्ज
संवाद न्यूज एजेंसी
धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश राज्य वन विकास निगम (एचपीएसएफडीसी) ने वन उत्पादों की बिक्री से भारी आय अर्जित की है। निगम को खैर और अन्य लकड़ी प्रजातियों की बिक्री से चार करोड़ 47 लाख 92 हजार रुपये की आमदनी हुई है। यह पिछले वर्षों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन को दर्शाता है। इसके अलावा आरएसडी (रेंज सेल डिपो) से एचएसडी (हिमकास्ट सेल डिपो) नूरपुर तक कुल 5599 घन मीटर लकड़ी का परिवहन किया गया है।
फरवरी 2026 तक वन उत्पादों की मांग में वृद्धि दर्ज की गई है। इससे राजस्व में भी बढ़ोतरी हुई है। खैर की लकड़ी के साथ-साथ अन्य मूल्यवान प्रजातियों की बिक्री ने आय में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। यह लकड़ी विभिन्न निर्माण और औद्योगिक उपयोगों के लिए भेजी गई है। वन संसाधनों के वैज्ञानिक प्रबंधन और पारदर्शी नीतियों के चलते यह उपलब्धि हासिल हुई है। साथ ही भविष्य में भी वन उत्पादों की बिक्री बढ़ाने और राजस्व में और वृद्धि करने के प्रयास जारी रहेंगे। वन विभाग के इस प्रदर्शन को प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
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वन निगम धर्मशाला के तहत चार मंडल धर्मशाला, नूरपुर, पालमपुर और देहरा आते हैं। इन चाराें मंडलों की विभिन्न प्रकार की लकड़ी नूरपुर तक पहुंचाई जाती है। यहां पर उनकी नीलामी की जाती है। धर्मशाला में यह कार्यालय वर्ष 1975 से संचालित है। यहां से चिलगोजा (चीड़), साल और खैर सहित अन्य मिश्रित प्रजातियों की लकड़ी आदि का परिवहन किया जाता है।
-अमरीश शर्मा, मंडलीय प्रबंधक वन निगम धर्मशाला।