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High Court : हर्ष फायरिंग के लिए नहीं है लाइसेंसी हथियार, एक एक कारतूस का देना होगा हिसाब
Sat, 01 Aug 2026 04:32 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sat, 01 Aug 2026 04:32 PM IST
सार
High Court News: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि लाइसेंसी हथियार का उपयोग हर्ष फायरिंग, शादी या धार्मिक आयोजनों में नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि हर लाइसेंसधारी को खरीदे और इस्तेमाल किए गए प्रत्येक कारतूस का पूरा हिसाब रखना होगा। रिकॉर्ड नहीं होने पर शस्त्र लाइसेंस निरस्त किया जा सकता है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक।
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विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि लाइसेंसी हथियार का इस्तेमाल शादी, धार्मिक आयोजनों या किसी भी प्रकार की हर्ष फायरिंग के लिए नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रत्येक शस्त्र लाइसेंसधारी के लिए खरीदे गए और इस्तेमाल किए गए कारतूसों का पूरा रिकॉर्ड रखना अनिवार्य है। ऐसा नहीं करने पर शस्त्र लाइसेंस निरस्त किया जा सकता है।
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न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की एकलपीठ ने अखिलेश कुमार की याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। मामले में वर्ष 2019 की जांच के दौरान पता चला कि याचिकाकर्ता ने 857 कारतूस खरीदे थे, लेकिन केवल 57 जिंदा कारतूस और 33 खाली खोखे ही प्रस्तुत कर सका। शेष 757 कारतूसों के बारे में उसने दावा किया कि उनका उपयोग टेस्टिंग, शादी, छठ पूजा और दुर्गा पूजा जैसे आयोजनों में हुआ, लेकिन इसका कोई रिकॉर्ड नहीं दिखा सका।
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हाईकोर्ट ने कहा कि शस्त्र लाइसेंस कोई अधिकार नहीं, बल्कि शर्तों के अधीन दी गई विशेष सुविधा है। यदि लाइसेंसधारी कारतूसों का हिसाब नहीं रखता या हर्ष फायरिंग में हथियार का इस्तेमाल करता है, तो यह लाइसेंस की शर्तों का गंभीर उल्लंघन है। कोर्ट ने इसी आधार पर लाइसेंस निरस्त करने के आदेश को सही ठहराते हुए याचिका खारिज कर दी।
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