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Kangra News: समय से पहले गर्मी की दस्तक, 15% तक सूखे पेयजल स्रोत
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धर्मशाला। इस वर्ष गर्मियों ने समय से पहले ही दस्तक दे दी है। इस कारण प्राकृतिक पेयजल स्रोतों के जलस्तर में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है। जलशक्ति विभाग के आंकड़ों के अनुसार कम बारिश और बर्फबारी के कारण जलस्रोतों के स्तर में अब तक लगभग 10 से 15 प्रतिशत की कमी आई है।
विभाग के उत्तरी क्षेत्र धर्मशाला के अंतर्गत आने वाली कुल 1575 पेयजल और 627 सिंचाई योजनाएं वर्तमान में संकट के घेरे में हैं। विशेष रूप से कांगड़ा की सात और चंबा की छह बड़ी पेयजल योजनाओं पर इसका सर्वाधिक प्रभाव पड़ा है, जहां पानी की उपलब्धता लगातार कम हो रही है। जलस्तर में इस गिरावट ने न केवल आम जनता, बल्कि किसानों और पर्यटन कारोबारियों की चिंता भी बढ़ा दी है।
खड्डों और नदी-नालों के सूखने से कूहलों के माध्यम से होने वाली सिंचाई बाधित हो रही है, जिसका सीधा असर गेहूं की फसल पर पड़ रहा है। दूसरी ओर धर्मशाला और आसपास के पर्यटन केंद्रों में स्थिति यह है कि कई होटल और गेस्ट हाउस संचालक पानी के टैंकर मंगवाने को मजबूर हैं।
जलशक्ति विभाग के मुख्य अभियंता दीपक गर्ग ने बताया कि यदि आने वाले दिनों में बारिश नहीं होती है तो विभाग को मजबूरन पानी की राशनिंग (निर्धारित समय पर सीमित आपूर्ति) लागू करनी पड़ सकती है। विभाग फिलहाल सभी क्षेत्रों में संतुलित पेयजल वितरण सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहा है।
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विभाग के उत्तरी क्षेत्र धर्मशाला के अंतर्गत आने वाली कुल 1575 पेयजल और 627 सिंचाई योजनाएं वर्तमान में संकट के घेरे में हैं। विशेष रूप से कांगड़ा की सात और चंबा की छह बड़ी पेयजल योजनाओं पर इसका सर्वाधिक प्रभाव पड़ा है, जहां पानी की उपलब्धता लगातार कम हो रही है। जलस्तर में इस गिरावट ने न केवल आम जनता, बल्कि किसानों और पर्यटन कारोबारियों की चिंता भी बढ़ा दी है।
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खड्डों और नदी-नालों के सूखने से कूहलों के माध्यम से होने वाली सिंचाई बाधित हो रही है, जिसका सीधा असर गेहूं की फसल पर पड़ रहा है। दूसरी ओर धर्मशाला और आसपास के पर्यटन केंद्रों में स्थिति यह है कि कई होटल और गेस्ट हाउस संचालक पानी के टैंकर मंगवाने को मजबूर हैं।
जलशक्ति विभाग के मुख्य अभियंता दीपक गर्ग ने बताया कि यदि आने वाले दिनों में बारिश नहीं होती है तो विभाग को मजबूरन पानी की राशनिंग (निर्धारित समय पर सीमित आपूर्ति) लागू करनी पड़ सकती है। विभाग फिलहाल सभी क्षेत्रों में संतुलित पेयजल वितरण सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहा है।