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Kangra News: एंटी चिट्टा मॉडल की अन्य राज्यों में भी चर्चा
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धर्मशाला। उपमुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया ने कहा कि प्रदेश सरकार हिमाचल को नशा मुक्त बनाने के लिए कृतसंकल्प है। इस अभियान में जनता की भागीदारी भी जरूरी है। सुक्खू सरकार का एंटी चिट्टा मॉडल नशा तस्करों और अपराधियों पर प्रभावी कार्रवाई करने में सफल रहा है। यही कारण है कि इस मॉडल की चर्चा अब अन्य राज्यों में भी होने लगी है।
वीरवार को स्कूल शिक्षा बोर्ड के सभागार में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग, स्वास्थ्य विभाग और गुंजन संस्था के संयुक्त तत्वावधान में नशीली दवाओं के दुरुपयोग एवं अवैध तस्करी के विरुद्ध अंतरराष्ट्रीय दिवस-2026 तथा क्षय रोग जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मुख्यातिथि केवल सिंह पठानिया ने कहा कि प्रदेश में कांग्रेस सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने चिट्टे की समस्या से निपटने के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए थे। चिट्टे के कारोबार में संलिप्त लोगों की पहचान करने के साथ पंचायत स्तर तक विस्तृत मानचित्रण किया गया।
हिमाचल देश का पहला राज्य है जहां पंचायतों को चिट्टा के प्रभाव के आधार पर रेड, येलो और ग्रीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है। सर्वेक्षण में 234 पंचायतों को रेड श्रेणी में रखा गया जहां नशे की समस्या अधिक पाई गई। सरकार केवल तस्करों के खिलाफ कार्रवाई ही नहीं कर रही, बल्कि नशे के शिकार लोगों के पुनर्वास पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
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गुंजन संस्था के निदेशक विजय कुमार ने नशे के दुष्प्रभावों और रोकथाम के उपायों पर जानकारी दी। विद्यार्थियों ने नुक्कड़ नाटक, लघु नाटिका, पोस्टर निर्माण, भाषण और अन्य प्रतियोगिताओं के माध्यम से नशा और क्षय रोग के प्रति जागरूकता का संदेश दिया। इस दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों और नोडल अधिकारियों को सम्मानित किया गया। जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेश सूद ने भी क्षय रोग के प्रति जागरूक रहने और समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करने की अपील की।
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वीरवार को स्कूल शिक्षा बोर्ड के सभागार में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग, स्वास्थ्य विभाग और गुंजन संस्था के संयुक्त तत्वावधान में नशीली दवाओं के दुरुपयोग एवं अवैध तस्करी के विरुद्ध अंतरराष्ट्रीय दिवस-2026 तथा क्षय रोग जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मुख्यातिथि केवल सिंह पठानिया ने कहा कि प्रदेश में कांग्रेस सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने चिट्टे की समस्या से निपटने के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए थे। चिट्टे के कारोबार में संलिप्त लोगों की पहचान करने के साथ पंचायत स्तर तक विस्तृत मानचित्रण किया गया।
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हिमाचल देश का पहला राज्य है जहां पंचायतों को चिट्टा के प्रभाव के आधार पर रेड, येलो और ग्रीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है। सर्वेक्षण में 234 पंचायतों को रेड श्रेणी में रखा गया जहां नशे की समस्या अधिक पाई गई। सरकार केवल तस्करों के खिलाफ कार्रवाई ही नहीं कर रही, बल्कि नशे के शिकार लोगों के पुनर्वास पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
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गुंजन संस्था के निदेशक विजय कुमार ने नशे के दुष्प्रभावों और रोकथाम के उपायों पर जानकारी दी। विद्यार्थियों ने नुक्कड़ नाटक, लघु नाटिका, पोस्टर निर्माण, भाषण और अन्य प्रतियोगिताओं के माध्यम से नशा और क्षय रोग के प्रति जागरूकता का संदेश दिया। इस दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों और नोडल अधिकारियों को सम्मानित किया गया। जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेश सूद ने भी क्षय रोग के प्रति जागरूक रहने और समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करने की अपील की।