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Kangra News: फॉल आर्मी वर्म के बढ़ते प्रकोप पर विभाग अलर्ट, खेतों में पहुंचे विशेषज्ञ

Wed, 08 Jul 2026 01:38 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Wed, 08 Jul 2026 01:38 AM IST
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Department on alert over rising Fall Armyworm infestation; experts visit fields.
विकास खंड रैत में मक्की की फसल का निरीक्षण करती राज्य जैव नियंत्रण प्रयोगशाला पालमपुर और कृषि व
धर्मशाला। मक्की की फसल को भारी नुकसान पहुंचाने वाले फॉल आर्मी वर्म के बढ़ते खतरे को देखते हुए कृषि विभाग ने जिले में निगरानी और जागरूकता अभियान तेज कर दिया है।
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इसी क्रम में राज्य जैव नियंत्रण प्रयोगशाला पालमपुर और कृषि विभाग की संयुक्त टीम ने विकास खंड रैत के बागडू, नौशेरा, परेई और बजरेहड़ गांवों का दौरा कर खेतों का निरीक्षण किया। टीम ने किसानों को वैज्ञानिक तरीके से कीट प्रबंधन और फॉल आर्मी वर्म की पहचान संबंधी जानकारी भी दी।
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प्रधान वैज्ञानिक डॉ. केएस वर्मा, मक्का प्रजनक डॉ. उत्तम चंद, विषयवाद विशेषज्ञ डॉ. अंजू ठाकुर और डॉ. रवि डोगरा सहित विशेषज्ञों की टीम ने मक्की की फसल में फॉल आर्मी वर्म की स्थिति का आकलन किया।
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किसानों को बताया गया कि इस कीट की शुरुआती पहचान पत्तियों पर सुई जैसे छोटे छेद और बाद में बनने वाले बड़े अनियमित सुराखों से होती है। इसकी सुंडियां पत्ती गोभ के भीतर रहकर फसल को तेजी से नुकसान पहुंचाती हैं।
कोराजन के छिड़काव की सलाह
विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी कि यदि खेत में कीट का प्रकोप 10 प्रतिशत से कम हो तो नीम आधारित कीटनाशी का प्रयोग करें। अधिक प्रकोप होने पर एमामेक्टिन बेंजोएट 5 एसजी या क्लोरएन्ट्रानिलीप्रोल (कोराजन) का विभाग की अनुशंसित मात्रा में छिड़काव करें। साथ ही, कीटग्रस्त पौधों को नष्ट करने और दवा का छिड़काव पत्ती गोभ की ओर करने की सलाह दी गई।

रासायनिक कीटनाशकों के प्रयोग से बचने की सलाह
विशेषज्ञों ने फूल आने के बाद रासायनिक कीटनाशकों के प्रयोग से बचने और जैविक विकल्प अपनाने पर भी जोर दिया। साथ ही किसानों से फसल चक्र अपनाने, गहरी जुताई करने, फसल अवशेष नष्ट करने और नियमित रूप से खेतों का निरीक्षण करने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि समय रहते कीट पर नियंत्रण के लिए इस तरह के जागरूकता अभियान आगे भी गांव-गांव चलाए जाएंगे, ताकि किसानों की मक्की की फसल को सुरक्षित रखा जा सके।
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