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Kangra News: सौतेले पिता और नाना ने रौंदी मासूमियत, साक्ष्य मिटाने में मां भी दोषी

Fri, 26 Jun 2026 07:12 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Fri, 26 Jun 2026 07:12 AM IST
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Stepfather and maternal grandfather trampled innocence; Mother also complicit in destroying evidence.
सौतेले पिता और नाना ने रौंदी मासूमियत, साक्ष्य मिटाने में मां भी दोषी
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पिता को 20, नाना को तीन वर्ष का कठोर और मां को एक साल का कारावास
पुलिस को चकमा देने के लिए आरोपियों ने अज्ञात व्यक्ति पर लगाए थे आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी
धर्मशाला। नाबालिग बालिका से यौन अपराध और साक्ष्य छिपाने के मामले में तीन आरोपियों को दोषी करार देते हुए कड़ी सजा सुनाई गई है। अदालत ने दोषी सौतेले पिता को 20 वर्ष के कठोर कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई। इसे अदा न करने पर तीन माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। दोषी नाना को तीन वर्ष के कठोर कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माना लगाया। इसे अदा न करने पर दो माह का अतिरिक्त कारावास होगा। वहीं, दोषी मां को एक वर्ष के कारावास और पांच हजार रुपये जुर्माना लगाया और इसे अदा न करने पर एक कमाह की अतिरिक्त कैद होगी।
धर्मशाला स्थित फास्ट ट्रैक स्पेशल पोक्सो कोर्ट की अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश विजया लक्ष्मी की अदालत ने यह फैसला सुनाया है। अभियोजन पक्ष के अनुसार 12 सितंबर 2024 को पीड़िता की माता और नाना ने महिला थाना धर्मशाला में शिकायत दर्ज करवाई थी कि साढ़े सात वर्षीय बच्ची के साथ स्कूल से घर लौटते समय किसी अज्ञात व्यक्ति ने गलत काम किया है। मामले की जांच के दौरान जब बालिका के बयान दर्ज किए गए तो पूरे घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया। जांच में पीड़िता ने खुलासा किया कि उसके साथ यौन शोषण किसी अज्ञात व्यक्ति ने नहीं, बल्कि उसके सौतेले पिता और नाना ने किया था। इसके बाद पुलिस ने मामले की गहन जांच करते हुए आरोपियों के खिलाफ साक्ष्य जुटाए और अदालत में चालान पेश किया।
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जांच के दौरान यह भी सामने आया कि पीड़िता की मां को घटना की जानकारी थी लेकिन उसने मामले को छिपाने का प्रयास किया। आरोप है कि उसने लोगों को गुमराह करने के लिए यह कहानी फैलाई कि बच्ची किसी बाहरी साये अथवा ‘पुठपैरी’ के प्रभाव में है। इतना ही नहीं, घटना वाले दिन बच्ची के पहने गए कपड़ों को धो दिया और उसे तत्काल चिकित्सीय परीक्षण के लिए अस्पताल भी नहीं ले जाया गया। अदालत ने माना कि यह महत्वपूर्ण साक्ष्यों को नष्ट करने और अपराध को छिपाने का प्रयास था। अभियोजन पक्ष की ओर से उप जिला न्यायवादी नवीना राही ने मामले की पैरवी की और 34 गवाहों के बयान और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य प्रस्तुत किए। वहीं, नायब कोर्ट यशपाल ने भी अभियोजन की कार्रवाई में महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया।
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