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Kangra News: कैंसर से जंग जीते दीपक के लोकतांत्रिक अधिकार छिने
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Wed, 13 May 2026 07:28 AM IST
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परागपुर (कांगड़ा)। उपमंडल के तहत अपर परागपुर के दीपक पटियाल के लिए इस बार का पंचायत चुनाव गहरा जख्म दे गया है। कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी को मात देकर सामान्य जीवन में लौटे दीपक का न केवल उपप्रधान बनने का सपना चकनाचूर हो गया, बल्कि उनके परिवार के नौ सदस्यों का लोकतांत्रिक अधिकार भी छीन लिया गया है।
दीपक का कहना है कि बीमारी का दर्द तो दवाइयों से कम हो गया था, लेकिन बिना बताए वोट काटे जाने का दर्द उन्हें भीतर तक तोड़ रहा है। पेशे से सब्जी विक्रेता दीपक पटियाल वर्ष 2016 से कैंसर से जूझ रहे थे। स्वस्थ होने के बाद वे इस बार पंचायत चुनाव में उपप्रधान पद के लिए ताल ठोकने की तैयारी कर रहे थे।
उन्होंने बताया कि वे वर्ष 2005 से लगातार हर चुनाव में मतदान करते आ रहे हैं, लेकिन जब नामांकन की बारी आई तो पता चला कि परिवार के किसी भी सदस्य का नाम मतदाता सूची में नहीं है। दीपक ने आरोप लगाया कि पंचायत सचिव, बीएलओ और बीडीओ कार्यालय के चक्कर काटने के बावजूद उन्हें कोई स्पष्ट संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
अधिकारियों ने झाड़ा पल्ला, बोले- समय निकल चुका है
मामले को लेकर पंचायत सचिव वंदना का कहना है कि चौकीदार न होने के कारण वार्ड पंचों को सूची जांचने के निर्देश दिए गए थे। वहीं, खंड विकास अधिकारी (बीएलओ) परागपुर मीना शर्मा ने कहा कि निर्धारित समय सीमा के भीतर पंचायत के माध्यम से सूचना दी गई थी। जिन लोगों के नाम कटे थे, उन्हें स्वयं आकर सूची जांचनी चाहिए थी। अब सुधार की प्रक्रिया का समय निकल चुका है। दूसरी ओर, दीपक का कहना है कि यदि उन्हें समय रहते सूचित किया जाता तो वे अपना नाम बहाल करवा सकते थे।
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दीपक का कहना है कि बीमारी का दर्द तो दवाइयों से कम हो गया था, लेकिन बिना बताए वोट काटे जाने का दर्द उन्हें भीतर तक तोड़ रहा है। पेशे से सब्जी विक्रेता दीपक पटियाल वर्ष 2016 से कैंसर से जूझ रहे थे। स्वस्थ होने के बाद वे इस बार पंचायत चुनाव में उपप्रधान पद के लिए ताल ठोकने की तैयारी कर रहे थे।
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उन्होंने बताया कि वे वर्ष 2005 से लगातार हर चुनाव में मतदान करते आ रहे हैं, लेकिन जब नामांकन की बारी आई तो पता चला कि परिवार के किसी भी सदस्य का नाम मतदाता सूची में नहीं है। दीपक ने आरोप लगाया कि पंचायत सचिव, बीएलओ और बीडीओ कार्यालय के चक्कर काटने के बावजूद उन्हें कोई स्पष्ट संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
अधिकारियों ने झाड़ा पल्ला, बोले- समय निकल चुका है
मामले को लेकर पंचायत सचिव वंदना का कहना है कि चौकीदार न होने के कारण वार्ड पंचों को सूची जांचने के निर्देश दिए गए थे। वहीं, खंड विकास अधिकारी (बीएलओ) परागपुर मीना शर्मा ने कहा कि निर्धारित समय सीमा के भीतर पंचायत के माध्यम से सूचना दी गई थी। जिन लोगों के नाम कटे थे, उन्हें स्वयं आकर सूची जांचनी चाहिए थी। अब सुधार की प्रक्रिया का समय निकल चुका है। दूसरी ओर, दीपक का कहना है कि यदि उन्हें समय रहते सूचित किया जाता तो वे अपना नाम बहाल करवा सकते थे।