{"_id":"6a6ce713955cd71ac90bc86c","slug":"earnings-washed-away-by-floods-orchards-turned-into-heaps-of-debris-kullu-news-c-89-1-ssml1014-182971-2026-07-31","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kullu News: बाढ़ में बह गई कमाई, मलबे के ढेर में बदले बगीचे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kullu News: बाढ़ में बह गई कमाई, मलबे के ढेर में बदले बगीचे
विज्ञापन
मनाली के समीप ज्यादा बारिश के बाद आई बगीचों में भरा मलबा।-संवाद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मनाली। बुरुआ पंचायत के शालिंग नाले में अचानक आई बाढ़ ने नौ बागवानों की वर्षों की मेहनत पर पानी फेर दिया। नवजात शिशु की तरह देखभाल कर बड़े किए 25 से 30 साल पुराने सेब के कई पेड़ उखड़ गए और सालाना लाखों रुपये की आय देने वाले बगीचे मलबे, पत्थरों और जंगल से बहकर आई लकड़ियों के नीचे दब गए। जिन बागवानों ने दशकों की मेहनत से इन बगीचों को तैयार किया था, उनके सामने अब आजीविका का बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
बाढ़ का सबसे अधिक असर उन बगीचों पर पड़ा जो शालिंग नाले के किनारे स्थित थे। तेज बहाव कई पेड़ों को जड़ से उखाड़ ले गया, जबकि अनेक पेड़ मलबे में दब गए। पूरे बगीचे में भारी मात्रा में पत्थर, मिट्टी और लकड़ियां जमा हो गई हैं। इससे जो पेड़ अभी खड़े हैं, उनके भी सूखने का खतरा बढ़ गया है, क्योंकि उनकी जड़ों तक हवा और पानी का संतुलित प्रवाह बाधित हो गया है। लगभग सभी बगीचों में मलबा भर गया है। शाम के समय बाढ़ आने से इलाके में अफरा तफरी मच गई। गनीमत यह रही कि कोई जानी नुकसान नहीं हुआ। एसडीएम रमण कुमार शर्मा ने कहा कि तय नियमावली के अनुसार प्रभावित बागवानों को मुआवजा दिया जाएगा।
लगभग 40 सेब के पेड़ पूरी तरह तबाह हो गए हैं। इन पेड़ों से हर वर्ष तीन से चार लाख रुपये के सेब का उत्पादन होता था। बाढ़ ने उनकी जीवनभर की कमाई और मेहनत एक झटके में छीन ली।
विज्ञापन
-- -लक्ष्मण दास, प्रभावित बागवान
बाक्स
करीब 80 सेब के पेड़ों का बगीचा बाढ़ की भेंट चढ़ गया। कई पेड़ जड़ से उखड़ गए, जबकि कई मलबे में दब गए हैं। जो पेड़ बचे भी हैं, वे मलबे से क्षतिग्रस्त हो गए हैं और उनके बचने की उम्मीद भी कम है। उन्होंने बताया कि इन 25 से 30 साल पुराने पेड़ों से हर साल चार से पांच लाख रुपये की आय होती थी, लेकिन अब पूरा बगीचा बर्बाद हो चुका है।
-- -चमन महंत, बागवान
विज्ञापन
बाढ़ का सबसे अधिक असर उन बगीचों पर पड़ा जो शालिंग नाले के किनारे स्थित थे। तेज बहाव कई पेड़ों को जड़ से उखाड़ ले गया, जबकि अनेक पेड़ मलबे में दब गए। पूरे बगीचे में भारी मात्रा में पत्थर, मिट्टी और लकड़ियां जमा हो गई हैं। इससे जो पेड़ अभी खड़े हैं, उनके भी सूखने का खतरा बढ़ गया है, क्योंकि उनकी जड़ों तक हवा और पानी का संतुलित प्रवाह बाधित हो गया है। लगभग सभी बगीचों में मलबा भर गया है। शाम के समय बाढ़ आने से इलाके में अफरा तफरी मच गई। गनीमत यह रही कि कोई जानी नुकसान नहीं हुआ। एसडीएम रमण कुमार शर्मा ने कहा कि तय नियमावली के अनुसार प्रभावित बागवानों को मुआवजा दिया जाएगा।
विज्ञापन
लगभग 40 सेब के पेड़ पूरी तरह तबाह हो गए हैं। इन पेड़ों से हर वर्ष तीन से चार लाख रुपये के सेब का उत्पादन होता था। बाढ़ ने उनकी जीवनभर की कमाई और मेहनत एक झटके में छीन ली।
विज्ञापन
बाक्स
करीब 80 सेब के पेड़ों का बगीचा बाढ़ की भेंट चढ़ गया। कई पेड़ जड़ से उखड़ गए, जबकि कई मलबे में दब गए हैं। जो पेड़ बचे भी हैं, वे मलबे से क्षतिग्रस्त हो गए हैं और उनके बचने की उम्मीद भी कम है। उन्होंने बताया कि इन 25 से 30 साल पुराने पेड़ों से हर साल चार से पांच लाख रुपये की आय होती थी, लेकिन अब पूरा बगीचा बर्बाद हो चुका है।

मनाली के समीप ज्यादा बारिश के बाद आई बगीचों में भरा मलबा।-संवाद