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Kangra News: 11 माह से पीजी कर रहे चिकित्सक को सरकार ने कांगड़ा से चंबा किया ट्रांसफर
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चिकित्सक के तबादला आदेश की प्रति। -स्रोत : विभागीय वेबसाइट
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धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश स्वास्थ्य निदेशालय की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। निदेशालय ने एक ऐसे चिकित्सक के तबादले का आदेश जारी कर दिया है, जो वर्तमान में संबंधित अस्पताल में तैनात ही नहीं हैं। इस हवाई तबादले ने निदेशालय में बैठे अधिकारियों की गंभीरता और रिकॉर्ड प्रबंधन की पोल खोल दी है।
सात जनवरी को सरकार की ओर से एक अधिसूचना जारी की गई, जिसमें डॉ. शुभम बेडवा को नागरिक अस्पताल कांगड़ा से बदल कर जिला चंबा के ब्लॉक समोट की पीएचसी (पीएचसी) मोतला में बतौर चिकित्सा अधिकारी तैनात करने के आदेश दिए गए। जैसे ही ये आदेश कांगड़ा पहुंचे, वहां हड़कंप मच गया।
निदेशालय के रिकॉर्ड के उलट हकीकत यह है कि डॉ. शुभम बेडवा पिछले 11 महीनों से नागरिक अस्पताल कांगड़ा में हैं ही नहीं। वे वर्ष 2025 की शुरुआत से ही महर्षि मार्कंडेय यूनिवर्सिटी (एमएमयू) में ऑर्थो में पीजी करने के लिए रिलीव होकर जा चुके हैं। जब कोई चिकित्सक उच्च शिक्षा के लिए करीब एक साल पहले ही जा चुका है तो निदेशालय की ओर से इस तरह से आदेश कैसे जारी कर दिए गए, अपने आप में सवाल खड़े कर रहा है। साथ ही सवाल उठ रहे हैं कि अधिकारियों ने बिना वर्तमान स्थिति की जांच किए ही तबादला सूची तैयार कर दी है।
सीएमओ कांगड़ा डॉ. विवेक करोल ने पुष्टि की है कि मामला उनके संज्ञान में आया है। इस बारे में उच्चाधिकारियों से चर्चा की जाएगी। वहीं, इस लापरवाही पर जब सचिव, स्वास्थ्य एम. सुधा का पक्ष जानने के लिए संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने फोन नहीं उठाया।
सियासी गलियारों में भी चर्चा शुरू
अस्पताल की दीवारों से निकलकर यह मुद्दा अब राजनीतिक मोड़ ले चुका है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या विभाग के पास अपने कर्मचारियों का अपडेटेड डाटाबेस भी नहीं है? एक पीजी कर रहे डॉक्टर को चंबा के ज्वाइन करने का आदेश देना विभाग की गैर-जिम्मेदाराना कार्यप्रणाली का जीता-जागता प्रमाण है।
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सात जनवरी को सरकार की ओर से एक अधिसूचना जारी की गई, जिसमें डॉ. शुभम बेडवा को नागरिक अस्पताल कांगड़ा से बदल कर जिला चंबा के ब्लॉक समोट की पीएचसी (पीएचसी) मोतला में बतौर चिकित्सा अधिकारी तैनात करने के आदेश दिए गए। जैसे ही ये आदेश कांगड़ा पहुंचे, वहां हड़कंप मच गया।
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निदेशालय के रिकॉर्ड के उलट हकीकत यह है कि डॉ. शुभम बेडवा पिछले 11 महीनों से नागरिक अस्पताल कांगड़ा में हैं ही नहीं। वे वर्ष 2025 की शुरुआत से ही महर्षि मार्कंडेय यूनिवर्सिटी (एमएमयू) में ऑर्थो में पीजी करने के लिए रिलीव होकर जा चुके हैं। जब कोई चिकित्सक उच्च शिक्षा के लिए करीब एक साल पहले ही जा चुका है तो निदेशालय की ओर से इस तरह से आदेश कैसे जारी कर दिए गए, अपने आप में सवाल खड़े कर रहा है। साथ ही सवाल उठ रहे हैं कि अधिकारियों ने बिना वर्तमान स्थिति की जांच किए ही तबादला सूची तैयार कर दी है।
सीएमओ कांगड़ा डॉ. विवेक करोल ने पुष्टि की है कि मामला उनके संज्ञान में आया है। इस बारे में उच्चाधिकारियों से चर्चा की जाएगी। वहीं, इस लापरवाही पर जब सचिव, स्वास्थ्य एम. सुधा का पक्ष जानने के लिए संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने फोन नहीं उठाया।
सियासी गलियारों में भी चर्चा शुरू
अस्पताल की दीवारों से निकलकर यह मुद्दा अब राजनीतिक मोड़ ले चुका है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या विभाग के पास अपने कर्मचारियों का अपडेटेड डाटाबेस भी नहीं है? एक पीजी कर रहे डॉक्टर को चंबा के ज्वाइन करने का आदेश देना विभाग की गैर-जिम्मेदाराना कार्यप्रणाली का जीता-जागता प्रमाण है।