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Kangra News: लैपटॉप खराब, कंपनी को 9% ब्याज के साथ कीमत लौटाने का आदेश
Sun, 05 Jul 2026 04:50 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Sun, 05 Jul 2026 04:50 AM IST
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धर्मशाला। वारंटी अवधि के दौरान बार-बार खराब होने वाले लैपटॉप के मामले में जिला उपभोक्ता आयोग ने उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाया है।
आयोग ने कंपनी को लैपटॉप की 49 हजार रुपये की कीमत शिकायत दायर करने की तिथि से भुगतान तक नौ फीसदी वार्षिक ब्याज सहित लौटाने के आदेश दिए हैं। साथ ही मानसिक प्रताड़ना के लिए पांच हजार रुपये मुआवजा और पांच हजार रुपये मुकद्दमा खर्च भी देने के निर्देश दिए हैं।
जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष हेमांशु मिश्रा, सदस्य नारायण ठाकुर और आरती सूद की अदालत ने यह फैसला सुनाया है।आयोग के समक्ष तहसील पालमपुर के जिया निवासी विवेक भट्ट ने अपनी शिकायत में बताया कि 8 सितंबर 2024 को 49 हजार रुपये में एचपी का लैपटॉप खरीदा था।
कंपनी ने उत्पाद पर एक वर्ष की वारंटी दी थी। खरीद के करीब पांच महीने बाद ही लैपटॉप में स्क्रीन फ्लिकरिंग और बैटरी तेजी से खत्म होने जैसी समस्याएं आने लगीं। शिकायत के बाद बैटरी बदली गई, लेकिन खराबी दूर नहीं हुई। इसके बाद उपभोक्ता ने कई बार ऑनलाइन शिकायत दर्ज करवाई। इस दौरान लैपटॉप में साउंड सिस्टम में खराबी, ब्राइटनेस कंट्रोल काम नहीं करना, सिस्टम का बार-बार हैंग और रीस्टार्ट होना समेत अन्य तकनीकी खामियां भी सामने आईं।
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सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि कंपनी की ओर से कई बार सर्विस और मरम्मत किए जाने के बावजूद लैपटॉप की समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो सका। अंतिम सर्विस विजिट के दौरान तकनीशियन ने भी इसे निर्माण संबंधी दोष (मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट) का मामला बताया था।
आयोग ने अपने आदेश में कहा कि वारंटी अवधि के भीतर किसी उत्पाद में लगातार खराबी आना और बार-बार सर्विस के बावजूद उसका ठीक न होना सेवा में कमी और अनुचित व्यापारिक व्यवहार की श्रेणी में आता है। इसी आधार पर आयोग ने शिकायत स्वीकार करते हुए उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाया।
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आयोग ने कंपनी को लैपटॉप की 49 हजार रुपये की कीमत शिकायत दायर करने की तिथि से भुगतान तक नौ फीसदी वार्षिक ब्याज सहित लौटाने के आदेश दिए हैं। साथ ही मानसिक प्रताड़ना के लिए पांच हजार रुपये मुआवजा और पांच हजार रुपये मुकद्दमा खर्च भी देने के निर्देश दिए हैं।
जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष हेमांशु मिश्रा, सदस्य नारायण ठाकुर और आरती सूद की अदालत ने यह फैसला सुनाया है।आयोग के समक्ष तहसील पालमपुर के जिया निवासी विवेक भट्ट ने अपनी शिकायत में बताया कि 8 सितंबर 2024 को 49 हजार रुपये में एचपी का लैपटॉप खरीदा था।
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कंपनी ने उत्पाद पर एक वर्ष की वारंटी दी थी। खरीद के करीब पांच महीने बाद ही लैपटॉप में स्क्रीन फ्लिकरिंग और बैटरी तेजी से खत्म होने जैसी समस्याएं आने लगीं। शिकायत के बाद बैटरी बदली गई, लेकिन खराबी दूर नहीं हुई। इसके बाद उपभोक्ता ने कई बार ऑनलाइन शिकायत दर्ज करवाई। इस दौरान लैपटॉप में साउंड सिस्टम में खराबी, ब्राइटनेस कंट्रोल काम नहीं करना, सिस्टम का बार-बार हैंग और रीस्टार्ट होना समेत अन्य तकनीकी खामियां भी सामने आईं।
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सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि कंपनी की ओर से कई बार सर्विस और मरम्मत किए जाने के बावजूद लैपटॉप की समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो सका। अंतिम सर्विस विजिट के दौरान तकनीशियन ने भी इसे निर्माण संबंधी दोष (मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट) का मामला बताया था।
आयोग ने अपने आदेश में कहा कि वारंटी अवधि के भीतर किसी उत्पाद में लगातार खराबी आना और बार-बार सर्विस के बावजूद उसका ठीक न होना सेवा में कमी और अनुचित व्यापारिक व्यवहार की श्रेणी में आता है। इसी आधार पर आयोग ने शिकायत स्वीकार करते हुए उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाया।