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मिशन पूरा... काम अधूरा : सात बार डेडलाइन बढ़ी, स्मार्ट नहीं बन पाया धर्मशाला
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धर्मशाला में स्मार्ट सिटी के फुटबाल मैदान का आधा अधूरा हुआ काम। अमर उजाला
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धर्मशाला। बड़े-बड़े दावों और करोड़ों रुपये के निवेश के बावजूद धर्मशाला को पूरी तरह स्मार्ट शहर बनाने का सपना अधूरा रह गया है। वर्ष 2016 में शुरू हुआ स्मार्ट सिटी मिशन 30 जून 2026 को औपचारिक रूप से समाप्त हो गया, लेकिन शहर की तीन अहम परियोजनाएं अब भी पूरी नहीं हो सकी हैं। इन कार्यों को पूरा करने के लिए करीब सात बार समयसीमा (डेडलाइन) बढ़ाई गई, लेकिन तय लक्ष्य हासिल नहीं हो सका।
धर्मशाला स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत शहर में कुल 80 विकास कार्य स्वीकृत किए गए थे। इनमें से अधिकांश तो पूरे हो चुके हैं, लेकिन स्मार्ट पार्किंग, अंतरराष्ट्रीय स्तर का फुटबाल प्रशिक्षण मैदान और एक स्मार्ट रोड का काम अब भी अधर में लटका हुआ है। ऐसे में इन परियोजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी स्थानीय जनता को इनका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
धरातल पर जो कार्य पूरे किए गए हैं, उनकी गुणवत्ता पर भी सवाल उठ रहे हैं। शहर में करोड़ों की लागत से स्थापित किए भूमिगत कूड़ेदान कबाड़ में बदल गए हैं। आधुनिक स्मार्ट रेन शेल्टर महज टीन के डिब्बे बनकर रह गए हैं, जबकि स्ट्रीट वेंडिंग जोन और फूलों के बगीचे सिर्फ घोषणाओं तक ही सिमट गए। इसके अलावा नगर निगम में शामिल किए गए मर्ज एरिया के लोग 10 साल बाद भी सीवरेज जैसी मूल सुविधा से नहीं जुड़ सके हैं। 10 साल बाद भी स्कूल शिक्षा बोर्ड कार्यालय से लेकर धर्मशाला बस अड्डा तक मुख्य मार्ग में बिजली व संचार तारों का जंजाल नहीं हटाया जा सका है। कुल मिलाकर करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी शहर स्मार्ट नहीं बन सका।
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इंजीनियरों और कर्मचारियों की सेवाएं भी समाप्त
सूत्रों के मुताबिक वर्ष 2016 में तैयार की गई मूल प्लानिंग के अनुसार कई महत्वपूर्ण कार्य धरातल पर उतर ही नहीं पाए। शहर को सुंदर और सुगम बनाने की बजाय बजट को अन्य विभागों के कामों पर खर्च कर दिया गया। करोड़ों रुपये लगाने के बाद आज भी स्मार्ट सिटी के खाते में कोई आय नहीं आ रही है। मिशन की अवधि समाप्त होने के साथ ही स्मार्ट सिटी लिमिटेड में तैनात कई इंजीनियरों और कर्मचारियों की सेवाएं भी अब समाप्त हो गई हैं।
30 जून को स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट की अवधि समाप्त हो गई है। जो तीन प्रोजेक्ट अधूरे रह गए हैं, उनका कार्य आगे भी इसी तरह चलता रहेगा। परियोजना समाप्त होने के कारण अब कई अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त हो जाएंगी। स्मार्ट सिटी के कार्य समय पर पूरे न हो पाने के पीछे कई प्रशासनिक व तकनीकी कारण रहे हैं। -जफर इकबाल, सीईओ, स्मार्ट सिटी धर्मशाला
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धर्मशाला स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत शहर में कुल 80 विकास कार्य स्वीकृत किए गए थे। इनमें से अधिकांश तो पूरे हो चुके हैं, लेकिन स्मार्ट पार्किंग, अंतरराष्ट्रीय स्तर का फुटबाल प्रशिक्षण मैदान और एक स्मार्ट रोड का काम अब भी अधर में लटका हुआ है। ऐसे में इन परियोजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी स्थानीय जनता को इनका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
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धरातल पर जो कार्य पूरे किए गए हैं, उनकी गुणवत्ता पर भी सवाल उठ रहे हैं। शहर में करोड़ों की लागत से स्थापित किए भूमिगत कूड़ेदान कबाड़ में बदल गए हैं। आधुनिक स्मार्ट रेन शेल्टर महज टीन के डिब्बे बनकर रह गए हैं, जबकि स्ट्रीट वेंडिंग जोन और फूलों के बगीचे सिर्फ घोषणाओं तक ही सिमट गए। इसके अलावा नगर निगम में शामिल किए गए मर्ज एरिया के लोग 10 साल बाद भी सीवरेज जैसी मूल सुविधा से नहीं जुड़ सके हैं। 10 साल बाद भी स्कूल शिक्षा बोर्ड कार्यालय से लेकर धर्मशाला बस अड्डा तक मुख्य मार्ग में बिजली व संचार तारों का जंजाल नहीं हटाया जा सका है। कुल मिलाकर करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी शहर स्मार्ट नहीं बन सका।
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इंजीनियरों और कर्मचारियों की सेवाएं भी समाप्त
सूत्रों के मुताबिक वर्ष 2016 में तैयार की गई मूल प्लानिंग के अनुसार कई महत्वपूर्ण कार्य धरातल पर उतर ही नहीं पाए। शहर को सुंदर और सुगम बनाने की बजाय बजट को अन्य विभागों के कामों पर खर्च कर दिया गया। करोड़ों रुपये लगाने के बाद आज भी स्मार्ट सिटी के खाते में कोई आय नहीं आ रही है। मिशन की अवधि समाप्त होने के साथ ही स्मार्ट सिटी लिमिटेड में तैनात कई इंजीनियरों और कर्मचारियों की सेवाएं भी अब समाप्त हो गई हैं।
30 जून को स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट की अवधि समाप्त हो गई है। जो तीन प्रोजेक्ट अधूरे रह गए हैं, उनका कार्य आगे भी इसी तरह चलता रहेगा। परियोजना समाप्त होने के कारण अब कई अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त हो जाएंगी। स्मार्ट सिटी के कार्य समय पर पूरे न हो पाने के पीछे कई प्रशासनिक व तकनीकी कारण रहे हैं। -जफर इकबाल, सीईओ, स्मार्ट सिटी धर्मशाला