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Kangra News: गेहूं की फसल को पीला रतुआ का खतरा, विभाग ने जारी किया अलर्ट
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Sun, 11 Jan 2026 06:05 AM IST
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फतेहपुर (कांगड़ा)। जिले में गेहूं की फसल को रोगों से बचाने के लिए कृषि विभाग अलर्ट मोड पर आ गया है। कृषि विभाग ने किसानों को गेहूं की फसल में संभावित पीलापन और पीला रतुआ बीमारी के प्रति सतर्क रहने की कड़ी हिदायत दी है।
कृषि उप निदेशक डॉ. कुलदीप धीमान ने कहा कि फसल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कृषि विभाग और कृषि विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों की एक विशेष निगरानी समिति बनाई गई है। यह समिति जिले के विभिन्न क्षेत्रों में फसल की स्थिति पर नजर रखेगी। यदि फसल की पत्तियों पर पीला पाउडर या धारियां (पीला रतुआ के लक्षण) दिखाई दें, तो तुरंत नजदीकी कृषि केंद्र को सूचित करें।
डॉ. कुलदीप धीमान ने स्पष्ट किया है कि पीलापन कई कारणों (जैसे पोषक तत्वों की कमी या नमी) से भी हो सकता है। इसलिए विशेषज्ञ की सलाह के बिना किसी भी फफूंदनाशक का स्प्रे न करें। उन्होंने कहा कि जो किसान प्राकृतिक खेती कर रहे हैं, उन्हें रोग नियंत्रण के लिए विशेष प्राकृतिक विधियों और जैविक फफूंदनाशकों के उपयोग की जानकारी दी जाएगी। उन्होंने किसानों से अपील की है कि वे अपनी गेहूं की फसल पर लगातार नजर रखें और किसी भी समस्या की स्थिति में तुरंत विभाग से संपर्क करें।
कृषि उप निदेशक ने कहा कि किसानों को केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इनमें पीएम किसान, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, पीएम-कुसुम, आरकेवीवाई, एनएफएसएम शामिल हैं। इसके अलावा राज्य सरकार की हिम उन्नति योजना, प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना, मुख्यमंत्री खेत संरक्षण योजना, बाड़बंदी और कृषि यंत्रीकरण योजनाएं भी शामिल हैं। इन योजनाओं के माध्यम से किसानों को प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
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कृषि उप निदेशक डॉ. कुलदीप धीमान ने कहा कि फसल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कृषि विभाग और कृषि विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों की एक विशेष निगरानी समिति बनाई गई है। यह समिति जिले के विभिन्न क्षेत्रों में फसल की स्थिति पर नजर रखेगी। यदि फसल की पत्तियों पर पीला पाउडर या धारियां (पीला रतुआ के लक्षण) दिखाई दें, तो तुरंत नजदीकी कृषि केंद्र को सूचित करें।
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डॉ. कुलदीप धीमान ने स्पष्ट किया है कि पीलापन कई कारणों (जैसे पोषक तत्वों की कमी या नमी) से भी हो सकता है। इसलिए विशेषज्ञ की सलाह के बिना किसी भी फफूंदनाशक का स्प्रे न करें। उन्होंने कहा कि जो किसान प्राकृतिक खेती कर रहे हैं, उन्हें रोग नियंत्रण के लिए विशेष प्राकृतिक विधियों और जैविक फफूंदनाशकों के उपयोग की जानकारी दी जाएगी। उन्होंने किसानों से अपील की है कि वे अपनी गेहूं की फसल पर लगातार नजर रखें और किसी भी समस्या की स्थिति में तुरंत विभाग से संपर्क करें।
कृषि उप निदेशक ने कहा कि किसानों को केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इनमें पीएम किसान, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, पीएम-कुसुम, आरकेवीवाई, एनएफएसएम शामिल हैं। इसके अलावा राज्य सरकार की हिम उन्नति योजना, प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना, मुख्यमंत्री खेत संरक्षण योजना, बाड़बंदी और कृषि यंत्रीकरण योजनाएं भी शामिल हैं। इन योजनाओं के माध्यम से किसानों को प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।