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ठप विकास योजनाओं में दिखा रहा व्यवस्था परिवर्तन का ढोंग : परमार
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Mon, 09 Feb 2026 05:43 AM IST
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पालमपुर (कांगड़ा)। प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष एवं सुलह के विधायक विपिन सिंह परमार ने सुक्खू सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में जिस व्यवस्था परिवर्तन का दावा किया जा रहा है, उसके ढोंग की असली तस्वीर सुलह क्षेत्र के जर्जर ढांचों और ठप पड़ी योजनाओं में दिखती है।
यहां जारी एक बयान में विधायक परमार ने आरोप लगाया कि सुलह में अधूरी इमारतें न केवल प्रशासनिक विफलता हैं, बल्कि जनता के साथ किया गया एक विश्वासघात हैं। उन्होंने कहा कि आईटीआई, किसान भवन, अस्पतालों के अतिरिक्त खंड और फार्मेसी कॉलेज जैसी महत्वपूर्ण योजनाएं भाजपा सरकार के समय स्वीकृत हुई थीं। लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद कांग्रेस सरकार ने द्वेषवश इन परियोजनाओं को या तो ठंडे बस्ते में डाल दिया या जानबूझकर अधर में लटका दिया।
उन्होंने समाचार पत्रों की रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि विकास कार्यों को रोकना क्षेत्र की प्रगति के साथ खिलवाड़ है। विधायक ने कहा कि सुलह क्षेत्र में गठित 14 नई पंचायतों को 5 साल बीत जाने के बाद भी अपना भवन नसीब नहीं हुआ है। पूर्व भाजपा सरकार ने प्रत्येक पंचायत के लिए 33-33 लाख रुपये स्वीकृत किए थे, लेकिन वर्तमान सरकार की निष्क्रियता के कारण ये पंचायतें आज भी किराए के कमरों या अस्थायी स्थानों से चल रही हैं। उन्होंने इसे पंचायती राज व्यवस्था को कमजोर करने का एक सुनियोजित प्रयास करार दिया।
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यहां जारी एक बयान में विधायक परमार ने आरोप लगाया कि सुलह में अधूरी इमारतें न केवल प्रशासनिक विफलता हैं, बल्कि जनता के साथ किया गया एक विश्वासघात हैं। उन्होंने कहा कि आईटीआई, किसान भवन, अस्पतालों के अतिरिक्त खंड और फार्मेसी कॉलेज जैसी महत्वपूर्ण योजनाएं भाजपा सरकार के समय स्वीकृत हुई थीं। लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद कांग्रेस सरकार ने द्वेषवश इन परियोजनाओं को या तो ठंडे बस्ते में डाल दिया या जानबूझकर अधर में लटका दिया।
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उन्होंने समाचार पत्रों की रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि विकास कार्यों को रोकना क्षेत्र की प्रगति के साथ खिलवाड़ है। विधायक ने कहा कि सुलह क्षेत्र में गठित 14 नई पंचायतों को 5 साल बीत जाने के बाद भी अपना भवन नसीब नहीं हुआ है। पूर्व भाजपा सरकार ने प्रत्येक पंचायत के लिए 33-33 लाख रुपये स्वीकृत किए थे, लेकिन वर्तमान सरकार की निष्क्रियता के कारण ये पंचायतें आज भी किराए के कमरों या अस्थायी स्थानों से चल रही हैं। उन्होंने इसे पंचायती राज व्यवस्था को कमजोर करने का एक सुनियोजित प्रयास करार दिया।