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2009 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से मिले छूट : यूनियन
Sat, 25 Jul 2026 05:49 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Sat, 25 Jul 2026 05:49 PM IST
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हिमाचल गवर्नमेंट टीचर्स यूनियन ने सरकार से उठाई नियमों में संशोधन की मांग
कहा, वर्षों की सेवा और अनुभव पर अब टीईटी के आधार पर सवाल उठाना अन्याय
संवाद न्यूज एजेंसी
धर्मशाला। हिमाचल गवर्नमेंट टीचर्स यूनियन ने वर्ष 2009 से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए वर्ष 2028 तक टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) उत्तीर्ण करने की अनिवार्यता का विरोध करते हुए उन्हें इसमें छूट देने की मांग उठाई है। यूनियन का कहना है कि इन शिक्षकों की नियुक्ति तत्कालीन भर्ती एवं सेवा नियमों के तहत हुई थी। ऐसे में बाद में लागू किए गए प्रावधानों को उन पर लागू करना न्यायसंगत नहीं है।
यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान और प्रदेश महासचिव तिलक नायक ने कहा कि शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम, 2009 लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों ने अपने अनुभव, ज्ञान और समर्पण से लाखों विद्यार्थियों का भविष्य संवारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके पढ़ाए हुए अनेक विद्यार्थी प्रशासनिक सेवाओं, सेना, चिकित्सा, इंजीनियरिंग और अन्य क्षेत्रों में उल्लेखनीय सफलता हासिल कर चुके हैं। ऐसे शिक्षकों की योग्यता पर अब टीईटी के आधार पर सवाल उठाना उनके सम्मान और सेवा सुरक्षा के साथ अन्याय है।
वीरेंद्र चौहान ने केंद्र और राज्य सरकारों से शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए सर्वोच्च न्यायालय में प्रभावी पैरवी करने की मांग की। वहीं, तिलक नायक ने आरटीई अधिनियम में आवश्यक संशोधन कर 2009 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से छूट देने की वकालत की।
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प्रदेश प्रेस सचिव डॉ. संजय कुमार ने कहा कि यदि इस मुद्दे का शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो यूनियन शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से अपना आंदोलन जारी रखेगी।
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कहा, वर्षों की सेवा और अनुभव पर अब टीईटी के आधार पर सवाल उठाना अन्याय
संवाद न्यूज एजेंसी
धर्मशाला। हिमाचल गवर्नमेंट टीचर्स यूनियन ने वर्ष 2009 से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए वर्ष 2028 तक टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) उत्तीर्ण करने की अनिवार्यता का विरोध करते हुए उन्हें इसमें छूट देने की मांग उठाई है। यूनियन का कहना है कि इन शिक्षकों की नियुक्ति तत्कालीन भर्ती एवं सेवा नियमों के तहत हुई थी। ऐसे में बाद में लागू किए गए प्रावधानों को उन पर लागू करना न्यायसंगत नहीं है।
यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान और प्रदेश महासचिव तिलक नायक ने कहा कि शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम, 2009 लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों ने अपने अनुभव, ज्ञान और समर्पण से लाखों विद्यार्थियों का भविष्य संवारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके पढ़ाए हुए अनेक विद्यार्थी प्रशासनिक सेवाओं, सेना, चिकित्सा, इंजीनियरिंग और अन्य क्षेत्रों में उल्लेखनीय सफलता हासिल कर चुके हैं। ऐसे शिक्षकों की योग्यता पर अब टीईटी के आधार पर सवाल उठाना उनके सम्मान और सेवा सुरक्षा के साथ अन्याय है।
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वीरेंद्र चौहान ने केंद्र और राज्य सरकारों से शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए सर्वोच्च न्यायालय में प्रभावी पैरवी करने की मांग की। वहीं, तिलक नायक ने आरटीई अधिनियम में आवश्यक संशोधन कर 2009 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से छूट देने की वकालत की।
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प्रदेश प्रेस सचिव डॉ. संजय कुमार ने कहा कि यदि इस मुद्दे का शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो यूनियन शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से अपना आंदोलन जारी रखेगी।