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इलाहाबाद हाईकोर्ट का सुझाव: धार्मिक स्थल पर भीड़ नियंत्रण के वैज्ञानिक तरीके खोजे सरकार, इसके लिए शोध की दरकार
Sun, 02 Aug 2026 06:09 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 02 Aug 2026 06:09 AM IST
सार
कोर्ट ने कहा कि धार्मिक भीड़ की मनोविज्ञान और गतिविधियां राजनीतिक रैली या खेल आयोजनों की भीड़ से पूरी तरह अलग होती है, इसलिए इनके लिए अलग वैज्ञानिक नीति आवश्यक है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि तीर्थ स्थलों, धार्मिक आयोजनों में होने वाली भगदड़ केवल प्रशासन की भीड़ प्रबंधन की विफलता का ही नहीं है बल्कि भीड़ के मनोविज्ञान के प्रति अज्ञानता का परिणाम है। इससे बचने के लिए सरकार को कानपुर, रुड़की की आईआईटी व अन्य विश्वविद्यालयों की मदद से वैज्ञानिक शोध करवाने और पाठ्यक्रम चलाने चाहिए।
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कोर्ट ने कहा, जब तक वैज्ञानिक अध्ययन और शोध नहीं होगा तब तक पुलिस बल बढ़ाने, बैरिकेड लगाने या ट्रैफिक डायवर्जन से ऐसी त्रासदियों को नहीं रोका जा सकेगा। यह सुझाव न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकल पीठ ने मथुरा के स्वामी शिव स्वरूपानंद जी महाराज की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया है।
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इससे पहले कोर्ट ने मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण व प्रशासन से भीड़ प्रबंधन को लेकर हलफनामा तलब किया था। हलफनामे पर दी गई जानकारी से असंतुष्ट कोर्ट ने सरकार को विस्तृत सुझाव दिए। साथ ही अपने आदेश की प्रति अनुपालन व जानकारी के लिए मुख्य सचिव, उच्च शिक्षा विभाग, यूजीसी और भारत सरकार के उच्च शिक्षा सचिव को भी भेजने का निर्देश दिया है।
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कोर्ट ने कहा कि मथुरा, अयोध्या, वाराणसी और चित्रकूट जैसे हजारों वर्षों की धार्मिक विरासत वाले शहरों के लिए केवल दस साल का मास्टर प्लान बनाना गंभीर प्रशासनिक विफलता है। धार्मिक भीड़ की मनोविज्ञान और गतिविधियां राजनीतिक रैली या खेल आयोजनों की भीड़ से पूरी तरह अलग होती है, इसलिए इनके लिए अलग वैज्ञानिक नीति आवश्यक है।