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Kangra News: पांच वर्ष से किराये के कमरे में टंबर पशु औषधालय
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Mon, 30 Mar 2026 06:40 AM IST
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-12 वर्ष पहले स्कूल के कमरे में किया गया था संचालित
-करीब चार साल पहले असुरक्षित घोषित किया था कमरा
-पशुपालकों को करना पड़ रहा दिक्कत का सामना
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बृज मोहन कंठबाल
लंबागांव (कांगड़ा)। विकास खंड लंबागांव की ग्राम पंचायत टंबर में पशु औषधालय करीब पांच वर्ष से किराये के कमरे में संचालित हो रहा है। आज तक इसे अपना भवन नसीब नहीं हो पाया है।
करीब 12 वर्ष पहले जब इस पशु औषधालय की शुरुआत हुई थी, तब इसे स्कूल के एक कमरे में चलाया जा रहा था। समय के साथ स्कूल भवन जर्जर हो गया। करीब चार-पांच वर्ष पहले इसे असुरक्षित घोषित कर दिया गया। इसके बाद से पशु औषधालय को एक छोटे से किराये के कमरे में संचालित किया जा रहा है।
इतने वर्षों के बाद भी औषधालय के लिए स्थायी भवन का निर्माण न होना क्षेत्र के लोगों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। क्षेत्र की अधिकांश आबादी का मुख्य व्यवसाय पशुपालन है। ऐसे में उचित भवन के अभाव में न केवल कर्मचारियों, बल्कि पशुपालकों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए सरकार व संबंधित विभाग को इस दिशा में शीघ्र कदम उठाने चाहिएं। पशु औषधालय के लिए जल्द स्थायी भवन का निर्माण किया जाए।
उधर, इस संबंध में जयसिंहपुर स्थित वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी संजय अवस्थी ने बताया कि पशु औषधालय के नाम भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया चल रही है। जैसे ही यह औपचारिकता पूरी होगी, भवन निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
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-करीब चार साल पहले असुरक्षित घोषित किया था कमरा
-पशुपालकों को करना पड़ रहा दिक्कत का सामना
बृज मोहन कंठबाल
लंबागांव (कांगड़ा)। विकास खंड लंबागांव की ग्राम पंचायत टंबर में पशु औषधालय करीब पांच वर्ष से किराये के कमरे में संचालित हो रहा है। आज तक इसे अपना भवन नसीब नहीं हो पाया है।
करीब 12 वर्ष पहले जब इस पशु औषधालय की शुरुआत हुई थी, तब इसे स्कूल के एक कमरे में चलाया जा रहा था। समय के साथ स्कूल भवन जर्जर हो गया। करीब चार-पांच वर्ष पहले इसे असुरक्षित घोषित कर दिया गया। इसके बाद से पशु औषधालय को एक छोटे से किराये के कमरे में संचालित किया जा रहा है।
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इतने वर्षों के बाद भी औषधालय के लिए स्थायी भवन का निर्माण न होना क्षेत्र के लोगों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। क्षेत्र की अधिकांश आबादी का मुख्य व्यवसाय पशुपालन है। ऐसे में उचित भवन के अभाव में न केवल कर्मचारियों, बल्कि पशुपालकों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए सरकार व संबंधित विभाग को इस दिशा में शीघ्र कदम उठाने चाहिएं। पशु औषधालय के लिए जल्द स्थायी भवन का निर्माण किया जाए।
उधर, इस संबंध में जयसिंहपुर स्थित वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी संजय अवस्थी ने बताया कि पशु औषधालय के नाम भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया चल रही है। जैसे ही यह औपचारिकता पूरी होगी, भवन निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।