{"_id":"6a301c67ce6d080eda0b4a30","slug":"mock-drill-74-magnitude-earthquake-in-dharamshala-mega-exercise-lasted-three-hours-kangra-news-c-95-1-kng1037-239605-2026-06-15","type":"story","status":"publish","title_hn":"मॉक ड्रिल : धर्मशाला में 7.4 तीव्रता का भूकंप, तीन घंटे तक चला महाअभ्यास","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मॉक ड्रिल : धर्मशाला में 7.4 तीव्रता का भूकंप, तीन घंटे तक चला महाअभ्यास
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Tue, 16 Jun 2026 09:07 AM IST
विज्ञापन
धर्मशाला में आपदा प्रबंधन पर आयोजित मॉक डि्रल के दौरान घायलों को अस्पताल लाने के बाद चैक करते ह
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
धर्मशाला। जिला मुख्यालय धर्मशाला में सोमवार सुबह अचानक सायरनों की गूंज से हड़कंप मच गया। सर्किट हाउस, क्षेत्रीय अस्पताल और कोतवाली बाजार क्षेत्र में 7.4 तीव्रता के काल्पनिक भूकंप की स्थिति बनाकर तीन घंटे तक मेगा मॉक ड्रिल का महाभ्यास किया गया।
लाउडस्पीकर के माध्यम से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए गए। इसके बाद प्रशासन, एनडीआरएफ, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने तत्काल मोर्चा संभालते हुए प्रभावित क्षेत्रों से फंसे लोगों का सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया। आपदा की वास्तविक स्थिति में विभिन्न विभागों की त्वरित प्रतिक्रिया और आपसी तालमेल को परखने के लिए यह अभ्यास किया गया। प्रस्तुत है मेगा मॉक ड्रिल के लाइव रिपोर्ट...
सुबह 09:30 बजे : अचानक गूंजे सायरन, राहत टीमें रवाना
जैसे ही काल्पनिक भूकंप की सूचना मिली, पूरा प्रशासनिक अमला अलर्ट मोड पर आ गया। सूचना मिलते ही पुलिस, अग्निशमन विभाग, एसडीआरएफ, स्वास्थ्य विभाग, नगर निगम और राजस्व विभाग की टीमें सायरन बजाती हुई घटनास्थलों की ओर रवाना हो गईं। राहत दलों ने मलबे में तब्दील हुए क्षेत्रों में पहुंचकर घायल लोगों की तलाश शुरू की और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना शुरू किया।
विज्ञापन
सुबह 10:00 बजे : सिंथैटिक मैदान में बना अस्थायी अस्पताल
राहत कार्यों को गति देते हुए धर्मशाला के सिंथैटिक मैदान में एक अस्थायी मेडिकल कैंप स्थापित किया गया। चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों की विशेष टीमों ने मोर्चा संभाला। मॉक ड्रिल के तहत तैयार किए गए परिदृश्य में घायल लोगों को स्ट्रेचर के माध्यम से निकालकर एंबुलेंस तक पहुंचाया गया और प्राथमिक उपचार शुरू किया गया।
सुबह 10:30 बजे : घायलों को अस्पताल शिफ्ट करने की होड़
रेस्क्यू टीमों ने गंभीर रूप से घायल लोगों को प्राथमिक उपचार देने के बाद एंबुलेंस के माध्यम से मुख्य अस्पताल भेजने की प्रक्रिया का कड़ा अभ्यास किया। इस दौरान पुलिस ने पूरे क्षेत्र में सुरक्षा घेरा मजबूत रखा और ट्रैफिक को नियंत्रित किया, जबकि अग्निशमन दल ने क्षतिग्रस्त भवनों की जांच कर राहत कार्यों में सहयोग दिया।
सुबह 11:00 बजे: क्षेत्रीय अस्पताल में मची अफरा-तफरी
धर्मशाला जोनल अस्पताल परिसर में सायरन बजाती हुई एंबुलेंस घायलों को लेकर पहुंची। अस्पताल के बचाव दल ने तुरंत सक्रियता दिखाते हुए घायलों को स्ट्रेचर के माध्यम से आपातकालीन वार्ड पहुंचाया। डॉक्टरों ने बिना समय गंवाए घायलों के एक्सरे किए और उन्हें तुरंत वार्डों में शिफ्ट करने का अभ्यास किया।
सुबह 11:30 बजे : संचार और आपसी तालमेल की अंतिम समीक्षा
मॉक ड्रिल के अंतिम चरण में सभी विभागों ने संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव कार्यों का अंतिम प्रदर्शन किया। नोडल अधिकारियों ने इस दौरान संचार व्यवस्था, रेस्क्यू ऑपरेशन, त्वरित मेडिकल सहायता और विभिन्न एजेंसियों के बीच आपसी तालमेल की गहन समीक्षा की। करीब तीन घंटे तक चले इस मेगा अभ्यास का दोपहर 12 बजे सफल समापन हुआ। अधिकारियों ने बताया कि अभ्यास के दौरान घटनास्थलों से कुल 18 लोगों के घायल होने का परिदृश्य तैयार किया गया था, जिसमें 15 सामान्य और 3 गंभीर रूप से घायल शामिल रहे।
इस मॉक ड्रिल का मुख्य उद्देश्य केवल प्रशासनिक और विभागीय तैयारियों को परखना ही नहीं है, बल्कि आम जनता को भी जागरूक करना है। यदि लोग आपदा के समय शांत रहकर सही कदम उठाएंगे, तो जनहानि को काफी हद तक कम किया जा सकता है। -कुलदीप सिंह और गिरीराज, अधिकारी, जिला आपदा प्रबंधन कांगड़ा
लाउडस्पीकर के माध्यम से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए गए। इसके बाद प्रशासन, एनडीआरएफ, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने तत्काल मोर्चा संभालते हुए प्रभावित क्षेत्रों से फंसे लोगों का सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया। आपदा की वास्तविक स्थिति में विभिन्न विभागों की त्वरित प्रतिक्रिया और आपसी तालमेल को परखने के लिए यह अभ्यास किया गया। प्रस्तुत है मेगा मॉक ड्रिल के लाइव रिपोर्ट...
विज्ञापन
विज्ञापन
सुबह 09:30 बजे : अचानक गूंजे सायरन, राहत टीमें रवाना
जैसे ही काल्पनिक भूकंप की सूचना मिली, पूरा प्रशासनिक अमला अलर्ट मोड पर आ गया। सूचना मिलते ही पुलिस, अग्निशमन विभाग, एसडीआरएफ, स्वास्थ्य विभाग, नगर निगम और राजस्व विभाग की टीमें सायरन बजाती हुई घटनास्थलों की ओर रवाना हो गईं। राहत दलों ने मलबे में तब्दील हुए क्षेत्रों में पहुंचकर घायल लोगों की तलाश शुरू की और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना शुरू किया।
सुबह 10:00 बजे : सिंथैटिक मैदान में बना अस्थायी अस्पताल
राहत कार्यों को गति देते हुए धर्मशाला के सिंथैटिक मैदान में एक अस्थायी मेडिकल कैंप स्थापित किया गया। चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों की विशेष टीमों ने मोर्चा संभाला। मॉक ड्रिल के तहत तैयार किए गए परिदृश्य में घायल लोगों को स्ट्रेचर के माध्यम से निकालकर एंबुलेंस तक पहुंचाया गया और प्राथमिक उपचार शुरू किया गया।
सुबह 10:30 बजे : घायलों को अस्पताल शिफ्ट करने की होड़
रेस्क्यू टीमों ने गंभीर रूप से घायल लोगों को प्राथमिक उपचार देने के बाद एंबुलेंस के माध्यम से मुख्य अस्पताल भेजने की प्रक्रिया का कड़ा अभ्यास किया। इस दौरान पुलिस ने पूरे क्षेत्र में सुरक्षा घेरा मजबूत रखा और ट्रैफिक को नियंत्रित किया, जबकि अग्निशमन दल ने क्षतिग्रस्त भवनों की जांच कर राहत कार्यों में सहयोग दिया।
सुबह 11:00 बजे: क्षेत्रीय अस्पताल में मची अफरा-तफरी
धर्मशाला जोनल अस्पताल परिसर में सायरन बजाती हुई एंबुलेंस घायलों को लेकर पहुंची। अस्पताल के बचाव दल ने तुरंत सक्रियता दिखाते हुए घायलों को स्ट्रेचर के माध्यम से आपातकालीन वार्ड पहुंचाया। डॉक्टरों ने बिना समय गंवाए घायलों के एक्सरे किए और उन्हें तुरंत वार्डों में शिफ्ट करने का अभ्यास किया।
सुबह 11:30 बजे : संचार और आपसी तालमेल की अंतिम समीक्षा
मॉक ड्रिल के अंतिम चरण में सभी विभागों ने संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव कार्यों का अंतिम प्रदर्शन किया। नोडल अधिकारियों ने इस दौरान संचार व्यवस्था, रेस्क्यू ऑपरेशन, त्वरित मेडिकल सहायता और विभिन्न एजेंसियों के बीच आपसी तालमेल की गहन समीक्षा की। करीब तीन घंटे तक चले इस मेगा अभ्यास का दोपहर 12 बजे सफल समापन हुआ। अधिकारियों ने बताया कि अभ्यास के दौरान घटनास्थलों से कुल 18 लोगों के घायल होने का परिदृश्य तैयार किया गया था, जिसमें 15 सामान्य और 3 गंभीर रूप से घायल शामिल रहे।
इस मॉक ड्रिल का मुख्य उद्देश्य केवल प्रशासनिक और विभागीय तैयारियों को परखना ही नहीं है, बल्कि आम जनता को भी जागरूक करना है। यदि लोग आपदा के समय शांत रहकर सही कदम उठाएंगे, तो जनहानि को काफी हद तक कम किया जा सकता है। -कुलदीप सिंह और गिरीराज, अधिकारी, जिला आपदा प्रबंधन कांगड़ा

धर्मशाला में आपदा प्रबंधन पर आयोजित मॉक डि्रल के दौरान घायलों को अस्पताल लाने के बाद चैक करते ह

धर्मशाला में आपदा प्रबंधन पर आयोजित मॉक डि्रल के दौरान घायलों को अस्पताल लाने के बाद चैक करते ह

धर्मशाला में आपदा प्रबंधन पर आयोजित मॉक डि्रल के दौरान घायलों को अस्पताल लाने के बाद चैक करते ह