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व्रत से माता पार्वती ने पाया शिव पति का वरदान : सुमित शास्त्री
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Sun, 11 Jan 2026 07:07 AM IST
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स्वस्थानी माता मंदिर रक्कड़ पंजपीरी में कथा के दौरान झूमतीं महिलाएं। -स्रोत : जागरूक पाठक
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रक्कड़ (कांगड़ा)। स्वस्थानी माता मंदिर रक्कड़ पंजपीरी में चल रही स्वस्थानी व्रत कथा के तीसरे दिन पंडित सुमित शास्त्री ने कथा का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि स्वस्थानी व्रत नारी शक्ति, तपस्या और पूर्ण समर्पण का प्रतीक है, जिसके माध्यम से माता पार्वती ने पति रूप में भगवान शिव को प्राप्त किया।
शास्त्री ने कथा सुनाते हुए बताया कि भगवती सती के योगाग्नि में भस्म होने के पीछे एक कारण यह भी रहा कि अगस्त्य ऋषि के सत्संग के समय उनका मन कथा में एकाग्र नहीं था। वापसी के दौरान दंडकारण्य वन में भगवान श्रीराम की लीला देखकर भगवान शिव ने उन्हें प्रणाम किया। सती माता के पूछने पर शिव ने बताया कि वही उनके इष्टदेव श्री रघुवीर हैं।
सती के मन में उत्पन्न संशय के कारण उन्होंने सीता का रूप धारण कर परीक्षा ली, जिसमें वे असफल रहीं। इसके बाद भगवान शिव ने मन से त्याग किया और सती को पिता दक्ष के यज्ञ में भस्म होना पड़ा। उन्होंने आगे बताया कि माता सती ने हिमालय की पत्नी मेनका के यहां पार्वती के रूप में जन्म लिया। माता पार्वती ने कठोर तप और स्वस्थानी व्रत की आराधना कर भगवान शिव को पति रूप में पाया। कथा के समापन पर शिव–पार्वती विवाह के सुंदर प्रसंग का वर्णन किया गया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
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शास्त्री ने कथा सुनाते हुए बताया कि भगवती सती के योगाग्नि में भस्म होने के पीछे एक कारण यह भी रहा कि अगस्त्य ऋषि के सत्संग के समय उनका मन कथा में एकाग्र नहीं था। वापसी के दौरान दंडकारण्य वन में भगवान श्रीराम की लीला देखकर भगवान शिव ने उन्हें प्रणाम किया। सती माता के पूछने पर शिव ने बताया कि वही उनके इष्टदेव श्री रघुवीर हैं।
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सती के मन में उत्पन्न संशय के कारण उन्होंने सीता का रूप धारण कर परीक्षा ली, जिसमें वे असफल रहीं। इसके बाद भगवान शिव ने मन से त्याग किया और सती को पिता दक्ष के यज्ञ में भस्म होना पड़ा। उन्होंने आगे बताया कि माता सती ने हिमालय की पत्नी मेनका के यहां पार्वती के रूप में जन्म लिया। माता पार्वती ने कठोर तप और स्वस्थानी व्रत की आराधना कर भगवान शिव को पति रूप में पाया। कथा के समापन पर शिव–पार्वती विवाह के सुंदर प्रसंग का वर्णन किया गया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।