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Kangra News: चिप्स के पैकेट में मिला पूंछ जैसा संदिग्ध पदार्थ, कंपनी को जुर्माना
Wed, 08 Jul 2026 07:32 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Wed, 08 Jul 2026 07:32 AM IST
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धर्मशाला। एक नामी कंपनी के सीलबंद चिप्स के पैकेट में जानवर या कीट की पूंछ जैसा बालों वाला संदिग्ध पदार्थ मिलने पर जिला उपभोक्ता आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने निर्माता कंपनी पेप्सिको इंडिया होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड को उत्पाद की कीमत (20 रुपये) 9 फीसदी ब्याज के साथ लौटाने, शिकायतकर्ता को 20 हजार रुपये मानसिक मुआवजा और 5 हजार रुपये मुकदमा खर्च अदा करने के आदेश दिए हैं।
आयोग के समक्ष सकोह निवासी शिकायतकर्ता आर्यन चौधरी ने बताया कि उन्होंने 6 जुलाई 2025 को लेज रेड चिली फ्लेवर के पांच सीलबंद पैकेट खरीदे थे। घर पर जब उन्होंने और उनकी बहन ने एक पैकेट खोला तो उसमें चिप्स के बीच एक बालों वाला संदिग्ध पदार्थ मिला, जो किसी जीव की पूंछ जैसा था। पूरी तरह शाकाहारी होने के कारण इस घटना से उन्हें गहरा मानसिक आघात लगा।
कंपनी को कानूनी नोटिस भेजने पर भी जब कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो उन्होंने उपभोक्ता आयोग की शरण ली। सुनवाई के दौरान कंपनी ने दलील दी कि उनकी निर्माण प्रक्रिया पूरी तरह स्वचालित है, इसलिए ऐसा संदूषण संभव नहीं है। साथ ही शिकायतकर्ता ने उत्पाद की जांच किसी अधिकृत प्रयोगशाला से नहीं करवाई है।
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हालांकि आयोग ने कंपनी के दावों को खारिज करते हुए माना कि पैकेट में विदेशी जैविक पदार्थ स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है, इसलिए अलग से लैब टेस्ट की आवश्यकता नहीं थी। आयोग ने स्पष्ट किया कि सीलबंद पैकेट में किसी भी तरह की खराबी या संदूषण की सीधी जिम्मेदारी निर्माता की होती है। पैकेट पर शाकाहारी (हरा बिंदु) का प्रतीक होने के बावजूद ऐसा पदार्थ मिलना सीधे तौर पर अनुचित व्यापार व्यवहार और उत्पाद दायित्व का उल्लंघन है।
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आयोग के समक्ष सकोह निवासी शिकायतकर्ता आर्यन चौधरी ने बताया कि उन्होंने 6 जुलाई 2025 को लेज रेड चिली फ्लेवर के पांच सीलबंद पैकेट खरीदे थे। घर पर जब उन्होंने और उनकी बहन ने एक पैकेट खोला तो उसमें चिप्स के बीच एक बालों वाला संदिग्ध पदार्थ मिला, जो किसी जीव की पूंछ जैसा था। पूरी तरह शाकाहारी होने के कारण इस घटना से उन्हें गहरा मानसिक आघात लगा।
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कंपनी को कानूनी नोटिस भेजने पर भी जब कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो उन्होंने उपभोक्ता आयोग की शरण ली। सुनवाई के दौरान कंपनी ने दलील दी कि उनकी निर्माण प्रक्रिया पूरी तरह स्वचालित है, इसलिए ऐसा संदूषण संभव नहीं है। साथ ही शिकायतकर्ता ने उत्पाद की जांच किसी अधिकृत प्रयोगशाला से नहीं करवाई है।
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हालांकि आयोग ने कंपनी के दावों को खारिज करते हुए माना कि पैकेट में विदेशी जैविक पदार्थ स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है, इसलिए अलग से लैब टेस्ट की आवश्यकता नहीं थी। आयोग ने स्पष्ट किया कि सीलबंद पैकेट में किसी भी तरह की खराबी या संदूषण की सीधी जिम्मेदारी निर्माता की होती है। पैकेट पर शाकाहारी (हरा बिंदु) का प्रतीक होने के बावजूद ऐसा पदार्थ मिलना सीधे तौर पर अनुचित व्यापार व्यवहार और उत्पाद दायित्व का उल्लंघन है।