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Kangra News: चेक बाउंस मामले में दोषी की अपील खारिज, भुगतनी होगी दो साल की जेल
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Sun, 29 Mar 2026 08:33 AM IST
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धर्मशाला। चेक बाउंस के एक मामले में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश देहरा सपना पांडे की अदालत ने दोषी द्वारा दायर अपील को खारिज कर दिया है। अदालत ने निचली अदालत (ट्रायल कोर्ट) द्वारा सुनाई गई 2 साल की कैद और 19,70,000 रुपये के मुआवजे की सजा को बरकरार रखा है। दोषी को अब अदालत में आत्मसमर्पण करना होगा, अन्यथा वारंट जारी कर सजा लागू की जाएगी।
जानकारी के अनुसार परागपुर क्षेत्र के एक शिकायतकर्ता ने बीएसएनएल के ऑप्टिकल फाइबर बिछाने के कार्य के लिए आरोपी को मजदूर उपलब्ध करवाए थे। कार्य पूरा होने के बाद 9,85,000 रुपये की बकाया राशि के भुगतान के लिए आरोपी ने 1 मई 2021 को नंगल चौक स्थित एसबीआई शाखा का चेक जारी किया था। बैंक में लगाने पर यह चेक पर्याप्त राशि न होने के कारण बाउंस हो गया।
कानूनी नोटिस के बावजूद भुगतान न मिलने पर मामला अदालत पहुंचा। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट देहरा की अदालत ने 19 अगस्त 2025 को आरोपी को धारा 138 के तहत दोषी करार देते हुए 2 साल के साधारण कारावास और चेक राशि से दोगुनी (19.70 लाख) मुआवजा राशि अदा करने के आदेश दिए थे। मुआवजा न देने पर 3 माह की अतिरिक्त सजा का प्रावधान भी किया गया था।
दोषी ने इस फैसले को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 415 के तहत अतिरिक्त सत्र न्यायालय में चुनौती दी थी। अदालत ने सभी साक्ष्यों के अवलोकन के बाद पाया कि चेक विधिक देनदारी के निपटारे के लिए ही जारी किया गया था। अदालत ने निचली अदालत के फैसले को सही ठहराते हुए अपील को खारिज कर दिया।
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जानकारी के अनुसार परागपुर क्षेत्र के एक शिकायतकर्ता ने बीएसएनएल के ऑप्टिकल फाइबर बिछाने के कार्य के लिए आरोपी को मजदूर उपलब्ध करवाए थे। कार्य पूरा होने के बाद 9,85,000 रुपये की बकाया राशि के भुगतान के लिए आरोपी ने 1 मई 2021 को नंगल चौक स्थित एसबीआई शाखा का चेक जारी किया था। बैंक में लगाने पर यह चेक पर्याप्त राशि न होने के कारण बाउंस हो गया।
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कानूनी नोटिस के बावजूद भुगतान न मिलने पर मामला अदालत पहुंचा। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट देहरा की अदालत ने 19 अगस्त 2025 को आरोपी को धारा 138 के तहत दोषी करार देते हुए 2 साल के साधारण कारावास और चेक राशि से दोगुनी (19.70 लाख) मुआवजा राशि अदा करने के आदेश दिए थे। मुआवजा न देने पर 3 माह की अतिरिक्त सजा का प्रावधान भी किया गया था।
दोषी ने इस फैसले को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 415 के तहत अतिरिक्त सत्र न्यायालय में चुनौती दी थी। अदालत ने सभी साक्ष्यों के अवलोकन के बाद पाया कि चेक विधिक देनदारी के निपटारे के लिए ही जारी किया गया था। अदालत ने निचली अदालत के फैसले को सही ठहराते हुए अपील को खारिज कर दिया।