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Kullu News: कटराईं में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Wed, 25 Mar 2026 05:22 AM IST
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कटराईं कटासनी मेला में पारंपरिक परिधान में नाटी डालते श्रद्धालु। -संवाद
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कटासनी मेले में निभाईं परंपराएं, सैकड़ों लोगों ने लिया देवता का आशीर्वाद
पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुनों के साथ निकाली देवता की शोभायात्रा
संवाद न्यूज एजेंसी
पतलीकूहल (कुल्लू)। कटराईं में मंगलवार को श्रद्धा का सैलाब उमड़ा। देव विधि-विधान, आस्था और उत्साह के साथ कटराईं गांव में स्थित गौहरी देवता मंदिर में मेला मनाया गया। इसमें घाटी के सैकड़ों श्रद्धालुओं ने देवता का आशीर्वाद लिया और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद लिया। मेले में पारंपरिक संस्कृति का जीवंत प्रदर्शन देखने को मिला। नवरात्र में हर वर्ष कटासनी मेला मनाया जाता है। इस साल भी मेले का भव्य आयोजन किया।
देवता के पुजारी रविंद्र राजगीर ने बताया कि कटासनी मेले का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। पहला मेला रविवार को कटराईं से सटे कटासनी क्षेत्र, सोमवार को दूसरा मेला दुआड़ा में विष्णु देवता के मंदिर में मनाया गया और अंतिम और प्रमुख मेला कटराईं में मंगलवार को हुआ, जहां देवता गौहरी की विशेष पूजा, हवन और पारंपरिक अनुष्ठान संपन्न किए गए। मंदिर प्रांगण में ढोल-नगाड़ों की गूंज और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुनों के बीच देवता की शोभायात्रा निकाली गई।
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पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुनों के साथ निकाली देवता की शोभायात्रा
संवाद न्यूज एजेंसी
पतलीकूहल (कुल्लू)। कटराईं में मंगलवार को श्रद्धा का सैलाब उमड़ा। देव विधि-विधान, आस्था और उत्साह के साथ कटराईं गांव में स्थित गौहरी देवता मंदिर में मेला मनाया गया। इसमें घाटी के सैकड़ों श्रद्धालुओं ने देवता का आशीर्वाद लिया और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद लिया। मेले में पारंपरिक संस्कृति का जीवंत प्रदर्शन देखने को मिला। नवरात्र में हर वर्ष कटासनी मेला मनाया जाता है। इस साल भी मेले का भव्य आयोजन किया।
देवता के पुजारी रविंद्र राजगीर ने बताया कि कटासनी मेले का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। पहला मेला रविवार को कटराईं से सटे कटासनी क्षेत्र, सोमवार को दूसरा मेला दुआड़ा में विष्णु देवता के मंदिर में मनाया गया और अंतिम और प्रमुख मेला कटराईं में मंगलवार को हुआ, जहां देवता गौहरी की विशेष पूजा, हवन और पारंपरिक अनुष्ठान संपन्न किए गए। मंदिर प्रांगण में ढोल-नगाड़ों की गूंज और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुनों के बीच देवता की शोभायात्रा निकाली गई।
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