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टारगेट किलिंग: निशाना सिर्फ प्रवासी नहीं, कश्मीर की सकारात्मक तस्वीर भी; आतंकियों का अमरनाथ यात्रा और ये मकसद
Sun, 02 Aug 2026 08:09 AM IST
Sharukh Khan
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
Published by: Sharukh Khan
Updated Sun, 02 Aug 2026 08:09 AM IST
सार
आतंकियों ने निशाना सिर्फ प्रवासी नहीं है, कश्मीर की सकारात्मक तस्वीर भी भी आतंकियों का मकसद है। अमरनाथ यात्रा, पांच अगस्त और स्वतंत्रता दिवस के बीच हमले से दहशत फैलाने की कोशिश है। रक्षा विशेषज्ञ का कहना है कि दहशत फैलाकर दुनिया में कश्मीर की विपरीत तस्वीर दिखाना आतंकियों का मकसद है।
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Kulgam Target Killing
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
आतंकियों ने कुलगाम में दो प्रवासी श्रमिकों की टारगेट किलिंग ऐसे समय में की है, जब अमरनाथ यात्रा जारी है। तीन दिन बाद पांच अगस्त को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35ए के प्रावधान हटाए जाने की सातवीं वर्षगांठ है। उसके दस दिन बाद स्वतंत्रता दिवस मनाया जाएगा।
इन तीनों अवसरों को देखते हुए पूरी घाटी में सुरक्षा का अभूतपूर्व घेरा है। ऐसे समय में टारगेट किलिंग से निशाना सिर्फ प्रवासी श्रमिक नहीं बल्कि कश्मीर की सकारात्मक और विश्वास बहाली वाली तस्वीर को प्रभावित करना भी है।
रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में घाटी में पर्यटन बढ़ा है। अमरनाथ यात्रा लगातार शांतिपूर्ण ढंग से होती रही है। सामान्य जनजीवन भी मजबूत हुआ है। ऐसे में आतंकी संगठनों का उद्देश्य केवल जानमाल का नुकसान पहुंचाना नहीं होता बल्कि ऐसे समय वारदात कर राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संदेश देने होता है कि जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद की चुनौती अभी समाप्त नहीं हुई है।
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इन तीनों अवसरों को देखते हुए पूरी घाटी में सुरक्षा का अभूतपूर्व घेरा है। ऐसे समय में टारगेट किलिंग से निशाना सिर्फ प्रवासी श्रमिक नहीं बल्कि कश्मीर की सकारात्मक और विश्वास बहाली वाली तस्वीर को प्रभावित करना भी है।
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रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में घाटी में पर्यटन बढ़ा है। अमरनाथ यात्रा लगातार शांतिपूर्ण ढंग से होती रही है। सामान्य जनजीवन भी मजबूत हुआ है। ऐसे में आतंकी संगठनों का उद्देश्य केवल जानमाल का नुकसान पहुंचाना नहीं होता बल्कि ऐसे समय वारदात कर राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संदेश देने होता है कि जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद की चुनौती अभी समाप्त नहीं हुई है।
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कुलगाम की वारदात केवल दो प्रवासी श्रमिकों की हत्या भर नहीं है बल्कि ऐसे समय में की गई कार्रवाई है जब जम्मू-कश्मीर के सुरक्षा इंतजामों, अमरनाथ यात्रा की व्यवस्था और सामान्य होते हालात पर पूरे देश और दुनिया की नजर है। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियों के सामने अब केवल आतंकियों का सफाया करना ही नहीं बल्कि उनकी उस रणनीति को भी विफल करना चुनौती है।
इसका उद्देश्य कश्मीर की सकारात्मक तस्वीर पर दहशत का साया डालना है। इसके लिए सिर्फ सख्त सुरक्षा अभियान नहीं, बल्कि मजबूत ह्यूमन इंटेलिजेंस, स्थानीय लोगों के सहयोग और सटीक खुफिया सूचनाओं का होना जरूरी है ताकि इस तरह की वारदात को होने से पहले ही रोका जा सके।
हमले की टाइमिंग बहुत कुछ बयां करती है : ब्रिगेडियर धीमान
सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर विजय सागर धीमान कहते हैं कि हमले की टाइमिंग बहुत कुछ बयां करती है। पाकिस्तान समर्थित आतंकियों ने ऐसा समय चुना, जब अमरनाथ यात्रा चल रही है। 5 अगस्त और 15 अगस्त जैसे महत्वपूर्ण अवसर सामने हैं। ऐसे समय में आतंकी वारदात का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह संदेश देने की कोशिश है कि जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद अभी भी मौजूद है।
सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर विजय सागर धीमान कहते हैं कि हमले की टाइमिंग बहुत कुछ बयां करती है। पाकिस्तान समर्थित आतंकियों ने ऐसा समय चुना, जब अमरनाथ यात्रा चल रही है। 5 अगस्त और 15 अगस्त जैसे महत्वपूर्ण अवसर सामने हैं। ऐसे समय में आतंकी वारदात का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह संदेश देने की कोशिश है कि जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद अभी भी मौजूद है।
आतंकियों के लिए सेना, पुलिस और अन्य सुरक्षा प्रतिष्ठानों जैसे हार्ड टारगेट तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। ऐसे में वे प्रवासी श्रमिकों जैसे सॉफ्ट टारगेट को चुनकर बड़ा मनोवैज्ञानिक प्रभाव पैदा करने की कोशिश में हैं। पाकिस्तान पीओके से ध्यान भटकाने के लिए इस तरह की वारदात को अंजाम देता रहा है।
लश्कर आतंकी लतीफ ने की थी कुलगाम में श्रमिकों की हत्या, आशिक को भी इसी ने मारा
कुलगाम जिले के केलम में शुक्रवार शाम छत्तीसगढ़ के दो श्रमिकों की हत्या लश्कर-ए-ताइबा के स्थानीय आतंकी कमांडर मोहम्मद लतीफ भट ने की है। लतीफ ने ही गत 22 जुलाई को अनंतनाग के लाल चौक पर अमरनाथ यात्रा में तैनात पुलिस के हेड कांस्टेबल आशिक हुसैन को गोली मारी थी। उसने अकेले ही दोनों वारदातों को अंजाम दिया और भाग निकला। सुरक्षाबलों ने इस आतंकी को ढेर करने के लिए पूरे दक्षिण कश्मीर में व्यापक तलाशी अभियान छेड़ दिया है।
कुलगाम जिले के केलम में शुक्रवार शाम छत्तीसगढ़ के दो श्रमिकों की हत्या लश्कर-ए-ताइबा के स्थानीय आतंकी कमांडर मोहम्मद लतीफ भट ने की है। लतीफ ने ही गत 22 जुलाई को अनंतनाग के लाल चौक पर अमरनाथ यात्रा में तैनात पुलिस के हेड कांस्टेबल आशिक हुसैन को गोली मारी थी। उसने अकेले ही दोनों वारदातों को अंजाम दिया और भाग निकला। सुरक्षाबलों ने इस आतंकी को ढेर करने के लिए पूरे दक्षिण कश्मीर में व्यापक तलाशी अभियान छेड़ दिया है।
केलम में आतंकियों ने ईंट भट्ठे पर काम करने वाले दो श्रमिकों 28 वर्षीय भूपेंद्र भैना और 24 वर्षीय दीपक रात्रे पर अंधाधुंध गोलियां बरसा दी थीं। हमले में दीपक की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि भूपेंद्र ने शनिवार सुबह स्किम्स श्रीनगर में दम तोड़ दिया। दोनों श्रमिकों का अंतिम संस्कार केलम के पालपोरा में स्वजन, पुलिस अधिकारियों व प्रशासन की मौजूदगी में किया गया।
आतंकी वारदात से आहत एलजी मनोज सिन्हा ने शनिवार को उच्च स्तरीय सुरक्षा समीक्षा बैठक बुलाई। इसमें उन्होंने आतंकियों के सफाये के लिए अधिकारियों को सटीक एवं प्रभावी आतंकरोधी अभियान तेजी से चलाने के निर्देश दिए। वारदात को अंजाम देने वाले आतंकियों को दबोचने व मार गिराने के लिए सुरक्षाबलों ने शुक्रवार रात से व्यापक तलाशी अभियान चला रखा है।
एके-47 से अकेले ही टारगेट किलिंग को अंजाम दिया
सूत्रों ने बताया कि लश्कर आतंकी लतीफ ने अकेले ही श्रमिकों की टारगेट किलिंग को अंजाम दिया और एके-47 का इस्तेमाल किया। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। 21 वर्षीय मोहम्मद लतीफ कुलगाम जिले के ही नई बस्ती (खेवन चद्दर) का रहने वाला है। वह पिछले साल 19 नवंबर को घर से लापता हो गया था। परिवार ने उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। सूत्रों के अनुसार, लापता होने के बाद उसने लश्कर में ऑपरेशन कमांडर की जिम्मेदारी संभाल ली। शनिवार को उसके घर की तलाशी ली गई। परिवार के सदस्यों व गांव के कई युवाओं से पूछताछ की गई है।
सूत्रों ने बताया कि लश्कर आतंकी लतीफ ने अकेले ही श्रमिकों की टारगेट किलिंग को अंजाम दिया और एके-47 का इस्तेमाल किया। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। 21 वर्षीय मोहम्मद लतीफ कुलगाम जिले के ही नई बस्ती (खेवन चद्दर) का रहने वाला है। वह पिछले साल 19 नवंबर को घर से लापता हो गया था। परिवार ने उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। सूत्रों के अनुसार, लापता होने के बाद उसने लश्कर में ऑपरेशन कमांडर की जिम्मेदारी संभाल ली। शनिवार को उसके घर की तलाशी ली गई। परिवार के सदस्यों व गांव के कई युवाओं से पूछताछ की गई है।
सुरक्षा बेहद कड़ी
अभियान में एसओजी, सेना के विशेष दस्ते और खोजी कुत्ते लगाए गए हैं। आने-जाने वाले संदिग्ध वाहनों और लोगों की गहन जांच-पड़ताल की जा रही है। हमले के बाद न केवल कुलगाम, बल्कि श्रीनगर समेत पूरे कश्मीर और राष्ट्रीय राजमार्गों पर सुरक्षा बेहद कड़ी कर दी गई है। श्रीनगर के प्रवेश और निकास द्वारों, प्रमुख चौराहों और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त नाके लगाए गए हैं। निगरानी बढ़ा दी गई है।
अभियान में एसओजी, सेना के विशेष दस्ते और खोजी कुत्ते लगाए गए हैं। आने-जाने वाले संदिग्ध वाहनों और लोगों की गहन जांच-पड़ताल की जा रही है। हमले के बाद न केवल कुलगाम, बल्कि श्रीनगर समेत पूरे कश्मीर और राष्ट्रीय राजमार्गों पर सुरक्षा बेहद कड़ी कर दी गई है। श्रीनगर के प्रवेश और निकास द्वारों, प्रमुख चौराहों और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त नाके लगाए गए हैं। निगरानी बढ़ा दी गई है।
पूछताछ के लिए कार्ड ओजीडब्ल्यू हिरासत में
सूत्रों ने बताया, सुरक्षाबलों ने कई संदिग्ध ओजीडब्ल्यू को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। डीजीपी नलिन प्रभात और पुलिस तथा अन्य सुरक्षाबलों के वरिष्ठ अधिकारियों ने घटनास्थल का दौरा किया और सुरक्षा स्थिति का जायजा लिया है। पिछले 10 दिनों में यह दूसरा बड़ा आतंकी हमला है। 22 जुलाई को हेड कांस्टेबल आशिक हुसैन को गोली मार दी थी।
सूत्रों ने बताया, सुरक्षाबलों ने कई संदिग्ध ओजीडब्ल्यू को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। डीजीपी नलिन प्रभात और पुलिस तथा अन्य सुरक्षाबलों के वरिष्ठ अधिकारियों ने घटनास्थल का दौरा किया और सुरक्षा स्थिति का जायजा लिया है। पिछले 10 दिनों में यह दूसरा बड़ा आतंकी हमला है। 22 जुलाई को हेड कांस्टेबल आशिक हुसैन को गोली मार दी थी।
मृतकों के परिवार को 36-36 लाख रुपये की मदद
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने दोनों मृतकों के परिवारों के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष से 10-10 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने का एलान किया है। छत्तीसगढ़ सरकार 20-20 लाख रुपये सहायता देगी। इसके अलावा कुलगाम जिला प्रशासन की ओर छह लाख रुपये की तत्काल राहत राशि भी दी गई है।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने दोनों मृतकों के परिवारों के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष से 10-10 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने का एलान किया है। छत्तीसगढ़ सरकार 20-20 लाख रुपये सहायता देगी। इसके अलावा कुलगाम जिला प्रशासन की ओर छह लाख रुपये की तत्काल राहत राशि भी दी गई है।
आतंकरोधी ऑपरेशन को असरदार बनाएं : सिन्हा
- मामले की गंभीरता को देखते हुए उपराज्यपाल ने डीजीपी नलिन प्रभात और शीर्ष अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय सुरक्षा समीक्षा बैठक की। उन्होंने सभी डीसी और एसएसपी को निर्देश दिया कि वे बाहर से आए मजदूरों की सुरक्षा के लिए बनाए गए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर यानी एसओपी की गहन समीक्षा करें।
- एलजी ने कहा, हमें आतंकवादियों को खत्म करने के लिए सटीक और असरदार आतंकवाद-विरोधी ऑपरेशन तेज करने होंगे। बैठक में अमरनाथ यात्रा के लिए सुरक्षा इंतजामों को मजबूत करने पर भी चर्चा हुई।
- नियोक्ता सुनिश्चित करें कि दूसरे राज्यों के मजदूरों को बीमा मिले और उनकी जानकारी स्थानीय पुलिस और जिला अधिकारियों के पास दर्ज हो।
हेड कांस्टेबल आशिक के बेटे को मिली नौकरी
अनंतनाग के लाल चौक पर आतंकियों की टारगेट किलिंग में बलिदान पुलिस के हेड कांस्टेबल आशिक हुसैन कुरैशी के बेटे अबसर आशिक कुरैशी को सरकारी नौकरी मिल गई है। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने शनिवार को लोकभवन में अबसर को नियुक्ति पत्र सौंपा। बलिदानी को श्रद्धांजलि देते हुए उपराज्यपाल ने परिवार को हर संभव सहायता का आश्वासन भी दिया। पिछले हफ्ते उपराज्यपाल ने बीरवाह के लालपोरा में जाकर हेड कांस्टेबल के परिवार से मुलाकात भी की थी। एलजी ने पुलिस के शहीद इंस्पेक्टर मसूर अली वानी की पत्नी इनशाह नजीर को भी अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति पत्र सौंपा।
अनंतनाग के लाल चौक पर आतंकियों की टारगेट किलिंग में बलिदान पुलिस के हेड कांस्टेबल आशिक हुसैन कुरैशी के बेटे अबसर आशिक कुरैशी को सरकारी नौकरी मिल गई है। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने शनिवार को लोकभवन में अबसर को नियुक्ति पत्र सौंपा। बलिदानी को श्रद्धांजलि देते हुए उपराज्यपाल ने परिवार को हर संभव सहायता का आश्वासन भी दिया। पिछले हफ्ते उपराज्यपाल ने बीरवाह के लालपोरा में जाकर हेड कांस्टेबल के परिवार से मुलाकात भी की थी। एलजी ने पुलिस के शहीद इंस्पेक्टर मसूर अली वानी की पत्नी इनशाह नजीर को भी अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति पत्र सौंपा।