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Kangra News: लोगों को बारिश से नहीं बचा पा रहे फोरलेन किनारे बने रेन शेल्टर
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Wed, 18 Mar 2026 05:59 AM IST
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कछियारी से भंगवार के बीच बने फोरलेन (शिमला-मटौर हाईवे) पर बनी आधी अधूरी वर्षाशालिकाएं। संवाद
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किनारों पर कोई रोक न होने से भीग रहे लोग
संवाद न्यूज एजेंसी
धर्मशाला। जिले में फोरलेन सड़क के किनारे यात्रियों की सुविधा के लिए बनाए गए रेन शेल्टर अब अपनी उपयोगिता पर सवाल खड़े कर रहे हैं। आकर्षक डिजाइन के बावजूद ये शेल्टर बारिश और तेज हवाओं से लोगों को बचाने में असफल साबित हो रहे हैं। छत के अलावा साइडों में कोई सुरक्षा प्रबंध न होने और बैठने की समुचित व्यवस्था के अभाव के कारण राहगीरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों अंकुश कुमार, पवन, अश्वनी, रमेश सिंह, प्रेम चंद, सुरजीत, परवेश कुमार, राज कुमार, अमित कुमार और लेख राज का कहना है कि इन शेल्टरों में केवल छत की व्यवस्था की गई है, जबकि साइडों से बारिश रोकने के लिए कोई ठोस इंतजाम नहीं किए गए हैं। ऐसे में जब तेज हवा के साथ बारिश होती है, तो शेल्टर के अंदर खड़े लोग भीगने से नहीं बच पाते, मानो वे खुले में खड़े हों। इतना ही नहीं, कई स्थानों पर बैठने के लिए उचित बेंच की सुविधा भी नहीं है।
धूप, आंधी और तूफान से बचाव के लिए भी कोई पर्याप्त प्रबंध नहीं किए गए हैं। पीछे की तरफ भी अधूरी दीवारें होने के कारण शेल्टर पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं। स्थानीय निवासियों ने निर्माण कंपनी के इस कार्य पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि इन रेन शेल्टरों को सही ढंग से बनाया जाता, तो लोगों को बारिश और धूप से राहत मिल सकती थी। फिलहाल ये शेल्टर केवल दिखावे के लिए बने प्रतीत हो रहे हैं। इसके साथ ही लोगों ने स्थानीय प्रशासन से मांग की है कि इन रेन शेल्टरों में आवश्यक सुधार किए जाएं, ताकि वे वास्तव में आम जनता के काम आ सकें।
कोट्स:
लोगों ने इस समस्या से अवगत करवाया था और तीन माह पहले इन रेन शेल्टरों के बारे में एनएचएआई को सुधार के लिए लिखा गया है, लेकिन अभी तक वहां से कोई जवाब नहीं आया है। फिर एनएचएआई को इस समस्या के बारे में बताया जाएगा, ताकि बरसात से पहले इन रेन शेल्टरों की दशा को सुधारा जाए।
-इशांत जसवाल, एसडीएम कांगड़ा
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धर्मशाला। जिले में फोरलेन सड़क के किनारे यात्रियों की सुविधा के लिए बनाए गए रेन शेल्टर अब अपनी उपयोगिता पर सवाल खड़े कर रहे हैं। आकर्षक डिजाइन के बावजूद ये शेल्टर बारिश और तेज हवाओं से लोगों को बचाने में असफल साबित हो रहे हैं। छत के अलावा साइडों में कोई सुरक्षा प्रबंध न होने और बैठने की समुचित व्यवस्था के अभाव के कारण राहगीरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों अंकुश कुमार, पवन, अश्वनी, रमेश सिंह, प्रेम चंद, सुरजीत, परवेश कुमार, राज कुमार, अमित कुमार और लेख राज का कहना है कि इन शेल्टरों में केवल छत की व्यवस्था की गई है, जबकि साइडों से बारिश रोकने के लिए कोई ठोस इंतजाम नहीं किए गए हैं। ऐसे में जब तेज हवा के साथ बारिश होती है, तो शेल्टर के अंदर खड़े लोग भीगने से नहीं बच पाते, मानो वे खुले में खड़े हों। इतना ही नहीं, कई स्थानों पर बैठने के लिए उचित बेंच की सुविधा भी नहीं है।
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धूप, आंधी और तूफान से बचाव के लिए भी कोई पर्याप्त प्रबंध नहीं किए गए हैं। पीछे की तरफ भी अधूरी दीवारें होने के कारण शेल्टर पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं। स्थानीय निवासियों ने निर्माण कंपनी के इस कार्य पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि इन रेन शेल्टरों को सही ढंग से बनाया जाता, तो लोगों को बारिश और धूप से राहत मिल सकती थी। फिलहाल ये शेल्टर केवल दिखावे के लिए बने प्रतीत हो रहे हैं। इसके साथ ही लोगों ने स्थानीय प्रशासन से मांग की है कि इन रेन शेल्टरों में आवश्यक सुधार किए जाएं, ताकि वे वास्तव में आम जनता के काम आ सकें।
कोट्स:
लोगों ने इस समस्या से अवगत करवाया था और तीन माह पहले इन रेन शेल्टरों के बारे में एनएचएआई को सुधार के लिए लिखा गया है, लेकिन अभी तक वहां से कोई जवाब नहीं आया है। फिर एनएचएआई को इस समस्या के बारे में बताया जाएगा, ताकि बरसात से पहले इन रेन शेल्टरों की दशा को सुधारा जाए।
-इशांत जसवाल, एसडीएम कांगड़ा

कछियारी से भंगवार के बीच बने फोरलेन (शिमला-मटौर हाईवे) पर बनी आधी अधूरी वर्षाशालिकाएं। संवाद