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Kangra News: राज्य स्तरीय उत्सव को लेकर परागपुर के लोगों में उत्साह, नेता मौन
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Sun, 11 Jan 2026 05:26 AM IST
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सरकारी आयोजन पर स्थानीय दिग्गज नेताओं की चुप्पी पर चर्चाएं शुरू
सवांद न्यूज एजेंसी
परागपुर (कांगड़ा)। ऐतिहासिक धरोहर गांव परागपुर के लिए यह गर्व का क्षण है कि यहां पहली बार राज्य स्तर का भव्य सरकारी कार्यक्रम आयोजित होने जा रहा है। सरकार के इस कदम से क्षेत्र के विकास और पर्यटन को नई ऊंचाइयां मिलने की उम्मीद है। इस बड़े आयोजन को लेकर जहां लोगों में उत्साह है, वहीं दूसरी ओर नेताओं में एक अलग ही तरह की शांति देखी जा रही है।
आमतौर पर विकास कार्यों और आयोजनों को लेकर मुखर रहने वाले कांग्रेस और भाजपा संगठनों ने इस बार एक संजीदा चुप्पी साध रखी है। अक्सर देखा जाता है कि क्षेत्र की हर गतिविधि को सोशल मीडिया पर उत्साह के साथ साझा करने वाले स्थानीय नेता इस बार डिजिटल मंचों से कुछ दूरी बनाए हुए हैं। फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया हैंडल्स पर इस बड़े आयोजन को लेकर वैसी सक्रीयता नजर नहीं आ रही, जैसी अमूमन जसवां परागपुर की धरती पर होने वाले अन्य कार्यक्रमों में दिखती है।
इसके साथ ही इस आयोजन को लेकर अभी तक कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस या औपचारिक वक्तव्य भी सामने नहीं आया है, जिसे लेकर बुद्धिजीवी वर्ग और स्थानीय लोगों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नेताओं की यह चुप्पी शायद किसी असमंजस या आधिकारिक प्रोटोकॉल के इंतजार का परिणाम हो सकती है, लेकिन जनता इसे अपने चश्मे से देख रही है। जहां छोटी-छोटी बातों पर सोशल मीडिया में बहस छिड़ जाती है, वहां इतने बड़े राज्यस्तरीय आयोजन पर स्थानीय संगठनों की यह सादगी समझ से परे है।
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परागपुर (कांगड़ा)। ऐतिहासिक धरोहर गांव परागपुर के लिए यह गर्व का क्षण है कि यहां पहली बार राज्य स्तर का भव्य सरकारी कार्यक्रम आयोजित होने जा रहा है। सरकार के इस कदम से क्षेत्र के विकास और पर्यटन को नई ऊंचाइयां मिलने की उम्मीद है। इस बड़े आयोजन को लेकर जहां लोगों में उत्साह है, वहीं दूसरी ओर नेताओं में एक अलग ही तरह की शांति देखी जा रही है।
आमतौर पर विकास कार्यों और आयोजनों को लेकर मुखर रहने वाले कांग्रेस और भाजपा संगठनों ने इस बार एक संजीदा चुप्पी साध रखी है। अक्सर देखा जाता है कि क्षेत्र की हर गतिविधि को सोशल मीडिया पर उत्साह के साथ साझा करने वाले स्थानीय नेता इस बार डिजिटल मंचों से कुछ दूरी बनाए हुए हैं। फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया हैंडल्स पर इस बड़े आयोजन को लेकर वैसी सक्रीयता नजर नहीं आ रही, जैसी अमूमन जसवां परागपुर की धरती पर होने वाले अन्य कार्यक्रमों में दिखती है।
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इसके साथ ही इस आयोजन को लेकर अभी तक कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस या औपचारिक वक्तव्य भी सामने नहीं आया है, जिसे लेकर बुद्धिजीवी वर्ग और स्थानीय लोगों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नेताओं की यह चुप्पी शायद किसी असमंजस या आधिकारिक प्रोटोकॉल के इंतजार का परिणाम हो सकती है, लेकिन जनता इसे अपने चश्मे से देख रही है। जहां छोटी-छोटी बातों पर सोशल मीडिया में बहस छिड़ जाती है, वहां इतने बड़े राज्यस्तरीय आयोजन पर स्थानीय संगठनों की यह सादगी समझ से परे है।