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Kullu News: बाबूगोशा ने बढ़ाई बागवानों की कमाई, बेहतर मिल रहे भाव
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भुंतर सब्जी मंडी में नाशपाती की पैकिंग करते हुए। -संवाद
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खराहल (कुल्लू)। कुल्लू जिले में सेब के बाद नाशपाती प्रमुख नकदी फसल के रूप में तेजी से अपनी पहचान बना रही है। पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न किस्मों की रसीली और मीठी नाशपाती का उत्पादन लगातार बढ़ा है। इन दिनों बाबूगोशा नाशपाती की आमद भी मंडियों में शुरू हो गई है, जहां इसे बेहतर दाम मिल रहे हैं। अच्छे भाव मिलने से बागवानों के चेहरे खिल उठे हैं।
बागवानों का कहना है कि इस बार नाशपाती की अधिकांश किस्मों को मंडियों में संतोषजनक कीमत मिल रही है। हालांकि मौसम की मार के कारण उत्पादन पिछले वर्ष की तुलना में कम रहा, लेकिन बेहतर दाम मिलने से इस कमी की काफी हद तक भरपाई होने की उम्मीद है।
खराहल घाटी के बागवान सुशील भंडारी, केहर सिंह, सुनू राम और देवराज ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों से बाबूगोशा नाशपाती की मांग लगातार बढ़ रही है। पहाड़ी क्षेत्रों में उत्पादित इस किस्म के फल को अन्य राज्यों के व्यापारी भी पसंद कर रहे हैं, जिससे कुल्लू की विभिन्न मंडियों में इसकी अच्छी खरीद हो रही है। जिले में वर्तमान में करीब 400 हेक्टेयर क्षेत्र में विभिन्न किस्मों की नाशपाती की खेती की जा रही है।
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बागवानी विभाग के उपनिदेशक राजकुमार ने बताया कि बाबूगोशा का रकबा वार्टलेट किस्म की तुलना में कम है, लेकिन बेहतर गुणवत्ता और लंबे समय तक सुरक्षित रहने की क्षमता के कारण इसे बाजार में अधिक कीमत मिलती है।
बंदरोल आढ़ती एसोसिएशन के पूर्व प्रधान मोहन ठाकुर ने बताया कि ए-ग्रेड बाबूगोशा नाशपाती का अधिकतम भाव 100 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया है, जबकि गुणवत्ता के अनुसार इसका औसत भाव 40 से 80 रुपये प्रति किलोग्राम के बीच चल रहा है। उन्होंने कहा कि बेहतर बाजार भाव से इस सीजन में बागवानों की आय बढ़ने की उम्मीद है।
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बागवानों का कहना है कि इस बार नाशपाती की अधिकांश किस्मों को मंडियों में संतोषजनक कीमत मिल रही है। हालांकि मौसम की मार के कारण उत्पादन पिछले वर्ष की तुलना में कम रहा, लेकिन बेहतर दाम मिलने से इस कमी की काफी हद तक भरपाई होने की उम्मीद है।
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खराहल घाटी के बागवान सुशील भंडारी, केहर सिंह, सुनू राम और देवराज ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों से बाबूगोशा नाशपाती की मांग लगातार बढ़ रही है। पहाड़ी क्षेत्रों में उत्पादित इस किस्म के फल को अन्य राज्यों के व्यापारी भी पसंद कर रहे हैं, जिससे कुल्लू की विभिन्न मंडियों में इसकी अच्छी खरीद हो रही है। जिले में वर्तमान में करीब 400 हेक्टेयर क्षेत्र में विभिन्न किस्मों की नाशपाती की खेती की जा रही है।
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बागवानी विभाग के उपनिदेशक राजकुमार ने बताया कि बाबूगोशा का रकबा वार्टलेट किस्म की तुलना में कम है, लेकिन बेहतर गुणवत्ता और लंबे समय तक सुरक्षित रहने की क्षमता के कारण इसे बाजार में अधिक कीमत मिलती है।
बंदरोल आढ़ती एसोसिएशन के पूर्व प्रधान मोहन ठाकुर ने बताया कि ए-ग्रेड बाबूगोशा नाशपाती का अधिकतम भाव 100 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया है, जबकि गुणवत्ता के अनुसार इसका औसत भाव 40 से 80 रुपये प्रति किलोग्राम के बीच चल रहा है। उन्होंने कहा कि बेहतर बाजार भाव से इस सीजन में बागवानों की आय बढ़ने की उम्मीद है।