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Kangra News: स्टाफ की कमी से जूझ रहा टांडा टीबी केंद्र, 13 स्वीकृत पदों में से 12 खाली

Thu, 16 Jul 2026 01:04 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा Updated Thu, 16 Jul 2026 01:04 AM IST
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Tanda TB Centre grappling with staff shortage; 12 out of 13 sanctioned posts vacant.
धर्मशाला। डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल टांडा स्थित टीबी केंद्र इन दिनों स्टाफ की भारी कमी से जूझ रहा है। केंद्र में स्वीकृत 13 पदों में से 12 पद खाली पड़े हैं और पूरी व्यवस्था महज एक विशेषज्ञ के भरोसे चल रही है। स्टाफ की इस भारी किल्लत का सीधा असर टीबी मरीजों की जांच, उपचार और नियमित निगरानी पर पड़ रहा है, जिससे मरीजों की सुरक्षा भगवान भरोसे हो गई है।
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जानकारी के अनुसार टांडा के श्वसन रोग विभाग में फैकल्टी के चार, सीनियर रेजिडेंट (एसआर) के चार, जूनियर रेजिडेंट (जेआर) के तीन और मेडिकल ऑफिसर (एमओ) के दो पद स्वीकृत हैं। वर्तमान में केवल एक विशेषज्ञ ही ओपीडी और इंडोर वार्ड की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। इस अतिरिक्त बोझ के कारण चिकित्सक हफ्ते में केवल दो दिन ओपीडी में बैठ पाती हैं।
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ऐसे में रात के समय या आपात स्थिति में वार्ड में मरीजों की सुध लेने वाला कोई नहीं होता। समय पर उपचार और परामर्श न मिलने के कारण कई मरीज दम तोड़ रहे हैं।
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महिला और पुरुषों के लिए एक ही शौचालय
स्टाफ की कमी के साथ-साथ केंद्र के भवन की जर्जर हालत ने स्थिति को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है। परिसर में बुनियादी सुविधाओं और साफ-सफाई का अभाव है। हालत यह है कि महिला और पुरुष मरीजों को एक ही शौचालय का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। बरसात के मौसम में परिसर की छत टपकने से सारा पानी वार्ड के भीतर घुस रहा है, जिससे तीमारदारों व मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।


टांडा रेफर करने के बजाय अस्पतालों में करें इलाज : डीसी
मंगलवार को धर्मशाला में डीसी कांगड़ा की अध्यक्षता में हुई टीबी डेथ ऑडिट की बैठक में यह मामला प्रमुखता से गूंजा। बैठक में श्वसन रोग विभाग के प्रो. डॉ. देवेंद्र सिंह डढवाल ने खाली पड़े पदों और बदहाल व्यवस्था से प्रशासन को अवगत करवाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्टाफ न होने से मरीजों को सही उपचार नहीं मिल पा रहा है। इस पर संज्ञान लेते हुए डीसी ने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए कि गंभीर मरीजों को टांडा रेफर करने के बजाय उनके नजदीकी अस्पतालों में ही उपचार सुनिश्चित किया जाए।
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