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Kangra News: खराब वाइपरों के साथ दौड़ रहीं एचआरटीसी की बसें
Thu, 02 Jul 2026 01:58 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Thu, 02 Jul 2026 01:58 AM IST
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धर्मशाला बस अड्डा में खड़ी बस, जिसका शीशा टूटने से काम नहीं करता वाइपर। -संवाद
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धर्मशाला। बरसात के मौसम में सुरक्षित सफर के लिए बसों के विंडशील्ड वाइपर सबसे अहम सुरक्षा उपकरण माने जाते हैं। हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) की कई बसें खराब या अधूरे वाइपरों के सहारे दौड़ रही हैं। इससे दुर्घटना का अंदेशा बना रहता है।
तेज बारिश के दौरान चालकों को हर दो-तीन मिनट के बाद हाथ या कपड़े से बस का विंडशील्ड साफ करना पड़ता है। अमर उजाला के लिए संवाद न्यूज एजेंसी के संवाददाता ने बुधवार को धर्मशाला बस अड्डे और निगम की कर्मशाला (वर्कशॉप) के बाहर खड़ी बसों की जांच की। पाया कि कई बसों में वाइपर ही गायब था। कई बसों में वाइपर खराब थे। कुछ बसों के विंडशील्ड क्षतिग्रस्त होने के कारण वाइपर पूरी तरह काम नहीं कर रहे थे। रिकांगपिओ-धर्मशाला जैसे लंबे रूट पर चलने वाली बस में विंडशील्ड क्षतिग्रस्त होने से वाइपर निष्क्रिय मिला।
धर्मशाला-पठानकोट सहित कई स्थानीय रूटों की बसों में भी यही स्थिति देखने को मिली। चालकों का कहना है कि बारिश के दौरान दोनों वाइपरों का सही हालत में होना जरूरी है लेकिन अधिकांश बसों में एक ही वाइपर लगा है।
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यदि वही खराब हो जाए, तो उन्हें बस रोककर या चलते वाहन में ही हाथ से शीशा साफ करना पड़ता है। इससे एकाग्रता प्रभावित होने के साथ यात्रियों की सुरक्षा भी दांव पर लग जाती है।
बरसात में पहाड़ी सड़कों पर दृश्यता कम रहती है। ऐसे में वाइपर खराब होने से जोखिम बढ़ जाता है। इस समस्या से कई बार अधिकारियों को अवगत कराया गया लेकिन अभी तक व्यापक स्तर पर समाधान नहीं हो पाया है। संवाद
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तेज बारिश के दौरान चालकों को हर दो-तीन मिनट के बाद हाथ या कपड़े से बस का विंडशील्ड साफ करना पड़ता है। अमर उजाला के लिए संवाद न्यूज एजेंसी के संवाददाता ने बुधवार को धर्मशाला बस अड्डे और निगम की कर्मशाला (वर्कशॉप) के बाहर खड़ी बसों की जांच की। पाया कि कई बसों में वाइपर ही गायब था। कई बसों में वाइपर खराब थे। कुछ बसों के विंडशील्ड क्षतिग्रस्त होने के कारण वाइपर पूरी तरह काम नहीं कर रहे थे। रिकांगपिओ-धर्मशाला जैसे लंबे रूट पर चलने वाली बस में विंडशील्ड क्षतिग्रस्त होने से वाइपर निष्क्रिय मिला।
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धर्मशाला-पठानकोट सहित कई स्थानीय रूटों की बसों में भी यही स्थिति देखने को मिली। चालकों का कहना है कि बारिश के दौरान दोनों वाइपरों का सही हालत में होना जरूरी है लेकिन अधिकांश बसों में एक ही वाइपर लगा है।
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यदि वही खराब हो जाए, तो उन्हें बस रोककर या चलते वाहन में ही हाथ से शीशा साफ करना पड़ता है। इससे एकाग्रता प्रभावित होने के साथ यात्रियों की सुरक्षा भी दांव पर लग जाती है।
बरसात में पहाड़ी सड़कों पर दृश्यता कम रहती है। ऐसे में वाइपर खराब होने से जोखिम बढ़ जाता है। इस समस्या से कई बार अधिकारियों को अवगत कराया गया लेकिन अभी तक व्यापक स्तर पर समाधान नहीं हो पाया है। संवाद

धर्मशाला बस अड्डा में खड़ी बस, जिसका शीशा टूटने से काम नहीं करता वाइपर। -संवाद

धर्मशाला बस अड्डा में खड़ी बस, जिसका शीशा टूटने से काम नहीं करता वाइपर। -संवाद

धर्मशाला बस अड्डा में खड़ी बस, जिसका शीशा टूटने से काम नहीं करता वाइपर। -संवाद