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Kangra News: दंपती समेत दो गारंटरों को ऋण चुकाने के आदेश
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दंपती समेत दो गारंटरों को ऋण चुकाने के आदेश
केसीसी बैंक के पक्ष में फैसला, वर्ष 2014 में दंपती ने लिया था 15 लाख का ऋण
संवाद न्यूज एजेंसी
धर्मशाला। कांगड़ा केंद्रीय सहकारी बैंक की ओर से दायर ऋण वसूली मामले में पालमपुर की वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश अदालत ने बैंक के पक्ष में फैसला सुनाया है। अदालत ने चार प्रतिवादियों को संयुक्त रूप से 13.93 लाख रुपये की बकाया राशि ब्याज सहित अदा करने के आदेश दिए हैं। अदालत ने माना कि बैंक अपने दावे को प्रमाणित करने में सफल रहा, जबकि प्रतिवादी बकाया राशि न होने संबंधी अपने दावों को साबित नहीं कर सके।
वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश पालमपुर गौरव कुमार की अदालत में कांगड़ा केंद्रीय सहकारी बैंक लिमिटेड पालमपुर शाखा की ओर से यह वसूली वाद दायर किया गया था। बैंक ने अपने दावे में कहा था कि बैजनाथ क्षेत्र की दंपती ने वर्ष 2014 में मकान निर्माण के लिए 15 लाख रुपये का हाउसिंग लोन लिया था। उनकी जान-पहचान के ही दो अन्य व्यक्ति इस ऋण के गारंटर बने थे। बैंक के अनुसार ऋण स्वीकृत होने के बाद उधारकर्ताओं को पूरी राशि जारी कर दी गई थी, लेकिन बाद में उन्होंने किस्तों का नियमित भुगतान नहीं किया। कई मौखिक और लिखित स्मरण पत्र भेजने के बावजूद ऋण खाता नियमित नहीं हुआ। इसके बाद 18 जनवरी 2021 तक बकाया राशि 13,93,471 रुपये पहुंच गई और बैंक को अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा। मामले की सुनवाई के दौरान प्रतिवादियों ने ऋण लेने की बात से इन्कार नहीं किया लेकिन दावा किया कि उन्होंने अधिकांश राशि जमा कर दी है और वे नियमित भुगतान कर रहे थे। हालांकि, अदालत में वे अपने पक्ष के समर्थन में कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सके। दूसरी ओर बैंक ने खाते के विवरण और ऋण संबंधी दस्तावेज रिकॉर्ड पेश किए, जिन्हें अदालत ने विश्वसनीय माना।
अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि बैंक ने यह साबित कर दिया है कि वह बकाया 13,93,471 रुपये की वसूली का हकदार है। साथ ही यह भी माना कि ऋण लेन-देन और गारंटी संबंधी दस्तावेज विधिवत निष्पादित किए गए थे और गारंटरों की जिम्मेदारी भी बनती है। अदालत ने वाद को मंजूर करते हुए आदेश दिया कि सभी प्रतिवादी संयुक्त एवं पृथक रूप से बैंक को 13,93,471 रुपये अदा करेंगे। इसके अलावा वाद दायर किए जाने की तिथि से भुगतान होने तक 11 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा। साथ ही बैंक को मुकदमे का खर्च भी देना होगा।
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केसीसी बैंक के पक्ष में फैसला, वर्ष 2014 में दंपती ने लिया था 15 लाख का ऋण
संवाद न्यूज एजेंसी
धर्मशाला। कांगड़ा केंद्रीय सहकारी बैंक की ओर से दायर ऋण वसूली मामले में पालमपुर की वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश अदालत ने बैंक के पक्ष में फैसला सुनाया है। अदालत ने चार प्रतिवादियों को संयुक्त रूप से 13.93 लाख रुपये की बकाया राशि ब्याज सहित अदा करने के आदेश दिए हैं। अदालत ने माना कि बैंक अपने दावे को प्रमाणित करने में सफल रहा, जबकि प्रतिवादी बकाया राशि न होने संबंधी अपने दावों को साबित नहीं कर सके।
वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश पालमपुर गौरव कुमार की अदालत में कांगड़ा केंद्रीय सहकारी बैंक लिमिटेड पालमपुर शाखा की ओर से यह वसूली वाद दायर किया गया था। बैंक ने अपने दावे में कहा था कि बैजनाथ क्षेत्र की दंपती ने वर्ष 2014 में मकान निर्माण के लिए 15 लाख रुपये का हाउसिंग लोन लिया था। उनकी जान-पहचान के ही दो अन्य व्यक्ति इस ऋण के गारंटर बने थे। बैंक के अनुसार ऋण स्वीकृत होने के बाद उधारकर्ताओं को पूरी राशि जारी कर दी गई थी, लेकिन बाद में उन्होंने किस्तों का नियमित भुगतान नहीं किया। कई मौखिक और लिखित स्मरण पत्र भेजने के बावजूद ऋण खाता नियमित नहीं हुआ। इसके बाद 18 जनवरी 2021 तक बकाया राशि 13,93,471 रुपये पहुंच गई और बैंक को अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा। मामले की सुनवाई के दौरान प्रतिवादियों ने ऋण लेने की बात से इन्कार नहीं किया लेकिन दावा किया कि उन्होंने अधिकांश राशि जमा कर दी है और वे नियमित भुगतान कर रहे थे। हालांकि, अदालत में वे अपने पक्ष के समर्थन में कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सके। दूसरी ओर बैंक ने खाते के विवरण और ऋण संबंधी दस्तावेज रिकॉर्ड पेश किए, जिन्हें अदालत ने विश्वसनीय माना।
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अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि बैंक ने यह साबित कर दिया है कि वह बकाया 13,93,471 रुपये की वसूली का हकदार है। साथ ही यह भी माना कि ऋण लेन-देन और गारंटी संबंधी दस्तावेज विधिवत निष्पादित किए गए थे और गारंटरों की जिम्मेदारी भी बनती है। अदालत ने वाद को मंजूर करते हुए आदेश दिया कि सभी प्रतिवादी संयुक्त एवं पृथक रूप से बैंक को 13,93,471 रुपये अदा करेंगे। इसके अलावा वाद दायर किए जाने की तिथि से भुगतान होने तक 11 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा। साथ ही बैंक को मुकदमे का खर्च भी देना होगा।
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