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एक माह में ट्रेन नहीं चली तो होगा आंदोलन : समिति
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धर्मशाला में डीसी का ज्ञापन सौंपते कांगड़ा रेल संघर्ष समिति के पदाधिकारी। -अमर उजाला
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धर्मशाला। पठानकोट-जोगिंद्रनगर रेल मार्ग पर ट्रेनों की बहाली में हो रही देरी को लेकर कांगड़ा घाटी रेलवे संघर्ष समिति ने केंद्र और प्रदेश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बुधवार को धर्मशाला में पत्रकारों से बातचीत करते हुए समिति ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। समिति ने चेतावनी दी है कि एक महीने में ट्रेनों की आवाजाही शुरू नहीं हुई तो वे सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करेंगे।
समिति के पदाधिकारियों में अध्यक्ष पीसी विश्वकर्मा, कल्याण भंडारी, सौरभ कौंडल, अभिनव शर्मा और संजीव कुमार ने कहा कि कांगड़ा की लाइफलाइन कही जाने वाली यह रेल सेवा पिछले चार वर्षों से ठप पड़ी है। उन्होंने कहा कि सरकार जनता को ब्रॉडगेज लाइन के सब्जबाग तो दिखाती है, लेकिन हकीकत में मौजूदा नैरोगेज को सुचारू रखने में भी विफल रही है।
उन्होंने कहा कि ट्रेन बंद होने से जिले के पर्यटन कारोबार को भारी चपत लग रही है। समिति ने पर्यटन विकास बोर्ड के अध्यक्ष और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर भी गहरा रोष व्यक्त किया। संघर्ष समिति ने रेल राज्य मंत्री रवनीत बिट्टू के रुख पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि वे पड़ोसी राज्य पंजाब से संबंध रखते हैं, फिर भी हिमाचल की इस समस्या पर मौन हैं।
पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो समिति रेल मंत्री के चुनाव क्षेत्र (लुधियाना) में जाकर उनके खिलाफ प्रचार करेगी और उन्हें हराने के लिए मुहिम चलाएगी। समिति ने कहा कि यह केवल रेल सेवा का मुद्दा नहीं है, बल्कि कांगड़ा की अर्थव्यवस्था और गौरव का सवाल है। सरकार की इच्छाशक्ति की कमी के कारण जनता और कारोबारी पिछले 48 महीनों से उपेक्षा झेल रहे हैं, जिसे अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इससे पूर्व समिति में उपायुक्त को ट्रेनों की बहाली को लेकर मांग पत्र भी सौंपा।
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समिति के पदाधिकारियों में अध्यक्ष पीसी विश्वकर्मा, कल्याण भंडारी, सौरभ कौंडल, अभिनव शर्मा और संजीव कुमार ने कहा कि कांगड़ा की लाइफलाइन कही जाने वाली यह रेल सेवा पिछले चार वर्षों से ठप पड़ी है। उन्होंने कहा कि सरकार जनता को ब्रॉडगेज लाइन के सब्जबाग तो दिखाती है, लेकिन हकीकत में मौजूदा नैरोगेज को सुचारू रखने में भी विफल रही है।
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उन्होंने कहा कि ट्रेन बंद होने से जिले के पर्यटन कारोबार को भारी चपत लग रही है। समिति ने पर्यटन विकास बोर्ड के अध्यक्ष और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर भी गहरा रोष व्यक्त किया। संघर्ष समिति ने रेल राज्य मंत्री रवनीत बिट्टू के रुख पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि वे पड़ोसी राज्य पंजाब से संबंध रखते हैं, फिर भी हिमाचल की इस समस्या पर मौन हैं।
पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो समिति रेल मंत्री के चुनाव क्षेत्र (लुधियाना) में जाकर उनके खिलाफ प्रचार करेगी और उन्हें हराने के लिए मुहिम चलाएगी। समिति ने कहा कि यह केवल रेल सेवा का मुद्दा नहीं है, बल्कि कांगड़ा की अर्थव्यवस्था और गौरव का सवाल है। सरकार की इच्छाशक्ति की कमी के कारण जनता और कारोबारी पिछले 48 महीनों से उपेक्षा झेल रहे हैं, जिसे अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इससे पूर्व समिति में उपायुक्त को ट्रेनों की बहाली को लेकर मांग पत्र भी सौंपा।

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