{"_id":"6a54ecac7ac6ec8a4102c1c4","slug":"convict-in-cheque-bounce-case-sentenced-to-two-months-imprisonment-kangra-news-c-95-1-kng1004-244575-2026-07-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kangra News: चेक बाउंस मामले में दोषी को दो माह की कैद, 2.50 लाख रुपये देना होगा मुआवजा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kangra News: चेक बाउंस मामले में दोषी को दो माह की कैद, 2.50 लाख रुपये देना होगा मुआवजा
Tue, 14 Jul 2026 07:17 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Tue, 14 Jul 2026 07:17 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
धर्मशाला। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (न्यायालय-1) कांगड़ा की अदालत ने 1.25 लाख रुपये के चेक बाउंस मामले में आरोपी को दोषी करार दिया है। अदालत ने दोषी को दो माह के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही चेक राशि का दोगुना यानी 2.50 लाख रुपये बतौर मुआवजा शिकायतकर्ता को अदा करने का आदेश दिया है।
मुआवजा न देने की स्थिति में दोषी को एक माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। न्यायालय के समक्ष बड़ोह तहसील के एक व्यक्ति ने वर्ष 2019 में शिकायत दायर की थी। इसके अनुसार, पालमपुर तहसील के आरोपी ने घरेलू जरूरत बताकर 1.25 लाख रुपये उधार लिए थे। बाद में भुगतान के लिए दिए गए दोनों चेक बैंक में प्रस्तुत करने पर बाउंस हो गए।
इनमें से एक चेक हस्ताक्षर न मिलने और दूसरा काट-छांट के कारण रिजेक्ट हुआ था। कानूनी नोटिस भेजने के बावजूद राशि न लौटाने पर मामला दर्ज कराया गया था। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि आरोपी चेक बाउंस होने के कारणों की वैधानिक धारणा का खंडन करने में पूरी तरह असफल रहा।
विज्ञापन
अदालत ने उसे परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के तहत दोषी ठहराया। सजा पर सुनवाई के दौरान आरोपी ने पहली बार अपराधी होने और परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य होने के आधार पर राहत मांगी थी, जिसे अदालत ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि ऐसे मामलों में ढील देने से कानून का उद्देश्य प्रभावित होगा।
विज्ञापन
मुआवजा न देने की स्थिति में दोषी को एक माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। न्यायालय के समक्ष बड़ोह तहसील के एक व्यक्ति ने वर्ष 2019 में शिकायत दायर की थी। इसके अनुसार, पालमपुर तहसील के आरोपी ने घरेलू जरूरत बताकर 1.25 लाख रुपये उधार लिए थे। बाद में भुगतान के लिए दिए गए दोनों चेक बैंक में प्रस्तुत करने पर बाउंस हो गए।
विज्ञापन
इनमें से एक चेक हस्ताक्षर न मिलने और दूसरा काट-छांट के कारण रिजेक्ट हुआ था। कानूनी नोटिस भेजने के बावजूद राशि न लौटाने पर मामला दर्ज कराया गया था। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि आरोपी चेक बाउंस होने के कारणों की वैधानिक धारणा का खंडन करने में पूरी तरह असफल रहा।
विज्ञापन
अदालत ने उसे परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के तहत दोषी ठहराया। सजा पर सुनवाई के दौरान आरोपी ने पहली बार अपराधी होने और परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य होने के आधार पर राहत मांगी थी, जिसे अदालत ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि ऐसे मामलों में ढील देने से कानून का उद्देश्य प्रभावित होगा।