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लाठीचार्ज से नहीं दबाई जा सकती युवाओं की आवाज : पुनीत मल्ली
Thu, 23 Jul 2026 06:04 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Thu, 23 Jul 2026 06:04 AM IST
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धर्मशाला। प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता पुनीत मल्ली ने नई दिल्ली में कांग्रेस के प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई की निंदा की है। उन्होंने कहा कि लाठीचार्ज से युवाओं की आवाज को नहीं दबाया जा सकता। उन्होंने केंद्र सरकार पर लोकतंत्र में जायज मांगों को सुनने के बजाय दमन का रास्ता अपनाने का आरोप लगाया है।
पुनीत मल्ली ने कहा कि देश का युवा अपने भविष्य, रोजगार और शिक्षा व्यवस्था को लेकर अपनी बात रख रहा है। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी युवाओं के हक की लड़ाई लड़ने सड़कों पर उतरे, लेकिन शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर पुलिस ने बल प्रयोग किया। उन्होंने कहा कि विरोध प्रदर्शन करना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है, जिसे पुलिसिया कार्रवाई से छीना नहीं जा सकता।
उन्होंने कहा कि देशभर के लाखों विद्यार्थी नीट परीक्षा प्रणाली को लेकर लंबे समय से चिंतित और नाराज हैं, लेकिन केंद्र सरकार जवाब देने के बजाय अपनी जिम्मेदारी से भाग रही है। सरकार की इन्हीं नीतियों के कारण जनता का उस पर से विश्वास पूरी तरह उठ चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब पूरी शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हों और युवा ठगा हुआ महसूस कर रहा हो, ऐसे में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद पर बने रहने का कोई नैतिक हक नहीं है।
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पुनीत मल्ली ने कहा कि देश का युवा अपने भविष्य, रोजगार और शिक्षा व्यवस्था को लेकर अपनी बात रख रहा है। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी युवाओं के हक की लड़ाई लड़ने सड़कों पर उतरे, लेकिन शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर पुलिस ने बल प्रयोग किया। उन्होंने कहा कि विरोध प्रदर्शन करना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है, जिसे पुलिसिया कार्रवाई से छीना नहीं जा सकता।
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उन्होंने कहा कि देशभर के लाखों विद्यार्थी नीट परीक्षा प्रणाली को लेकर लंबे समय से चिंतित और नाराज हैं, लेकिन केंद्र सरकार जवाब देने के बजाय अपनी जिम्मेदारी से भाग रही है। सरकार की इन्हीं नीतियों के कारण जनता का उस पर से विश्वास पूरी तरह उठ चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब पूरी शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हों और युवा ठगा हुआ महसूस कर रहा हो, ऐसे में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद पर बने रहने का कोई नैतिक हक नहीं है।
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