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Kangra News: मलां में अधिकारी को जमीन देने का मामला गरमाया
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पालमपुर (कांगड़ा)। कृषि विवि पालमपुर की 111 हेक्टेयर जमीन का मामला अभी सुप्रीमकोर्ट के दम पर शांत हुआ ही था कि अब विवि के राइस और व्हीट रिसर्च स्टेशन मलां में जमीन देने का मामला गरमा गया है। विवि की इस जमीन को पुलिस के आला अधिकारी को देने की कवायद शुरू हो गई है।
पुलिस अधिकारी विवि की इस जमीन को अपनी जमीन के रास्ते के लिए लेना चाहता है। अब इसका पता चलते ही कृषि विवि के शिक्षक संघ (हपौटा) ने अंदरखाते इसका विरोध शुरू कर दिया है। पुलिस अधिकारी को चार या पांच कनाल जमीन देेने की तैयारी चल रही है। यह जमीन विश्वविद्यालय की कीमती संपत्तियों का हिस्सा है और इसे कृषि अनुसंधान, शिक्षा, प्रदर्शन और अन्य संबंधित गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किए जाने का इरादा है। कृषि मंत्री चंद्र कुमार चौधरी ने अनुसंधान केंद्र मलां का चार दिसंबर 2025 को दौरा किया था। इस दाैरान उन्होंने किसी अधिकारी को जमीन देने से साफ मना कर दिया था।
यह जमीन नेशनल हाईवे के साथ लगती है। पूर्व कुलपति ने इस भूमि को सड़क निर्माण के उद्देश्य से स्थानांतरित करने के मुद्दे को देखते हुए एक समिति का गठन किया था। इस पर समिति ने भी अपनी रिपोर्ट में मना किया था। बावजूद इसके विवि की इस जमीन को अधिकारी को देने की पूरी मुहिम करीब सिरे चढ़ने लगी है।
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हपौटा के महासचिव जनार्दन सिंह ने कहा कि जमीन दी जाती है तो यहां पर विवि के शोध के साथ ही धान बीज पर भी फर्क पड़ेगा। अब यह जमीन दी जाती है तो सरकार पर एक बार फिर विवि की जमीन बेचने के आरोप लगना लाजिमी हैं।
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पुलिस अधिकारी विवि की इस जमीन को अपनी जमीन के रास्ते के लिए लेना चाहता है। अब इसका पता चलते ही कृषि विवि के शिक्षक संघ (हपौटा) ने अंदरखाते इसका विरोध शुरू कर दिया है। पुलिस अधिकारी को चार या पांच कनाल जमीन देेने की तैयारी चल रही है। यह जमीन विश्वविद्यालय की कीमती संपत्तियों का हिस्सा है और इसे कृषि अनुसंधान, शिक्षा, प्रदर्शन और अन्य संबंधित गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किए जाने का इरादा है। कृषि मंत्री चंद्र कुमार चौधरी ने अनुसंधान केंद्र मलां का चार दिसंबर 2025 को दौरा किया था। इस दाैरान उन्होंने किसी अधिकारी को जमीन देने से साफ मना कर दिया था।
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यह जमीन नेशनल हाईवे के साथ लगती है। पूर्व कुलपति ने इस भूमि को सड़क निर्माण के उद्देश्य से स्थानांतरित करने के मुद्दे को देखते हुए एक समिति का गठन किया था। इस पर समिति ने भी अपनी रिपोर्ट में मना किया था। बावजूद इसके विवि की इस जमीन को अधिकारी को देने की पूरी मुहिम करीब सिरे चढ़ने लगी है।
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हपौटा के महासचिव जनार्दन सिंह ने कहा कि जमीन दी जाती है तो यहां पर विवि के शोध के साथ ही धान बीज पर भी फर्क पड़ेगा। अब यह जमीन दी जाती है तो सरकार पर एक बार फिर विवि की जमीन बेचने के आरोप लगना लाजिमी हैं।