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Kangra News: बिजली के बिलों में मिल्क और फ्यूल सेस के खिलाफ सीसीपीए में शिकायत
Thu, 02 Jul 2026 07:04 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Thu, 02 Jul 2026 07:04 AM IST
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ज्वालामुखी (कांगड़ा)। प्रदेश में बिजली बिलों के जरिए वसूले जा रहे मिल्क सेस (दूध उपकर) और फ्यूल सेस (ईंधन उपकर) के खिलाफ कानूनी लड़ाई शुरू हो गई है। ज्वालामुखी के उपभोक्ता अधिकार कार्यकर्ता अभिषेक पाधा ने इन दोनों सेस की वैधता को चुनौती देते हुए नई दिल्ली स्थित केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) के मुख्य आयुक्त के समक्ष औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है।
शिकायत में हिमाचल प्रदेश सरकार और विद्युत बोर्ड की ओर से की जा रही इस वसूली को उपभोक्ता अधिकारों के विपरीत बताया है। शिकायतकर्ता का तर्क है कि बिजली उपभोक्ता और विद्युत बोर्ड के बीच अनुबंध केवल बिजली खपत, फिक्स्ड चार्ज और नियामक शुल्कों तक सीमित होता है। सरकार की अन्य योजनाओं के लिए अतिरिक्त सेस जोड़ना कानूनन गलत है।
आरोप है कि यदि कोई उपभोक्ता केवल वास्तविक बिजली बिल जमा करना चाहे और सेस न दे, तो कनेक्शन काटने की चेतावनी देकर दबाव बनाया जाता है। शिकायत में केंद्र सरकार की डार्क पैटर्न प्रिवेंशन गाइडलाइंस-2023 का हवाला देते हुए मांग की गई है कि बिजली बिलों से इन दोनों सेस को तत्काल हटाया जाए।
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साथ ही, अब तक वसूली गई राशि की स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच कराकर इसे उपभोक्ताओं के बिलों में समायोजित या वापस किया जाए। साथ ही अंतरिम राहत के रूप में प्राधिकरण से अनुरोध किया गया है कि मामले का अंतिम निर्णय आने तक सेस का भुगतान न करने के आधार पर किसी भी उपभोक्ता का बिजली कनेक्शन न काटा जाए।
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शिकायत में हिमाचल प्रदेश सरकार और विद्युत बोर्ड की ओर से की जा रही इस वसूली को उपभोक्ता अधिकारों के विपरीत बताया है। शिकायतकर्ता का तर्क है कि बिजली उपभोक्ता और विद्युत बोर्ड के बीच अनुबंध केवल बिजली खपत, फिक्स्ड चार्ज और नियामक शुल्कों तक सीमित होता है। सरकार की अन्य योजनाओं के लिए अतिरिक्त सेस जोड़ना कानूनन गलत है।
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आरोप है कि यदि कोई उपभोक्ता केवल वास्तविक बिजली बिल जमा करना चाहे और सेस न दे, तो कनेक्शन काटने की चेतावनी देकर दबाव बनाया जाता है। शिकायत में केंद्र सरकार की डार्क पैटर्न प्रिवेंशन गाइडलाइंस-2023 का हवाला देते हुए मांग की गई है कि बिजली बिलों से इन दोनों सेस को तत्काल हटाया जाए।
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साथ ही, अब तक वसूली गई राशि की स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच कराकर इसे उपभोक्ताओं के बिलों में समायोजित या वापस किया जाए। साथ ही अंतरिम राहत के रूप में प्राधिकरण से अनुरोध किया गया है कि मामले का अंतिम निर्णय आने तक सेस का भुगतान न करने के आधार पर किसी भी उपभोक्ता का बिजली कनेक्शन न काटा जाए।