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Kangra News: हादसे में जान गंवाने वाले कर्मचारी के माता-पिता को मिलेगा मुआवजा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Thu, 04 Jun 2026 07:42 AM IST
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धर्मशाला। कर्मचारी क्षतिपूर्ति आयुक्त (पालमपुर) की अदालत ने एक महत्वपूर्ण फैसले में सड़क दुर्घटना में मृत एक कर्मचारी के परिजनों को बड़ी राहत दी है। अदालत ने अमिको टेक्सटाइल्स को मृत कर्मचारी के माता-पिता को 18,43,735 रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। कंपनी को यह राशि याचिका दायर करने की तिथि से 12 फीसदी वार्षिक ब्याज के साथ दो माह के भीतर चुकानी होगी।
मामले के अनुसार जिला कांगड़ा के पंचरुखी तहसील कते अंतर्गत गांव बंगहाट के निवासी विजय कुमार अमिको टेक्सटाइल्स में मैकेनिक-कम-सुपरवाइजर के पद पर तैनात थे। 5 दिसंबर 2014 को वह कंपनी के आधिकारिक कार्य से वाहन लेकर गए थे। वापसी के दौरान राजपुरा के समीप हुई एक सड़क दुर्घटना में उनकी मौके पर ही मृत्यु हो गई थी।
मृतक के माता-पिता ने कर्मचारी क्षतिपूर्ति अधिनियम के अंतर्गत अदालत में याचिका दायर कर बताया कि उनका पुत्र परिवार का एकमात्र सहारा और कमाऊ सदस्य था। सुनवाई के दौरान कंपनी और बीमा कंपनी ने विभिन्न तर्कों के साथ दावे का विरोध किया, लेकिन कर्मचारी क्षतिपूर्ति आयुक्त गौरव कुमार की अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और रिकॉर्ड का बारीकी से अध्ययन किया।
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अदालत ने स्पष्ट रूप से माना कि दुर्घटना के समय मृतक कंपनी के रोजगार (ड्यूटी) पर था। इस आधार पर अदालत ने याचिका को स्वीकार करते हुए कंपनी को मुआवजा देने का निर्देश दिया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि मुआवजे की यह राशि मृतक के माता-पिता को बराबर हिस्सों में दी जाएगी। साथ ही यह भी आदेश दिया गया है कि जब तक यह राशि याचिकाकर्ताओं के बैंक खातों में जमा नहीं होती, तब तक इसे किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में सावधि जमा (एफडी) के रूप में निवेश किया जाए।
मामले के अनुसार जिला कांगड़ा के पंचरुखी तहसील कते अंतर्गत गांव बंगहाट के निवासी विजय कुमार अमिको टेक्सटाइल्स में मैकेनिक-कम-सुपरवाइजर के पद पर तैनात थे। 5 दिसंबर 2014 को वह कंपनी के आधिकारिक कार्य से वाहन लेकर गए थे। वापसी के दौरान राजपुरा के समीप हुई एक सड़क दुर्घटना में उनकी मौके पर ही मृत्यु हो गई थी।
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मृतक के माता-पिता ने कर्मचारी क्षतिपूर्ति अधिनियम के अंतर्गत अदालत में याचिका दायर कर बताया कि उनका पुत्र परिवार का एकमात्र सहारा और कमाऊ सदस्य था। सुनवाई के दौरान कंपनी और बीमा कंपनी ने विभिन्न तर्कों के साथ दावे का विरोध किया, लेकिन कर्मचारी क्षतिपूर्ति आयुक्त गौरव कुमार की अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और रिकॉर्ड का बारीकी से अध्ययन किया।
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